रांची : राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने झारखंड विधानसभा का शीतकालीन सत्र शुरू होने के ठीक एक दिन पहले गुरूवार को झारखंड विधानसभा से पारित राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2025 और कोचिंग सेंटर नियंत्रण एवं विनियमन विधेयक 2025 को आपत्तियों के साथ सरकार को लौटा दिया है. राजभवन ने इन विधेयकों पर भाजपा समेत कई राजनीतिक दलों व गैर राजनीतिक संगठनों की ओर से जताई गई कई आपत्तियों का निपटारा कर फिर से विधेयकों को भेजने का सुझाव दिया है. मिली जानकारी के अनुसार दोनों विधेयक फिलहाल उच्च शिक्षा विभाग के पास आपत्तियों के निपटारे के लिए विचाराधीन है.
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झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2025

पिछले अगस्त महीने में आयोजित विधानसभा के पूरक मानसून सत्र के दौरान इन दोनों महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित करवाने के बाद इसे राज्यपाल की स्वीकृति के लिए भेजा गया था, ताकि कानून बनने के बाद इसे लागू किया जा सके. विधानसभा के पारित विश्वविद्यालय विधेयक 2025 में कुलपतियों की नियुक्ति के मामले में राज्यपाल के अधिकार को समाप्त करने का प्रावधान कर आयोग के गठन का प्रस्ताव है.
इस प्रावधान के खिलाफ विभिन्न संगठनों ने आपत्ति जताकर राज्यपाल के अधिकार छीनने की बात कही गई थी. तो वहीं विश्वविद्यालयों पर पूरी तरह से सरकार का नियंत्रण होने का भी आरोप लगाया गया था. भाजपा समेत कई पार्टियों ने इस विधेयक को वापस लेने की मांग की. तो वहीं कई छात्र संगठनों ने भी राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर इसके प्रावधानों पर आपत्ति जताई. इसे छात्रों के अधिकारों पर हनन बताया.
कोचिंग संस्थान नियंत्रण एवं विनियमन विधेयक 2025
इधर राज्यपाल ने कोचिंग संस्थान नियंत्रण एवं विनियमन विधेयक 2025 पर भी आपत्ति जताते हुए इसे सरकार को वापस भेज दिया है. इस विधेयक में 50 से अधिक छात्रों वाले कोचिंग संस्थानों के लिए रजिस्ट्रेशन का प्रावधान जरूरी होने के अलावा संस्थानों को रजिस्ट्रेशन के समय बैंक गारंटी देने की भी बाध्यता तय की गयी है. विधेयक में कोचिंग संस्थानों को नियंत्रित करने के लिए जिला व राज्य स्तर पर रेगुलेटरी कमेटी बनाने, 1000 से अधिक छात्र होने पर मनोचिकित्सक रखने की भी बाध्यता तय की गयी है.
कोचिंग संस्थानों ने इन प्रावधानों के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराते हुए इसके कारण छात्रों को पर आर्थिक बोझ बढ़ने की भी बात कही क्योंकि कोचिंग संस्थानों द्वारा बैंक गारंटी के रूप में दी जाने वाली रकम की वसूली किसी ना किसी तरह से छात्रों से लेने की ही बात कही गई. कोचिंग संस्थानों के संचालकों ने आपत्ति दर्ज कराते हुए राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा था. ऐसे में राजभवन ने इस विधेयक को आपत्तियों के निपटारे के लिए सरकार को लौटा दिया है.

