न्यूज डेस्क : भारतीय ओलंपिक संघ के पूर्व अध्यक्ष व पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश कलमाड़ी का मंगलवार तड़के पुणे के दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल में 81 साल की आयु में निधन हो गया. वह पिछले कुछ महीनों से बीमार चल रहे थे। वह तीन बार राज्यसभा सांसद और दो बार लोकसभा के लिए पुणे से सांसद चुने गए. उन्होंने 1995-96 में भारत सरकार में नरसिंह राव की कैबिनेट में रेल राज्य मंत्री के रूप में भी कार्य किया. खास बात यह है कि वे एकमात्र जूनियर मंत्री थे जिन्होंने रेलवे बजट पेश किया.
1 मई 1944 को पुणे में जन्मे सुरेश कलमाड़ी भारतीय वायु सेना में पायलट के रूप में अपनी सेवा दे चुके थे. 1964 से 1972 तक उन्होंने भारत की सेवा की, जिसमें 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध भी उनकी भागीदारी रही. 1974 में वायु सेना से समय से पहले सेवानिवृत्त होकर उन्होंने राजनीतिक सफर शुरू किया. स्क्वाड्रन लीडर के रैंक के पद पर रहते हुए उन्होंने सेवानिवृत्त ली थी.
उनके राजनीतिक जीवन में विवादों की भरमार रही, लेकिन उन्होंने खेल प्रशासन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. वे महाराष्ट्र क्रिकेट संघ और अन्य दलों के प्रमुख सदस्य थे. 1996 में वे भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के अध्यक्ष बने और कई कार्यकाल तक इस पद पर रहे. इसके अलावा वे एशियन एथलेटिक्स एसोसिएशन के अध्यक्ष, भारतीय एथलेटिक्स फेडरेशन के जीवन कालीन अध्यक्ष तथा राष्ट्रमंडल खेल आयोजन समिति के अध्यक्ष भी रहे. उन्होंने लगातार 23 सालों तक पुणे मैराथन का आयोजन किया और भारत में फॉर्मूला वन ग्रांड प्रिक्स लाने में अहम भूमिका निभाई.
सुरेश कलमाड़ी विवादित विचारों और कठोर शैली के लिए जाने जाते थे. उन्होंने कई बार राजनीतिक और खेल संबंधित मामलों में आलोचना का सामना किया, लेकिन उनके समर्थक उन्हें एक सशक्त और ईमानदार नेता मानते थे. सुरेश कलमाड़ी के करियर का सबसे विवादास्पद पक्ष 2010 के दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन रहा. खेलों में वित्तीय घोटाले के आरोप लगे जिसके बाद CBI ने उनके खिलाफ जांच शुरू की. अप्रैल 2011 में उन्हें गिरफ्तार किया गया और करीब 9 महीने तक तिहाड़ जेल में रहना पड़ा.
2014 में CBI ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की और 2025 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों से उन्हें मुक्त कर दिया. दिल्ली न्यायालय ने भी इस क्लीन चिट को स्वीकार किया, जिससे उनके खिलाफ लंबे समय से चल रहे कानूनी विवाद समाप्त हो गया. सुरेश कलमाड़ी को उनके राजनीतिक और खेल प्रशासन के योगदान के लिए आज भी याद किया जाता है.


