दिल्ली : नोएडा के सेक्टर-150 में निर्माणाधीन मॉल के बेसमेंट में भरे पानी में कार समेत डूबने से युवा इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। नॉलेज पार्क कोतवाली पुलिस ने मृतक के पिता की शिकायत पर बिल्डर कंपनियों एमजे विशटाउन और लोटस ग्रीन के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या, लापरवाही से मौत और मानव जीवन को खतरे में डालने जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
घटना शुक्रवार रात की बताई जा रही है, जब युवराज की कार सेक्टर-150 टी-प्वाइंट के पास निर्माणाधीन मॉल के खुले बेसमेंट में भरे ठंडे पानी में गिर गई थी। युवराज करीब दो घंटे तक कार की छत पर खड़े रहकर मदद का इंतजार करता रहा, लेकिन समय पर उसे बचाने कोई नहीं पहुंच पाया।
पीड़ित पिता राजकुमार मेहता ने प्रशासन और साइट पर मौजूद लोगों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कई लोग मौके पर मौजूद थे, लेकिन मदद करने के बजाय वीडियो बनाते रहे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बचाव के लिए कोई गोताखोर या बचाव की टीम उपलब्ध नहीं थी। परिवार का कहना है कि अगर समय रहते मदद मिल जाती तो युवराज की जान बच सकती थी।
उधर, नोएडा प्राधिकरण के सीईओ डॉ. लोकेश एम. ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए नोएडा ट्रैफिक सेल (एनटीसी) के एक जूनियर इंजीनियर की सेवा समाप्त करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों की जांच और बैरिकेडिंग, लाइटिंग तथा जल निकासी सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में युवराज की मौत कार्डियक अरेस्ट से हुई बताई गई। आशंका है कि अत्यधिक ठंडे पानी में लंबे समय तक रहने और घबराहट के कारण उनका दिल रुक गया।


