नई दिल्ली: लोकसभा में बुधवार को वित्त विधेयक 2026 पर चर्चा हुई। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विधेयक पेश करते हुए सरकार की आर्थिक नीतियों का बचाव किया और विपक्ष पर तीखा हमला बोला।
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वित्त मंत्री ने पेश किया विधेयक
लोकसभा में वित्त विधेयक 2026 पेश करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि राष्ट्र निर्माण एक सतत प्रक्रिया है और इसे रातोंरात हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने सरकार के आर्थिक सुधारों को दीर्घकालिक बताया। निर्मला सीतारमण ने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में देश की अर्थव्यवस्था कमजोर स्थिति में थी। उन्होंने कहा कि विपक्ष डबल बैलेंस शीट की समस्या छोड़कर गया था, जिससे बैंकिंग सेक्टर प्रभावित हुआ था।
कोविड के असर पर दिया बयान
वित्त मंत्री ने कहा कि कोविड-19 संकट का भारतीय अर्थव्यवस्था पर सीमित असर पड़ा और सरकार ने हालात को संभालने में प्रभावी कदम उठाए। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान में बैंकिंग क्षेत्र की स्थिति पहले से बेहतर है। सीतारमण ने कहा कि विपक्ष के शासनकाल में 22 महीनों तक महंगाई दर दोहरे अंक में रही, जो एक रिकॉर्ड है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछली सरकारों द्वारा लिए गए कर्ज का ब्याज आज भी चुकाना पड़ रहा है। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार सुधार मजबूरी में नहीं, बल्कि स्पष्टता और आत्मविश्वास के साथ कर रही है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सुधार एक्सप्रेस पर आगे बढ़ रहा है।
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विपक्ष की अनुपस्थिति पर नाराजगी
वित्त मंत्री ने सदन में विपक्ष की अनुपस्थिति पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जब विपक्ष सवाल उठाता है, तो उसे जवाब सुनने के लिए सदन में मौजूद रहना चाहिए। वित्त विधेयक 2026 का मुख्य उद्देश्य आगामी वित्त वर्ष के लिए सरकार के वित्तीय प्रस्तावों को लागू करना है। चर्चा के बाद इसे पारित किए जाने की उम्मीद है। इसके अलावा, वित्त मंत्री द्वारा दिवाला और दिवालियापन संहिता (संशोधन) विधेयक, 2025 पेश किए जाने की भी संभावना है। इसका उद्देश्य दिवाला और दिवालियापन संहिता में आवश्यक बदलाव करना है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि चर्चा के बाद वित्त विधेयक कब पारित होता है और इससे देश की अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ता है।


