राँची: झारखंड गृह रक्षा वाहिनी (होम गार्ड) के मुख्यालय में अवैध वसूली के गंभीर आरोपों के बाद हड़कंप मच गया है। होमगार्ड के बर्खास्त कंपनी कमांडर कैलाश प्रसाद यादव द्वारा लगाए गए आरोपों पर तत्काल कार्रवाई करते हुए, होमगार्ड महानिदेशक (DG) ने मुख्यालय के चार प्रमुख पदाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त कर सभी से स्पष्टीकरण भी मांगा है।
Highlights:
चार कर्मियों पर कैलाश प्रसाद यादव ने अवैध वसूली का लगाया था आरोप
होमगार्ड के कोडरमा में पदस्थापित एक कंपनी कमांडर, कैलाश प्रसाद यादव ने विभाग के मुख्यालय में कार्यरत चार कर्मियों पर 8 लाख रुपये की अवैध वसूली की मांग करने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। यह शिकायत उन्होंने सीधे भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी), झारखंड के पुलिस महानिदेशक को ईमेल के माध्यम से भेजी है।
पदाधिकारी आए जाँच के घेरे में
होमगार्ड डीजी ने जिन चार पदाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से कर्तव्य से वंचित कर स्पष्टीकरण मांगा है, वे सभी मुख्यालय में महत्वपूर्ण पदों पर तैनात थे:
-
अनुज कुमार (निरीक्षक): स्थापना शाखा प्रभारी
-
सूरज प्रकाश सिंह (कंपनी कमांडर): गोपनीय रीडर, डीआईजी होमगार्ड
-
दीपक पुंज: रीडर, होमगार्ड डीजी
-
संजय सिंह (निरीक्षक): ओटीडी (OTD) शाखा प्रभारी
विभाग ने तत्काल प्रभाव से शुरू कर की कार्रवाई
होमगार्ड विभाग ने बुधवार को कहा कि विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के माध्यम से यह जानकारी सामने आई कि बर्खास्त कमांडर कैलाश प्रसाद यादव ने यह आरोप लगाया है कि उनके द्वारा गृह रक्षा वाहिनी के कार्यालय में पदस्थापित विभिन्न पदाधिकारियों को पैसा दिया गया था। इन आरोपों को संज्ञान में लेते हुए, विभाग ने तत्काल प्रभाव से कार्रवाई शुरू कर दी है। बर्खास्त कंपनी कमांडर कैलाश प्रसाद यादव द्वारा नामित किए गए सभी पदाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से कर्तव्य से वंचित कर दिया गया है। स्पष्टीकरण मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बर्खास्तगी: जालसाजी और सेवा संहिता का उल्लंघन
यह पूरा मामला बर्खास्त किए गए कंपनी कमांडर कैलाश प्रसाद यादव से जुड़ा है। कैलाश यादव को 24 नवंबर 2024 को सेवा से बर्खास्त किया गया था। कैलाश यादव पर षड्यंत्र एवं जालसाजी के तहत विभिन्न लोगों को अवैध रूप से होमगार्ड में पुनः नामांकित करने का गंभीर आरोप था। उनके खिलाफ धुर्वा थाना में FIR (कांड संख्या-278/24) दर्ज हुई थी। विभागीय कार्यवाही और पुलिस अनुसंधान (रांची पुलिस) दोनों में यह साबित हुआ कि उन्होंने पुनः नामांकन पंजी में छेड़छाड़ कर अवैध तरीके से लोगों को गृह रक्षक बनाया और व्यक्तिगत लाभ के लिए उन्हें राशि का भुगतान भी कराया। इन कृत्यों को घोर अनुशासनहीनता, भ्रष्टाचार एवं सेवा संहिता का उल्लंघन मानते हुए उन्हें बर्खास्त कर दिया गया था।
अब अपनी बर्खास्तगी के बाद, कैलाश यादव द्वारा मुख्यालय के चार उच्चाधिकारियों पर लगाए गए वसूली के इन नए आरोपों ने विभाग में भ्रष्टाचार के गंभीर नेटवर्क की ओर इशारा किया है, जिस पर अब उच्च स्तरीय जाँच का दबाव बढ़ गया है।
ये भी देखें:
क्या मईयां सम्मान योजना खतरे में ?
गुमला में पुआल के ढेर में जिंदा जला डेढ़ साल का मासूम, खेल-खेल में लगी आग


