Monday, September 14, 2026

दिल्ली हाईकोर्ट ने एयर प्यूरीफायर पर GST घटाने की मांग को लेकर केंद्र से मांगा जवाब

नई दिल्ली : राजधानी और देश के कई हिस्सों में खराब होती हवा के बीच एयर प्यूरीफायर को आम लोगों की पहुंच में लाने की मांग तेज हो गई है। इसी कड़ी में दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एयर प्यूरीफायर पर GST 18% से घटाकर 5% करने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि जब हवा की स्थिति गंभीर है, तो एयर प्यूरीफायर पर टैक्स कम क्यों नहीं किया जा सकता।

क्यों न सस्ता हो एयर प्यूरीफायर

सुनवाई के दौरान जस्टिस विकास महाजन और जस्टिस विनोद कुमार की बेंच ने कहा कि फिलहाल एयर प्यूरीफायर की कीमत 10 से 15 हजार रुपये के बीच है। ऐसे में GST को एक उचित स्तर पर क्यों नहीं लाया जाता, ताकि आम आदमी भी इसे खरीद सके। कोर्ट ने सरकार से कहा कि आपको जो भी करना पड़े, कीजिए लेकिन टैक्स कम करने के विकल्प पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एन. वेंकटरमण ने याचिका पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि याचिका में स्वास्थ्य विभाग को पक्षकार नहीं बनाया गया है, जबकि एयर प्यूरीफायर को मेडिकल डिवाइस घोषित करने की मांग की जा रही है। केंद्र का कहना था कि GST काउंसिल इस तरह का फैसला सीधे नहीं कर सकती।

GST काउंसिल पर कोर्ट का सवाल

इस पर कोर्ट ने पूछा कि GST काउंसिल को फैसला लेने में क्या दिक्कत है। जवाब में केंद्र ने कहा कि इस मामले में संवैधानिक पहलू जुड़े हैं। नियमों के तहत लंबी प्रक्रिया, लाइसेंसिंग और अन्य औपचारिकताएं होती हैं, जिससे कई व्यावहारिक समस्याएं खड़ी हो सकती हैं। केंद्र ने कोर्ट को बताया कि GST एक फेडरल टैक्स है और GST काउंसिल एक संवैधानिक संस्था है। इसमें केंद्र और सभी राज्यों को अपनी बात रखने का अधिकार होता है। यदि किसी प्रस्ताव पर वोटिंग करनी हो, तो वह केवल फिजिकल मीटिंग में ही संभव है, ऑनलाइन नहीं। इसलिए तय प्रक्रिया को दरकिनार नहीं किया जा सकता।

9 जनवरी को अगली सुनवाई

केंद्र ने विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। इस पर दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार को 10 दिन में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई 9 जनवरी को तय की। यह जनहित याचिका एडवोकेट कपिल मदान ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि मेडिकल डिवाइस रूल्स और 2020 की केंद्र सरकार की अधिसूचना के अनुसार एयर प्यूरीफायर मेडिकल डिवाइस की परिभाषा में आते हैं। जब अधिकांश मेडिकल डिवाइस पर 5% GST लगता है, तो एयर प्यूरीफायर पर 18% GST अनुचित है। याचिकाकर्ता ने विश्व स्वास्थ्य संगठन और स्वास्थ्य मंत्रालय की सलाह का हवाला देते हुए कहा कि एयर प्यूरीफायर को लग्जरी आइटम मानकर ऊंचा टैक्स लगाना लोगों के स्वास्थ्य अधिकार पर अतिरिक्त बोझ डालता है।

पहले भी उठ चुका है मुद्दा

इस मामले पर 24 दिसंबर को भी सुनवाई हुई थी। तब कोर्ट ने पूछा था कि जब राजधानी में हवा की स्थिति इमरजेंसी जैसी बनी रहती है, तो एयर प्यूरीफायर पर 18% GST क्यों लगाया जा रहा है। कोर्ट ने कहा था कि अगर सरकार साफ हवा उपलब्ध नहीं करा पा रही, तो कम से कम एयर प्यूरीफायर पर टैक्स कम कर देना चाहिए। कोर्ट के अनुसार, हर नागरिक को साफ हवा में सांस लेने का अधिकार है, और ऐसे में एयर प्यूरीफायर को लग्जरी मानना ठीक नहीं है।

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एयर नाऊ स्पेशल

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