रांची: झारखंड में सोमवार से इकोलिजकल एप्प के माध्यम के जरिए वन्यप्राणियों की गणना प्रादेशिक एवं संरक्षित वन क्षेत्र में शुरू हो गई। यह गणना राज्य के 31 प्रादेशिक वन क्षेत्र में और पांच संरक्षित वन क्षेत्र में हो रही है, जिसमें पलामू एवं दलमा टाईगर रिजर्व शामिल है। साथ ही तीन अन्य संरक्षित वन्यजीव अभयारण्यों भी शामिल है।
इस बारे में राज्य के नोडल अधिकारी एवं पलामू टाईगर रिजर्व के निदेशक एस आर नटेश ने बताया कि “यह गणना हर चार साल के बाद पूरी तरह वैज्ञानिक पद्धति से होती है, ताकि वन्यजीवों की मौजूदगी के संबंध में सटीक जानकारी प्राप्त हो सके।” नटेश ने बताया कि “देश में आधे से अधिक जंगलों में वन्यजीवों की गिनती आज से शुरू है और कुछ रिजर्व प्रादेशिक वन क्षेत्रों में अलग-अलग अवधि में शुरू होने वाले हैं ।”
उन्होंने बताया कि यह गिनती राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकर(एनटीसीए) और भारतीय जीव संस्थान (डब्ल्यू एल एल) के मार्गदर्शन में प्रत्येक चार वर्ष में होती है । इसमें फिल्ड डेटा संग्रह और कैमरा ट्रेपिंग के उपयोग होते हैं । इसके अतिरिक्त इकोलिजकल एप्प की मदद इस मामले में ली जा रही है ।
गणना संबंधी विस्तृत जानकारी देते हुए पलामू टाईगर रिजर्व के उपनिदेशक कुमार आशीष ने बताया कि “भारत में फिलहाल 58 रिजर्व (अभयारण्य) हैं, जिसमें इस वर्ष मध्य प्रदेश के घोषित माधव टाईगर रिजर्व भी शामिल है । इस पिछले मार्च में अभयारण्य भारत सरकार ने घोषित किया था।” उन्होंने बताया कि “देश में 2022 में हुई गणना के अनुसार बाघों की संख्या 3167 है, जो विश्व के कुल संख्या का 70 प्रतिशत है । इस बार इसमें और वृद्धि होने के अनुमान है।”
आशीष ने बताया कि गणना में खास बात यह कि तकनीक के अलावे उपग्रह आधारित सर्वेक्षण के साथ ही मानवकृत तरीके से गणना प्रणाली को पूरा किया जाना है, जिसमें वन्यप्राणी के ‘गोबर’ को संग्रहित किया जाना है । साथ में पदचिन्ह, तथा खरोंच को ध्यान में रखना भी है।


