हजारीबाग : हजारीबाग जिले के बेलतू में 24 जनवरी को सरस्वती पूजा विसर्जन जुलूस के दौरान दो समुदाय के बीच झड़प हो गई। जिसमें 12 से अधिक लोग घायल हुए। घटना की खबर मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नजर में रखते हुए पूरे क्षेत्र में कड़ी सुरक्षा कर दी गई है। जानकारी के अनुसार, झड़प के दौरान दोनों ओर से पत्थरबाजी हुई। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन अधिकारी मौके पर पहुंच गए। वे दोनों समुदायों के लोगों को समझाने का प्रयास में जुटे हैं। घायलों का इलाज स्थानीय अस्पताल में चल रहा है।
Highlights:
भड़काऊ गाने से विवाद
हजारीबाग एसपी अंजनी अंजन ने बताया कि बेलतू से दो समुदायों के बीच झड़प की सूचना मिली है। पुलिस और जिला प्रशासन स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं और घटना में दोषी पाए जाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह पूरी घटना बेलतू पिकेट और बाजार ताड़ के बीच हुई है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, विसर्जन जुलूस के दौरान भड़काऊ गाने बजाने से विवाद उत्पन्न हुआ, हालांकि इसकी मुख्य वजह की जांच की जा रही है। फिलहाल, बड़कागांव एसडीपीओ पवन कुमार के साथ चार थाना प्रभारी घटनास्थल पर मौजूद हैं और स्थिति को सामान्य बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं। हजारीबाग डीसी शशि प्रकाश सिंह और एसपी अंजनी भी घटनास्थल के लिए हुए रवाना हो गए हैं।
बाबूलाल मरांडी की प्रतिक्रिया
भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने इस घटना को लेकर अपने ऑफिसियल एक्स हैंडल पर पोस्ट करते हुए लिखा “झारखंड में हजारीबाग के केरेडारी प्रखंड में सरस्वती पूजा के मूर्ति विसर्जन जुलूस पर पथराव किए जाने की सूचना है, जिसमें कई श्रद्धालु घायल हुए हैं। यह कोई नई घटना नहीं है। आज से 4 साल पहले बरही में सरस्वती पूजा विसर्जन के दौरान ही जुलूस से खींचकर रूपेश पाण्डेय की हत्या समुदाय विशेष के लोगों द्वारा कर दी गई थी। रामगढ़, गढ़वा समेत कई अन्य जगहों पर गत वर्ष भी मूर्ति विसर्जन के दौरान हमला किया गया था। ऐसा कोई त्योहार नहीं बीतता, जब हिंदुओं के उपर हमला न होता हो। हिंदू समाज के बिखराव का फायदा उठाकर सत्ता हथियाने वाली झामुमो, कांग्रेस और राजद जैसे मुस्लिम तुष्टिकरण करने वाली राजनीतिक पार्टियां मुसलमानों को खरोच आने पर भी तिलमिला उठती हैं, लेकिन हिंद धर्म के जुलूस पर होते हमलों पर चुप्पी साध लेते समाज को एकजुट होकर अपनी शक्ति को पहुंचानने की जरूरत है। संगठित होकर पुलिस, प्रशासन सबको उचित कारवाई के लिए बाध्य किया जा सकता है।”


