बेंगलुरु: कर्नाटक के चर्चित योगेश गौड़ा हत्याकांड में बेंगलुरु की स्पेशल कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री विनय कुलकर्णी सहित 17 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है, जिससे राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर 30-30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। इससे पहले 15 अप्रैल को कोर्ट ने विनय कुलकर्णी समेत अन्य आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और 120B (आपराधिक साजिश) के तहत दोषी ठहराया था। स्पेशल जज संतोष गजानन भट ने कहा कि सभी ने मिलकर हत्या की साजिश रची और उसे अंजाम दिया।
Highlights:
CBI ने संभाली थी जांच
यह मामला 15 जून 2016 का है, जब धारवाड़ के सप्तापुर स्थित जिम में भाजपा नेता और जिला पंचायत सदस्य योगेश गौड़ा की हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने उस समय राज्य की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था। शुरुआत में इस मामले की जांच स्थानीय पुलिस ने की थी, लेकिन राजनीतिक दबाव और विवाद के चलते 2019 में यह केस केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दिया गया। CBI ने जांच के बाद विनय कुलकर्णी को मुख्य साजिशकर्ता बताया था और 2020 में उन्हें गिरफ्तार किया गया था।
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दो आरोपी बरी
कानून के अनुसार, किसी जनप्रतिनिधि को दो साल या उससे अधिक की सजा होने पर उसकी सदस्यता समाप्त हो सकती है। ऐसे में इस फैसले का असर विनय कुलकर्णी की विधानसभा सदस्यता पर भी पड़ सकता है। मामले में दो आरोपियों (वासुदेव रामा नीलेकानी और सोमशेखर न्यामगौड़ा) को सबूतों के अभाव में कोर्ट ने बरी कर दिया। इस केस में दोषी ठहराए गए अन्य आरोपियों में विक्रम बेल्लारी, कीर्ति कुमार, संदीप सावदत्ती, विनायक कटगी, महाबलेश्वर होंगल, संतोष सावदत्ती, दिनेश, अश्वथ, सुनील, नजीर अहमद, शानवाज समेत कई अन्य नाम शामिल हैं।
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लंबे समय तक चला केस
यह मामला पिछले करीब 10 साल से अदालत में चल रहा था। कई चरणों में जांच, गिरफ्तारी और जमानत के बाद आखिरकार 2026 में कोर्ट ने अपना अंतिम फैसला सुनाया। इस फैसले के बाद कर्नाटक की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। आने वाले समय में इस मामले का असर राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है।


