नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को बतौर मुख्य न्यायाधीश अपने पहले दिन सुप्रीम कोर्ट की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया, जब उन्होंने मामलों की अर्जेंट लिस्टिंग के लिए मौखिक मेंशनिंग बंद करने का निर्देश दिया. उन्होंने केवल लिखित मेंशनिंग स्लिप के मान्य होने की बात कही। जस्टिस सूर्यकांत ने साफ किया कि केवल असाधारण परिस्थितियां जैसे फांसी की सजा, या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में ही मौखिक मेंशनिंग सुनी जाएगी। उन्होंने कहा कि फाइल भले ही अटके, लेकिन न्याय रुकना नहीं चाहिए।
Highlights:
2 घंटे में 17 मामलों की सुनवाई
कार्यभार संभालने के बाद जस्टिस सूर्यकांत ने पहले ही दिन लगभग दो घंटे की कार्यवाही में 17 मामलों की सुनवाई की।
गौर करने वाली बात यह है कि उनसे पहले भी पूर्व CJI संजीव खन्ना ने मौखिक मेंशनिंग बंद की थी, लेकिन CJI बी.आर. गवई ने इसे फिर से शुरू किया था। अब जस्टिस सूर्यकांत ने इसे दोबारा रोक दिया है।
24 नवंबर को ली शपथ
देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश बने जस्टिस सूर्यकांत ने 24 नवंबर को हिंदी में शपथ ली। उनका कार्यकाल लगभग 14 महीने का होगा और वे 9 फरवरी 2027 को रिटायर होंगे। वहीं, मौजूदा CJI बी.आर. गवई का कार्यकाल 23 नवंबर को समाप्त हुआ।
राष्ट्रपति ने दिलाई शपथ, कई देशों के न्यायाधीश रहे मौजूद
सोमवार सुबह राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जस्टिस सूर्यकांत को मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ दिलाई। इसके बाद CJI सूर्यकांत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई गणमान्य व्यक्तियों से मुलाकात की और पूर्व CJI गवई से भी गले मिले।
इस समारोह की खास बात यह रही कि पहली बार इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय न्यायिक प्रतिनिधिमंडल ने किसी CJI के शपथ ग्रहण में हिस्सा लिया। इसमें भूटान, नेपाल, श्रीलंका, केन्या, मॉरिशस, मलेशिया और ब्राजील के मुख्य न्यायाधीश और उनके परिवार के सदस्य शामिल हुए।
पूर्व CJI गवई ने दी नई मिसाल
शपथ ग्रहण समारोह के बाद पूर्व CJI बी.आर. गवई ने एक अनोखी मिसाल कायम की। उन्होंने अपनी आधिकारिक गाड़ी राष्ट्रपति भवन में ही अपने उत्तराधिकारी जस्टिस सूर्यकांत के लिए छोड़ दी, जिसे काफी सराहा जा रहा है। जस्टिस सूर्यकांत के कार्यभार संभालते ही सुप्रीम कोर्ट में कामकाज की प्रणाली में बड़ा बदलाव आया है। अब देखा जाएगा कि लिखित मेंशनिंग की नई व्यवस्था कोर्ट की कार्यवाही को कितना सुगम बनाती है।


