Saturday, September 12, 2026

आज से शुरू हुई चैत्र नवरात्रि, 9 दिनों तक होगी देवी के नौ रूपों की पूजा

नई दिल्ली: देशभर में आज से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो गई है। 19 मार्च से 27 मार्च तक चलने वाले इस पर्व में श्रद्धालु मां दुर्गा की पूजा-अर्चना और व्रत रखकर भक्ति में लीन रहेंगे। वसंत ऋतु में आने के कारण इसे वासंती नवरात्र भी कहा जाता है।

हिंदू नववर्ष के साथ होती है शुरुआत

चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह हिंदू नववर्ष के साथ शुरू होती है। इसे साल की पहली नवरात्रि माना जाता है, जिसमें भक्त पूरे विधि-विधान से देवी पूजा और उपवास करते हैं। नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना (कलश स्थापना) की जाती है। इस बार इसके लिए 8 शुभ मुहूर्त बताए गए हैं। घट स्थापना के साथ ही नौ दिनों तक चलने वाले पूजा अनुष्ठान की शुरुआत होती है।

नवदुर्गा की होती है आराधना

नवरात्रि के दौरान दुर्गा के नौ रूपों यानी नवदुर्गा की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हर दिन देवी के अलग-अलग स्वरूप की आराधना करने से विशेष फल मिलता है। देवी पुराण और मार्कंडेय पुराण में नवदुर्गा के महत्व का विस्तृत वर्णन मिलता है। इन दिनों देवी पूजा के साथ व्रत रखने पर खास जोर दिया जाता है। मान्यता है कि व्रत रखने से शरीर और मन दोनों शुद्ध होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, वसंत ऋतु में बीमारियों का खतरा बढ़ता है, इसलिए इस समय खानपान में संयम रखना फायदेमंद होता है।

घट स्थापना का आध्यात्मिक महत्व

घट स्थापना में मिट्टी का कलश पृथ्वी तत्व का प्रतीक होता है, जिसमें जल और वायु तत्व मौजूद होते हैं। पास रखा दीपक अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करता है। इस तरह कलश में ब्रह्मांड की सकारात्मक ऊर्जा का आवाहन किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जल में सभी देवी-देवताओं का वास होता है, इसलिए कलश पूजा को विशेष महत्व दिया गया है। वैज्ञानिक दृष्टि से भी व्रत को फायदेमंद माना गया है। उपवास के दौरान शरीर ऑटोफेजी नामक प्रक्रिया से गुजरता है, जिसमें कमजोर कोशिकाएं नष्ट होती हैं और शरीर को नई ऊर्जा मिलती है। इस प्रक्रिया पर शोध के लिए वैज्ञानिक योशिनोरी ओहसुमी को 2016 में नोबेल पुरस्कार मिला था।

यह भी पढ़ें: ओडिशा SCB मेडिकल कॉलेज में आग के बाद बड़ा एक्शन, 4 अधिकारी निलंबित, 12 मरीजों की मौत

संयम का पालन जरूरी

नवरात्रि व्रत में केवल खानपान ही नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म का भी संयम रखा जाता है। मानसिक व्रत में बुरे विचारों से दूर रहना, वाचिक व्रत में सच बोलना और कायिक व्रत में किसी को नुकसान न पहुंचाना शामिल है। इससे शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से लाभ मिलता है। चैत्र नवरात्रि केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं है, बल्कि यह शरीर और मन को संतुलित रखने का भी अवसर है। नौ दिनों तक संयम और भक्ति के साथ जीवनशैली में सुधार लाने की यह परंपरा सदियों से चली आ रही है।

spot_img

एयर नाऊ स्पेशल

Big Breaking News: एक करोड़ का इनामी नक्सली मिशिर...

रांची: झारखंड पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों को नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी सफलता मिली है. प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के सेंट्रल कमेटी सदस्य और...
- Advertisement -spot_img

सोशल मीडिया

25,000FansLike
40,000FollowersFollow
500FollowersFollow
113,000SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

ट्रेंडिंग ख़बर