Friday, June 12, 2026

पलामू में करोड़ो में लगी CCTV कैमरे 3 माह से बंद, कैसे होगी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत   

न्यूज डेस्क: पलामू के प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए नगर निगम क्षेत्र के विभिन्न चौक-चौराहो पर स्टार कंपनी के द्वारा लगभग 113 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे, लेकिन ये कैमरे पिछले 3 माह से बंद पड़ी हुई है. निगम की टीओपी वन में 58 कैमरे और टीओपी टू में 55 कैमरे लगाए गए थे जिनमें से  कई कैमरे अबतक खराब हो चुके है. प्रशासन ने इन्हें लगाने के लिए 1 करोड़ 90 लाख रुपए खर्च किए थे.

सुरक्षा के लिए लगाए गए कैमरे

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2024 में जेमपोर्टल के माध्यम से जिला प्रशासन ने टेंडर जारी किया था. जिसके बाद कंपनी ने 2024 नवंबर से लेकर 2025 नवंबर तक कैमरा मेंटेनेंस के लिए एग्रीमेंट किया गया था. एग्रीमेंट खत्म होने के बाद भी 6 माह तक सीसीटीवी कैमरा नहीं चल पाया. वहीं वर्तमान में सभी कैमरा खराब हो गया है. इसके गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे है. कि डेढ़ साल तक भी सीसीटीवी कैमरे का सही तरीके से नहीं चल पाना काफी दुर्भाग्य पूर्ण बात है. इससे सुरक्षा व्यवस्था में परेशानी हो रही है. कैमरों के माध्यम से शहर में होने वाले घटनाओं को आसानी से सुलझा कर अपराधियों की पहचान के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाता है.

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113 कैमरों में से 110 कैमरे खराब

सितंबर में 113 कैमरों की जिम्मेदारी 25 पुलिस विभागों को सौंपी गई थी. जिसके बाद 29 सितंबर को डालटनगंज विधायक आलोक चौरसिया, पलामू प्रमंडल के आइजी शैलेंद्र कुमार सिन्हा, डीआइजी, डीसी समीरा एस, एसपी रीषमा रमेशन ने संयुक्त रूप से उदघाटन किया था. लेकिन अप्रैल माह के बाद सभी स्थानों पर कैमरा ने काम करना बंद कर दिया. जिसे लेकर स्टार कंपनी के मालिक सुमित कुमार ने कहा कि फरवरी तक सारे कैमरे ठीक थे. उसके बाद क्या हुआ इस बात की मुझे कोई जानकारी नहीं है. वहीं उन्होंने यह भी कहा कि 110 कैमरे खराब है, फिलहाल 3 कैमरे काम कर रहे हैं. मार्च में आई आंधी पानी के कारण कैमरे खराब हो गए होगे.

बड़े पैमाने में हुआ भ्रष्टाचार 

नगर निगम के टीओपी वन में 58 और टीओपी टू में 55 कैमरे लगाने के लिए डीएमएफटी फंड के जेम पोर्टल पर निविदा आमंत्रित की गई थी. जहां ठेकेदार का चयन और काम होने के बाद भुगतान के समय पर कहा गया कि डीएमएफटी फंड में पैसा नहीं है. जिसके बाद उपायुक्त ने तुरंत जिला अनाबद्ध निधि से भुगतान करने का आदेश दिया. इसके बाद नगर आयुक्त जावेद अहमद की अध्यक्षता में 4 सदस्यीय टीम का गठन किया गया.

जिसमें नगर आयुक्त के अलावा भवन निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता, विद्युत विभाग के कार्यपालक अभियंता और डीआइओ ने इसकी जांच की और फिर भुगतान कर दिया था. इस बीत सवाल है कि जांच और इतनी बड़ी रकम से खर्च करने के बाद भी सीसीटीवी कैमरे इतने जल्दी खराब कैसे हो गए. वहीं लोगों ने कहा कि काफी बड़े पैमाने में भ्रष्टाचार किया गया है.

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