नई दिल्ली : रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी) कार्यालय गोरखपुर में फर्जी नियुक्ति के एक बड़े मामले की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई ने शुरू कर दी है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सीबीआई ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है और दो आरोपित रेलकर्मियों चंद्र शेखर आर्या और राम सजीवन को समन जारी कर पूछताछ के लिए लखनऊ बुलाया है। इसके साथ ही रेलवे भर्ती बोर्ड के तत्कालीन चेयरमैन नुरुद्दीन को भी पूछताछ के लिए बुलाने की तैयारी की जा रही है। सीबीआई की एंट्री के बाद रेलवे कर्मियों में हड़कंप मचा हुआ है।
Highlights:
पद का दुरुपयोग
मामला 26 अप्रैल 2024 को जारी एक पैनल से जुड़ा है। आरोप है कि रेलवे भर्ती बोर्ड गोरखपुर में तैनात कार्यालय अधीक्षक चंद्र शेखर आर्या और निजी सचिव (द्वितीय) राम सजीवन ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए पैनल में फर्जी तरीके से अपने बेटों के नाम शामिल कर दिए। सात अभ्यर्थियों के पैनल को बढ़ाकर नौ कर दिया गया, जबकि दोनों अभ्यर्थियों ने न तो आवेदन किया था, न परीक्षा दी थी और न ही मेडिकल या अभिलेखों की जांच कराई गई थी। इसके बावजूद दोनों को माडर्न कोच फैक्ट्री, रायबरेली में फिटर के पद पर नियुक्ति मिल गई।
कैंट थाने में एफआईआर दर्ज
फर्जीवाड़े का खुलासा बरेली में होने के बाद रेलवे प्रशासन में खलबली मच गई। आरोप है कि तत्कालीन बोर्ड अध्यक्ष और संबंधित कर्मचारियों ने मामले को दबाने की कोशिश की, लेकिन प्रथम दृष्टया उनकी संलिप्तता सामने आ गई। इसके बाद रेलवे प्रशासन ने तत्कालीन चेयरमैन को निलंबित कर दिया और दोनों कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए कैंट थाने में एफआईआर दर्ज कराई।
दोगुनी भर्ती का विज्ञापन जारी
गौरतलब है कि यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी वर्ष 2018-19 में पूर्वोत्तर रेलवे में सहायक लोको पायलट भर्ती में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आ चुका है। उस समय रिक्त पदों से दोगुनी भर्ती का विज्ञापन जारी किया गया और पैनल बनाने से लेकर मेडिकल व दस्तावेज जांच तक में भारी अनियमितताएं की गईं।


