न्यूज डेस्क: ट्विशा शर्मा मामले में गुरुवार केंद्रीय जांच ब्यूरो ने ट्विशा शर्मा की सास गिरिबाला सिंह को भोपाल से गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के एक दिन बाद की गई है। इससे पहले भोपाल की 10वीं अतिरिक्त सत्र अदालत द्वारा दी गई राहत भी रद्द कर दी गई थी।
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हाई कोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल
मध्य प्रदेश के एडवोकेट जनरल प्रशांत सिंह ने बताया कि हाई कोर्ट ने मामले में कई गंभीर पहलुओं को ध्यान में रखा। अदालत ने ट्विशा शर्मा के शरीर पर मौत से पहले लगी सात चोटों को गंभीर माना। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि कई नोटिस भेजे जाने के बावजूद गिरिबाला सिंह ने जांच में सहयोग नहीं किया। इसके अलावा व्हाट्सप्प चैट्स में भी मानसिक उत्पीड़न के संकेत मिले हैं। इन्हीं तथ्यों के आधार पर हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका
हाई कोर्ट ने इस बात को भी गंभीरता से लिया कि गिरिबाला सिंह एक रिटायर्ड न्यायिक अधिकारी हैं और उन्हें साइबर क्राइम, साइबर फोरेंसिक तथा क्राइम सीन मैनेजमेंट की ट्रेनिंग मिली हुई है। अदालत ने आशंका जताई कि उन्होंने अपनी विशेषज्ञता का इस्तेमाल सबूतों से छेड़छाड़ करने या जांच को प्रभावित करने में किया हो सकता है। इस मामले में त्विषा शर्मा के पति समर्थ सिंह भी आरोपी हैं। पिछले सप्ताह समर्थ सिंह ने करीब 10 दिनों तक फरार रहने के बाद अदालत में सरेंडर किया था। समर्थ पेशे से वकील हैं और उन पर दहेज उत्पीड़न सहित कई गंभीर आरोप लगे हैं।
दोबारा दर्ज हुई FIR
CBI ने 12 मई को हुई ट्विशा शर्मा की मौत की जांच औपचारिक रूप से अपने हाथ में ले ली है। एजेंसी ने राज्य पुलिस द्वारा समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह के खिलाफ पहले से दर्ज FIR को दोबारा दर्ज किया है और अब मामले की स्वतंत्र जांच कर रही है। CBI की FIR के मुताबिक, गिरिबाला सिंह ने शादी के बाद विदाई के समय ट्विशा के परिवार से 2 लाख रुपये की मांग की थी। पीड़िता के परिवार ने आरोप लगाया कि दबाव में आकर उन्हें यह रकम देनी पड़ी थी।
मानसिक उत्पीड़न के आरोप
सुनवाई के दौरान ट्विशा शर्मा के परिवार की ओर से पेश वकीलों ने अदालत को बताया कि पीड़िता लगातार मानसिक उत्पीड़न का सामना कर रही थी। हाई कोर्ट ने पाया कि ट्विशा के माता-पिता और रिश्तेदारों के बयान शुरू से एक जैसे रहे हैं, जिनमें समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह पर उत्पीड़न के आरोप लगाए गए हैं।
एडवोकेट जनरल प्रशांत सिंह ने कहा कि अब यह फैसला CBI को करना है कि गिरिबाला सिंह से हिरासत में पूछताछ की जाएगी या नहीं। फिलहाल एजेंसी मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है और आने वाले दिनों में और खुलासे हो सकते हैं।
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