Saturday, October 31, 2026

सीएजी रिपोर्ट ने खोली हेमंत सरकार की विफलताओं की पोल : बाबूलाल मरांडी

रांची: झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट ने हेमंत सरकार की प्रशासनिक अक्षमता, योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही और वित्तीय अनियमितताओं की गंभीर तस्वीर सामने रखी है। गरीबों के घर, ग्रामीण रोजगार और हर घर तक नल से जल पहुंचाने जैसी बुनियादी योजनाओं में भी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विकास को लेकर केवल लंबी-लंबी बातें करती है परंतु जमीनी हकीकत इससे इतर है। सरकार का डाटा ही उनकी पोल खोल रहा है।

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बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन में टेंडर प्रक्रिया और काम की गति को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। कई निविदाओं में बेहद कम प्रतिस्पर्धा रही और कुछ मामलों में अनुमानित लागत से अधिक दर पर काम दिए गए। सीएजी ने एक ऐसे संवेदक को भी अलग-अलग निविदाओं के माध्यम से करीब ₹148 करोड़ के काम दिए जाने पर सवाल उठाया, जिसकी निविदा क्षमता नकारात्मक थी।

उन्होंने कहा कि कुछ निविदाओं में मिलीभगतपूर्ण बोली के संकेत भी सीएजी जांच में सामने आए। रांची-पूर्वी और खूंटी प्रमंडल की निविदाओं में केवल दो बोलीदाता थे और जांच में दोनों के डिमांड ड्राफ्ट एक-दूसरे द्वारा खरीदे जाने की बात सामने आई। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण में राज्य सरकार की देरी का खामियाजा गरीब परिवारों को भुगतना पड़ा। लक्ष्य और लाभार्थियों को अंतिम रूप देने में हुई देरी के कारण 22.34 लाख पात्र परिवारों में से 6.32 लाख परिवार योजना से बाहर रह गए।

उन्होंने कहा कि मनरेगा में भी राज्य सरकार की लापरवाही सामने आई है। योजना के लिए निधियां 40 से 55 दिनों की देरी से जारी की गईं, जबकि मनरेगा का उद्देश्य ही जरूरतमंद ग्रामीण परिवारों को समय पर रोजगार उपलब्ध कराना है। सीएजी ने जांच में ऐसे खर्च भी पाए जिन्हें योजना के तहत स्वीकार्य नहीं माना गया।

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सीएजी की रिपोर्ट ने सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन को भी उजागर किया है। 31 मार्च 2025 तक ₹1,60,565 करोड़ के खर्च से जुड़े उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित थे, जबकि 2024-25 के ₹1,50,938.84 करोड़ के बजट में ₹31,110 करोड़ (20.61%) खर्च नहीं हो सका। वहीं 13 केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए मिले ₹1,916.63 करोड़ में से ₹596.02 करोड़ (31.10%) बिना उपयोग के पड़े रहे। यह बताता है कि सरकार न तो उपलब्ध राशि का समय पर उपयोग कर पा रही है और न ही खर्च का समुचित हिसाब प्रस्तुत कर रही है।

उन्होंने कहा कि सीएजी की रिपोर्ट केवल अलग-अलग योजनाओं की कमियां नहीं बताती, बल्कि हेमंत सरकार की पूरी प्रशासनिक और वित्तीय कार्यशैली पर सवाल खड़ा करती है। गरीबों को घर नहीं मिल रहा, ग्रामीणों को समय पर रोजगार नहीं मिल रहा, हर घर तक पानी पहुंचाने की योजना गंभीर अनियमितताओं से घिरी हुई है और दूसरी ओर सरकार उपलब्ध बजट तथा केंद्र से मिली राशि का भी पूरा उपयोग नहीं कर पा रही है।

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जब केंद्र सरकार गरीबों और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए संसाधन उपलब्ध करा रही है, तब राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि योजनाओं को समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से लागू करे। लेकिन सीएजी की रिपोर्ट बताती है कि सरकार राशि खर्च करने, खर्च का हिसाब देने और योजनाओं को जमीन पर उतारने—तीनों मोर्चों पर विफल रही है।

उन्होंने कहा कि हेमंत सरकार को सीएजी की रिपोर्ट में उठाए गए सवालों पर जनता के सामने जवाब देना चाहिए और प्रत्येक वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितता की जिम्मेदारी तय करनी चाहिए। जनता के पैसे और जनता के अधिकारों के साथ लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इसके अलावा जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहे छात्रों के आंदोलन में कल देर रात रांची के डीसी एवं एसएसपी के द्वारा धरनास्थल पर जाकर छात्रों को धमकाने पर नेता प्रतिपक्ष ने कड़ी आपत्ति व्यक्ति की । उन्होंने कहा कि सरकार ने छात्रों से बातचीत के लिए चार मंत्रियों की जो कमिटी बनायी है, वो या तो छात्रों से बात करे या फिर उसे भंग कर दिया जाए। इस दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदेश मीडिया प्रभारी योगेंद्र प्रताप सिंह, प्रदेश प्रवक्ता अविनेश कुमार, मृत्युंजय शर्मा एवं के.के. गुप्ता भी उपस्थित रहे।

एयर नाऊ स्पेशल

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