Saturday, August 8, 2026

बिहार चुनाव 2025: राजनीति में भोजपुरी सितारों की एंट्री से बढ़ा ग्लैमर, पवन सिंह से अक्षरा सिंह तक मैदान में उतरने की तैयारी

बिहार : बिहार की राजनीति हमेशा से दिलचस्प रही है। यहां जाति, समाज और विकास के साथ अब एक नया रंग भी जुड़ गया है। इस बार बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में कई ऐसे चेहरे नजर आने वाले हैं जिन्हें अब तक लोग उन्हें फिल्मों, गानों और टीवी पर देखते आए हैं। अब वही कलाकार जनता से वोट मांगते दिख सकते हैं। राजनीति और ग्लैमर का मेल इस बार के चुनाव को और भी ज्यादा मजेदार बना रहा है।

पवन सिंह की सियासी पारी

भोजपुरी फिल्मों और गानों के सुपरस्टार पवन सिंह अब सियासत में पूरी तरह कदम रख चुके हैं। उन्होंने 2024 लोकसभा चुनाव में करकट सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था। उस वक्त उन्होंने बीजेपी के खिलाफ उतरकर सबको हैरान कर दिया था। लेकिन अब उन्होंने फिर से BJP का हाथ थाम लिया है। दिल्ली में अमित शाह और अन्य नेताओं से मुलाकात के बाद माना जा रहा है कि पवन सिंह को आरा या करकट सीट से टिकट मिल सकता है। पवन सिंह की लोकप्रियता इतनी ज्यादा है कि बीजेपी उन्हें अपने स्टार प्रचारक के रूप में भी इस्तेमाल कर सकती है।

मैथिली ठाकुर का संभावित डेब्यू

मैथिली ठाकुर, जिन्हें पूरे देश में उनकी सुरीली आवाज और सादगी के लिए जाना जाता है। मैथिली की गायकी तो अब हर घर-घर में सुनी जाती है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी उनकी तारीफ की थी। पिछले कुछ महीनों में उनके बीजेपी नेताओं से मिलने की खबरें आई हैं, जिससे लोगों को लग रहा है कि वो अब राजनीति में उतर सकती हैं। कहा जा रहा है कि मैथिली ठाकुर को मधुबनी या दरभंगा क्षेत्र से BJP का टिकट मिल सकता है। अगर ऐसा हुआ तो वो पहली लोकगायिका होंगी जो सीधे विधानसभा चुनाव में उतरेंगी। मैथिली चाहती हैं कि वो समाज और संस्कृति के लिए काम करें और युवाओं की आवाज बनें।

अक्षरा सिंह की मुलाकात से बढ़ी हलचल

अक्षरा सिंह की जो किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। भोजपुरी फिल्मों की मशहूर एक्ट्रेस और सिंगर अक्षरा भी अब राजनीति की खबरों में छाई हुई हैं। हाल ही में उन्होंने बीजेपी नेता गिरिराज सिंह से मुलाकात की थी, जिससे लोगों में चर्चा शुरू हो गई कि वो भी राजनीति में उतर सकती हैं। कहा जा रहा है कि वो या तो BJP से या फिर जन सुराज अभियान (प्रशांत किशोर) से जुड़ सकती हैं। अक्षरा ने कई बार सोशल मीडिया पर समाज और महिलाओं के मुद्दों पर अपनी बात रखी है। वो कहती हैं कि अगर उन्हें मौका मिला तो वो महिलाओं की सुरक्षा और कलाकारों के हक के लिए काम करना चाहेंगी और इससे कभी पीछे नहीं हटेंगी।

खेसारी की पत्नी चंदा देवी भी मैदान में

खेसारी लाल यादव की पत्नी चंदा देवी। खेसारी खुद तो राजनीति में नहीं आए हैं, लेकिन उनकी पत्नी अब RJD (राष्ट्रीय जनता दल) से चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। खबरों के मुताबिक, उन्हें मांझी विधानसभा सीट से टिकट मिल सकता है। खेसारी ने खुद कहा है कि उनकी पत्नी लंबे समय से समाजसेवा में जुड़ी हैं और अब वो जनता की सेवा करना चाहती हैं। अगर चंदा देवी मैदान में उतरती हैं, तो भोजपुरी के दो बड़े चेहरे  पवन सिंह और खेसारी परिवार  राजनीति में आमने-सामने नजर आ सकते हैं। इसके अलावा काजल राघवानी का नाम भी चर्चा में है। वो भोजपुरी फिल्मों की जानी-मानी अभिनेत्री हैं और कहा जा रहा है कि वो भी जल्द राजनीति में कदम रख सकती हैं। माना जा रहा है कि वो या तो BJP या RJD से जुड़ सकती हैं। इसी तरह, सिंगर रितेश पांडे के नाम की भी चर्चा चल रही है कि वो भी किसी पार्टी से टिकट पा सकते हैं।

विनय बिहारी भी है चर्चा में

अगर बात करें विनय बिहारी की तो वो एक चर्चीत फिल्म निर्दशक हैं जो बिहार के राजनीति में कदम रख चुके हैं, और तीन बार बिहार के लौरिया विधानसभा क्षेत्र से लगातार चुनाव जीत चुके हैं। आपकों बता दें उन्होंने 2010 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीता था, फिर वे भाजपा में शामिल हो गए 2015 और 2020 में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर लगातार दो चुनाव जीते।

राजनीति में ग्लैमर का बढ़ता रोल

भोजपुरी कलाकारों का राजनीति में आना नया नहीं है। मनोज तिवारी जैसे स्टार पहले ही सांसद बन चुके हैं। लेकिन इस बार का चुनाव इसलिए खास है क्योंकि अब लगभग हर बड़ी पार्टी कलाकारों को जोड़ने की कोशिश कर रही है। BJP, RJD और JDU  सभी जानते हैं कि भोजपुरी कलाकारों का जनता से गहरा जुड़ाव है। उनकी लोकप्रियता वोटों में बदल सकती है, खासकर भोजपुर, सिवान, सारण, दरभंगा और मधुबनी जैसे इलाकों में।

लोकप्रियता से आगे की चुनौती

राजनीतिक में इन कलाकारों की एंट्री से बिहार का चुनावी माहौल पहले से ज्यादा रोचक हो गया है। जहां पहले लोगों की नजरें सिर्फ नेताओं पर होती थीं, अब भोजपुरी स्टार्स में भी हैं। उनके गाने, फिल्में और सोशल मीडिया पर मौजूदगी उन्हें जनता से जोड़ती है। पार्टी भी चाहती हैं कि ऐसे चेहरे उनके प्रचार को और ताकत दें।

हालांकि, सिनेमा और राजनीति दोनों में फर्क बहुत बड़ा है। ये नये चेहरे लोगों को आकर्षित कर सकते हैं, लेकिन जनता का दिल जीतने के लिए मेहनत और जमीनी काम की जरूरत होती है। कई बार देखा गया है कि सिर्फ नाम और लोकप्रियता से चुनाव नहीं जीते जाते। लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि इन चेहरों के आने से बिहार का चुनाव इस बार और भी रंगीन और दिलचस्प बन गया है।

असली हीरो की परीक्षा

आने वाले कुछ दिनों में तय होगा कि कौन पार्टी से कौन मैदान में उतरता है, लेकिन इतना तो तय है कि इस बार के बिहार चुनाव में राजनीति, सिनेमा और ग्लैमर तीनों का अनोखा संगम देखने को मिलेगा। भोजपुरिया अंदाज में कहें तो – इस बार बिहार की सियासत में रउआ के फेवरेट स्टार भी मंच पर होईं, आ जनता के दिल में भी।

इस बार का चुनाव सिर्फ नेताओं की ही नहीं, बल्कि कलाकारों की भी परीक्षा होगा। जनता देखना चाहती है कि क्या उनके पसंदीदा सितारे सिर्फ परदे पर हीरो हैं या असली जिंदगी में भी समाज के लिए कुछ कर पाएंगे। बिहार की राजनीति में अब सिर्फ नारों और भाषणों की नहीं, बल्कि भोजपुरी गानों, मुस्कुराहटों और सितारों की चमक भी होगी।

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एयर नाऊ स्पेशल

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