बिहार : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण की सियासी तस्वीर अब साफ हो गई है। पहले चरण में कुल 121 सीटों पर 1314 उम्मीदवार मैदान में हैं। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब सभी दलों ने अपनी रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। इस चरण में मुकाबला भले ही NDA बनाम महागठबंधन का दिख रहा हो, लेकिन असली परीक्षा RJD और JDU दोनों के लिए है।
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पहले चरण में 121 सीटों पर वोटिंग
बिहार विधानसभा की कुल 243 सीटों में से पहले चरण में 121 सीटों पर मतदान होना है। इन सीटों में कई ऐसी सीटें हैं जहां पिछले चुनाव में कड़ा मुकाबला देखने को मिला था। इस बार भी वही रुझान दिख रहा है। चुनाव आयोग के अनुसार, पहले चरण की सीटों पर कुल 1314 उम्मीदवारों ने नामांकन किया था, जिनमें से 121 सीटों पर सभी उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों की जांच और वापसी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
NDA बनाम महागठबंधन का सीधा मुकाबला
पहले चरण की 121 सीटों पर मुख्य मुकाबला NDA (BJP-JDU) और महागठबंधन (आरजेडी-कांग्रेस-वामदल) के बीच है। हालांकि, कई सीटों पर तीसरा मोर्चा भी समीकरण बिगाड़ सकता है। NDA की ओर से भाजपा और JDU बराबर-बराबर सीटों पर लड़ रही हैं, जबकि महागठबंधन की ओर से आरजेडी, कांग्रेस और वामपंथी दलों में सीटों का बंटवारा तय हो चुका है।
तेजस्वी यादव, सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा की अग्निपरीक्षा
पहले चरण की 121 सीटों में कई ऐसे क्षेत्र हैं जो बड़े नेताओं के लिए राजनीतिक अग्निपरीक्षा माने जा रहे हैं।
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के लिए यह चरण इसलिए अहम है क्योंकि इन इलाकों में आरजेडी का परंपरागत वोट बैंक है। अगर यहां पार्टी अच्छा प्रदर्शन नहीं करती है, तो पूरे चुनावी समीकरण पर असर पड़ सकता है।
वहीं, जेडीयू के नेता सम्राट चौधरी और भाजपा के विजय सिन्हा के लिए भी यह चरण बेहद महत्वपूर्ण है। इन दोनों नेताओं के संगठनात्मक प्रभाव वाले क्षेत्रों में एनडीए की स्थिति कैसी रहती है, यह उनके राजनीतिक भविष्य के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।
इन जिलों में होगा पहले चरण में मतदान
पहले चरण का चुनाव बिहार के लगभग 12 जिलों में होने वाला है, जिनमें औरंगाबाद, गया, नवादा, जमुई, कैमूर, भोजपुर, रोहतास, बक्सर, जहानाबाद, अरवल, लखीसराय और मुंगेर शामिल हैं।
इन जिलों में नक्सल प्रभावित इलाके भी हैं, इसलिए सुरक्षा की दृष्टि से प्रशासन ने विशेष तैयारी की है।
चुनाव आयोग ने तैयारियां तेज कीं
चुनाव आयोग ने पहले चरण की वोटिंग को लेकर तैयारियां पूरी कर ली हैं। सभी जिलों में मतदान कर्मियों की तैनाती, सुरक्षा बलों की व्यवस्था, और ईवीएम की जांच का काम शुरू हो गया है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि हर मतदान केंद्र पर CCTV और वेबकास्टिंग की सुविधा होगी। संवेदनशील और अतिसंवेदनशील क्षेत्रों में अर्धसैनिक बलों की विशेष तैनाती की जाएगी।
महंगाई और बेरोजगारी बने प्रमुख मुद्दे
पहले चरण की सीटों पर इस बार मतदाता महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों को लेकर वोट करने का मूड बना रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में कृषि संकट और युवाओं में रोजगार की कमी बड़ा चुनावी मुद्दा बन गया है। वहीं, शहरी इलाकों में बिजली, पानी और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर मतदाता नाराज दिख रहे हैं।
महिला मतदाता भी निर्णायक भूमिका में
बिहार चुनाव में हमेशा से महिला मतदाता की भूमिका अहम रही है। इस बार पहले चरण की सीटों पर महिला मतदाताओं की संख्या लगभग 49 प्रतिशत है। राजनीतिक दल महिलाओं को लुभाने के लिए रोजगार, सुरक्षा और सशक्तिकरण जैसे वादों पर जोर दे रहे हैं।
कुल मिलाकर पहले चरण में कांटे की टक्कर
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पहले चरण का चुनाव राज्य की सत्ता का संकेतक साबित होगा। अगर किसी गठबंधन को यहां बढ़त मिलती है, तो उसका असर बाकी चरणों के मतदान पर भी पड़ सकता है।
इस बार मुकाबला त्रिकोणीय भी हो सकता है क्योंकि कुछ सीटों पर जन अधिकार पार्टी, एलजेपी (रामविलास) और एआईएमआईएम जैसे दल भी मजबूती से चुनाव लड़ रहे हैं।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का पहला चरण पूरी तरह तैयार है। 121 सीटों पर 1314 उम्मीदवारों के बीच होने वाली यह लड़ाई राज्य की राजनीति का रुख तय करेगी। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि क्या तेजस्वी यादव अपने जनाधार को बरकरार रख पाएंगे, या एनडीए की जोड़ी (भाजपा-जेडीयू) फिर से सत्ता का रास्ता साफ करेगी।
पहले चरण की वोटिंग के नतीजे ही बिहार की राजनीति की अगली दिशा तय करेंगे।


