Thursday, November 5, 2026

फुकेत-दिल्ली एयर इंडिया फ्लाइट में क्या हुआ? एयरबस की जांच में बड़ी खबर

फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI2379 में 4 अगस्त को हुई घटना को लेकर एयरबस की शुरुआती जांच में बड़ा तकनीकी खुलासा हुआ है. शुरुआती डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर यानी DFDR की जांच से पता चला है कि विमान के तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम एक के बाद एक प्रभावित हुए. इसका असर इतना गंभीर था कि करीब चार सेकंड तक विमान के कुछ सबसे अहम फ्लाइट कंट्रोल काम नहीं कर रहे थे. इसी दौरान विमान करीब 300 फीट नीचे चला गया.

दरअसल, AI2379 एयरबस A320 विमान था, जो फुकेत से दिल्ली आ रहा था. उड़ान के दौरान अचानक विमान की ऊंचाई में तेज गिरावट आई. उस वक्त विमान क्रूजिंग ऊंचाई पर था. शुरुआती तौर पर इसे तेज टर्बुलेंस की घटना माना गया था, लेकिन अब एयरबस के शुरुआती तकनीकी आकलन ने तस्वीर को काफी बदल दिया है. डेटा से संकेत मिलता है कि मामला सिर्फ टर्बुलेंस का नहीं था, बल्कि विमान के हाइड्रोलिक सिस्टम और फ्लाइट कंट्रोल से जुड़ी गंभीर तकनीकी गड़बड़ी भी सामने आई.

विमान के हाइड्रोलिक सिस्टक के बारे समझिए

विमान में तीन अलग-अलग हाइड्रोलिक सिस्टम होते हैं, जिन्हें ग्रीन, ब्लू और येलो सिस्टम कहा जाता है. इनका काम विमान के जरूरी कंट्रोल सरफेस को चलाने के लिए ताकत उपलब्ध कराना होता है. एलीवेटर और एलेरॉन जैसे कंट्रोल सरफेस की मदद से पायलट विमान को ऊपर-नीचे और दाएं-बाएं नियंत्रित करते हैं. इन सिस्टम को अलग-अलग रखा जाता है ताकि किसी एक में खराबी आने पर दूसरे सिस्टम विमान को नियंत्रित करने में मदद कर सकें. लेकिन AI2379 की घटना में तीनों सिस्टम प्रभावित हुए.

एयरबस की शुरुआती जांच में क्या पता चला था?

एयरबस की शुरुआती जांच के मुताबिक, हाइड्रोलिक सिस्टम में आई इस गड़बड़ी के दौरान एलीवेटर और एलेरॉन ने सामान्य तरीके से प्रतिक्रिया देना बंद कर दिया. यानी कॉकपिट में पायलट कंट्रोल इनपुट दे रहे थे, लेकिन विमान के कंट्रोल सरफेस उस इनपुट के मुताबिक तुरंत प्रतिक्रिया नहीं कर रहे थे. यह स्थिति करीब चार सेकंड तक रही. चार सेकंड सुनने में बहुत कम वक्त लगता है, लेकिन उड़ान के दौरान यह बेहद महत्वपूर्ण समय हो सकता है.

इसी दौरान विमान ने करीब 300 फीट की ऊंचाई खो दी. रिपोर्ट के मुताबिक फर्स्ट ऑफिसर ने विमान को नियंत्रित करने के लिए पूरा नोज-डाउन इनपुट दिया, लेकिन शुरुआत में उसका अपेक्षित असर दिखाई नहीं दिया. कुछ सेकंड बाद हाइड्रोलिक सिस्टम अपने आप वापस काम करने लगे. पहले ब्लू सिस्टम, फिर येलो और उसके बाद ग्रीन सिस्टम के वापस आने की जानकारी सामने आई है. कंट्रोल सरफेस के दोबारा काम करने के बाद पायलट विमान को स्थिर करने में सफल रहे और फ्लाइट सुरक्षित दिल्ली पहुंची.

इस घटना में यात्रियों को चोटें भी आईं. अलग-अलग रिपोर्टों में घायलों की संख्या अलग बताई गई है, जबकि बाद की रिपोर्टों में 24 यात्रियों के घायल होने की जानकारी सामने आई है. शुरुआती सरकारी जानकारी में इससे कम संख्या बताई गई थी. विमान में 137 यात्री और आठ क्रू सदस्य सवार थे.

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम एक साथ या इतनी तेजी से कैसे प्रभावित हुए. फिलहाल इसका अंतिम जवाब सामने नहीं आया है. एयरबस ने अपनी शुरुआती तकनीकी जांच के बाद एयर इंडिया से विमान के मेंटेनेंस रिकॉर्ड और दूसरी तकनीकी जानकारी मांगी है. इसका मतलब है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और सिर्फ इन शुरुआती निष्कर्षों के आधार पर घटना की अंतिम वजह तय नहीं की जा सकती.

एयरबस, AAIB और DGCA कर रहे हैं मामले की जांच

घटना के बाद भारत की Aircraft Accident Investigation Bureau यानी AAIB और DGCA भी मामले की जांच कर रहे हैं. विमान के Flight Data Recorder और Cockpit Voice Recorder को सुरक्षित किया गया था, ताकि यह पता लगाया जा सके कि घटना के दौरान विमान में क्या-क्या हुआ और कॉकपिट में पायलटों ने किस तरह प्रतिक्रिया दी. एयरबस और फ्रांस की BEA भी तकनीकी जांच में सहयोग कर रहे हैं.

इस पूरी घटना की एक और परत पायलटों की जांच से जुड़ी है. घटना के बाद किए गए ड्रग स्क्रीनिंग टेस्ट में विमान के कप्तान का शुरुआती टेस्ट पॉजिटिव संकेत वाला बताया गया था और उसके बाद कन्फर्मेटरी टेस्ट कराया गया. हालांकि उपलब्ध तकनीकी जांच में अभी तक इस बात का कोई निष्कर्ष नहीं है कि इसका विमान की तकनीकी खराबी से कोई संबंध था. इसलिए दोनों मामलों को अलग-अलग जांच के दायरे में देखा जा रहा है.

फिलहाल AI2379 मामले में सबसे अहम तकनीकी तथ्य यही है कि विमान ने कुछ सेकंड के लिए अपने तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम में गंभीर गड़बड़ी का सामना किया और इसी दौरान एलीवेटर तथा एलेरॉन जैसे जरूरी कंट्रोल सरफेस ने सामान्य तरीके से काम करना बंद कर दिया. विमान करीब 300 फीट नीचे गया, लेकिन सिस्टम दोबारा सक्रिय हुए और पायलटों ने विमान को सुरक्षित दिल्ली उतार दिया. अब जांच एजेंसियों और एयरबस के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम इतनी तेजी से क्यों प्रभावित हुए और भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए क्या तकनीकी या मेंटेनेंस बदलाव जरूरी होंगे.

एयर नाऊ स्पेशल

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