झारखंड : झारखंड के नेतरहाट में स्थित नेतरहाट विद्यालय झारखंड के प्रतिष्ठित विद्यालयों में से एक माना जाता है। जिसे लेकर अब झारखंड सरकार ने इस आवासीय विद्यालय में बड़े बदलाव करने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर शिक्षा विभाग ने विद्यालय की प्रबंधन और संचालन प्रक्रिया को सुधारने के लिए नई नियमावली तैयार की गई है। यह फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि पिछले कुछ सालों में विद्यालय के परिणामों में लगातार गिरावट देखी जा रही थी। इसके अलावा छात्रों के नामांकन को लेकर अभिभावकों की रुचि भी कम हो रही थी। सरकार ने इस स्थिति को देखते हुए विद्यालय की व्यवस्था में सुधार करने का निर्णय लिया है।
नेतरहाट विद्यालय में 100 सीटों को बढ़ाकर 300 कर दी जाएगा
अब तक नेतरहाट विद्यालय में केवल लड़कों का ही नामांकन होता था, लेकिन अब लड़कियों को भी इसमें नामांकन करवाने का अवसर मिलेगा। बनाई गई नई नियमावली के अनुसार विद्यालय की कुल सीटों में से 33(तैंतीस) प्रतिशत सीटें छात्राओं के लिए आरक्षित रहेंगी। यह बदलाव झारखंड के शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इसके साथ ही विद्यालय की सीटों की संख्या भी अब100 से बढ़ाकर 300 कर दी जाएगी, ताकि ज्यादा से ज्यादा छात्रों को इस प्रतिष्ठित विद्यालय में पढ़ने का मौका मिल सके।
विद्यालय की निगरानी अब झारखंड के मुख्यमंत्री खुद करेंगे
सरकार ने छात्राओं के नामांकन में समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए क्षैतिज आरक्षण का प्रावधान भी किया है। इसका मतलब यह है कि अब लड़कियों को भी इस विद्यालय में लड़को के जैसे पढ़ने और आगे बढ़ने का पूरा मौका मिलेगा। मुख्यमंत्री ने नेतरहाट विद्यालय में को- एजुकेशन की भी घोषणा की है। सरकार का कहना है कि नेतरहाट के जैसे और तीन विद्दयालय खोलीं जाएंगी। साथ ही इस विद्यालय की निगरानी अब झारखंड के मुख्यमंत्री खुद करेंगे। इसके लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में एक शीर्ष निकाय बनाया जाएगा। इस निकाय में मुख्य सचिव, विकास आयुक्त, वित्त विभाग के सचिव, शिक्षा विभाग के सचिव, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव, IET विभाग के सचिव और विद्यालय के प्राचार्य इसमें सदस्य के रूप में होंगे। इसके अलावा कुछ मनोनीत सदस्य भी होंगे, जिनका कार्यकाल दो साल का रहेगा। यह निकाय साल में कम से कम एक बार बैठक करेगा, जिसमें विद्यालय से जुड़ी नीतियों, विकास कार्यों और सुधारों पर चर्चा की जाएगी।
विद्यालय के विकास से जुड़ी योजनाओं को मंजूरी
इस निकाय का काम विद्यालय से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण नीतियों को सुनिश्चित करना होगा, शिक्षकों की नियुक्तियों पर निर्णय लेना और विद्यालय के विकास से जुड़ी योजनाओं को मंजूरी देना होगा। इसके अलावा विद्यालय के आधुनिकीकरण से जुड़े कामों पर भी यही निकाय विचार करेगा। शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में 15 सदस्यीय समान्य निकाय भी बनाई जाएगी। इसमें विकास आयुक्त, शिक्षा सचिव, पलामू प्रमंडल के आयुक्त, माध्यमिक शिक्षा निदेशक और राज्य सरकार के अन्य विभागों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह निकाय विद्यालय के सामान्य संचालन और सुधार से जुड़ी नीतियों पर काम करेगा।
सरकार ने नेतरहाट विद्यालय प्रबंधन एवं संचालन नियमावली 2025 का ड्राफ्ट पूरी तरह से तैयार कर किया है। इसमें विद्यालय के संचालन का पूरा ढांचा तय किया गया है। इसमें शीर्ष निकाय, समान्य निकाय, कार्यकारिणी समिति और विद्यालय प्रबंध समिति की भूमिकाएं तय की गई हैं, ताकि विद्यालय का प्रबंधन पूरी तरह से पारदर्शी और अधिक जिम्मेदार हो सके।
वित्तीय मामलों में भी बदलाव
वित्तीय मामलों में भी बदलाव किए गए हैं।इन बदलाव के जरिए अब 20 लाख रुपये तक के टेंडर विद्यालय स्तर पर ही जारी किए जा सकेंगे। वहीं, जिला स्तर पर 21 से 50 लाख रुपये तक के कार्यों की मंजूरी दी जाएगी, जबकि 50 लाख रुपये से अधिक की राशि राज्य स्तरीय समिति द्वारा खर्च की जाएगी। इस बदलाव से वित्तीय पारदर्शिता बढ़ेगी और जो स्थित निश्चित नहीं हो पाएगी उसपर रोक लगा दी जाएगी। सरकार ने यह बदलाव कई कारणों से किया है। विद्यालय में छात्रों की पढ़ाई का स्तर लगातार गिर रहा था। योग्य शिक्षकों की कमी थी और 50 प्रतिशत से अधिक शिक्षक और कर्मचारी पद वर्षों से खाली पड़े थे। विद्यालय में सीबीएसई के अनुरूप प्रबंधन समिति का गठन नहीं किया गया था। और छात्रों के नामांकन के लिए आवेदन की संख्या लगातार घट रही थी, जिससे पढ़ाई करने वाले छात्रों की रूची इस विद्यालय की ओर कम होती जा रही थी।
विद्यालय की व्यवस्था को फिर से सशक्त और आधुनिक बनाने की तैयारी
साथ ही सीबीएसई स्कूलों के छात्रों की विभिन्न प्रतियोगिताओं में भागीदारी बढ़ रही थी, लेकिन नेतरहाट विद्यालय के छात्रों की भागीदारी लगभग न के बराबर थी। यह स्थिति सरकार के लिए चिंता का विषय बन गई थी। इसलिए मुख्यमंत्री ने विद्यालय की व्यवस्था को फिर से सशक्त और आधुनिक बनाने के लिए यह बड़ा कदम उठाया है। नई नियमावली लागू होने के बाद उम्मीद की जा रही है कि नेतरहाट विद्यालय एक बार फिर अपने पुराने सम्मान को हासिल करेगा। साथ ही छात्राओं को प्रवेश मिलने से विद्यालय में समानता और संतुलन दोनों बढ़ेंगे। बढ़ी हुई सीटों से अधिक प्रतिभाशाली छात्रों को अच्छी शिक्षा और पढ़ाई करने का मौका मिलेगा।
झारखंड में सरकारी विद्यालय भी देश के किसी निजी विद्यालय से कम नहीं
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का कहना है कि उनकी सरकार राज्य के शिक्षा स्तर को मजबूत करने के लिए पूरी तरह समर्पित है। नेतरहाट विद्यालय के सुधार से सरकार यह संदेश देना चाहती है कि झारखंड में सरकारी विद्यालय भी देश के किसी निजी विद्यालय से कम नहीं हैं। इन सभी सुधारों के बाद उम्मीद है कि नेतरहाट विद्यालय फिर से देश के सबसे बेहतरीन विद्यालयों में अपनी जगह बनाएगा। साथ ही मुख्यमंत्री का कहना है कि students को पढ़ाई और करियर के लिए किसी प्रकार की आर्थिक परेशानी न हो, इसके लिए पहले से ही छात्रों को इसके लिए गुरूजी credit card जैसी योजना भी दी जा रही है। साथ ही बच्चों को विदेश में उच्च शिक्षा के लिए शत- प्रतिशत छात्रवृति की भी सुविभा दी जा रही है। aaise में झारखमड के मुख्यमंत्री को उम्मीद है कि यहां से निकलने वाले छात्र और छात्राएं आने वाले समय में झारखंड और पूरे देश का नाम रोशन करेंगे।


