Monday, October 5, 2026

लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल उठाने से पहले भाजपा अपने गिरेबान में झांके : आलोक कुमार दूबे

रांची : झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने भाजपा नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लेकर दिए गए बयान पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि बाबूलाल मरांडी जी को पहले यह तय करना चाहिए कि वे भाजपा के नेता हैं, राजनीतिक विश्लेषक हैं या फिर खुद को अदालत और न्यायाधीश समझने लगे हैं। आप अपने आपको जज या कोर्ट समझने की भूल न करें। किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने का अधिकार राजनीतिक मंच पर बैठकर किसी नेता को नहीं, बल्कि देश की न्यायपालिका को है।

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उन्होंने कहा कि आरोप लगाना आसान है, लेकिन आरोप को न्यायिक रूप से सिद्ध करना अलग बात है। बाबूलाल मरांडी को यह समझना चाहिए कि लोकतंत्र में जांच एजेंसियां, न्यायपालिका और संवैधानिक संस्थाएं अपनी-अपनी भूमिका निभाती हैं। राजनीतिक बयानबाजी के आधार पर किसी को दोषी घोषित करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का अपमान है।

आलोक कुमार दूबे ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि हालांकि इसमें बाबूलाल जी की पूरी गलती भी नहीं है। जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा लोकतांत्रिक संस्थाओं के राजनीतिक इस्तेमाल कर रहा है, शायद उसी माहौल में बाबूलाल जी को भी लगने लगा है कि वे चाहें तो खुद ही जांच कर लें, खुद ही फैसला सुना दें और खुद ही सजा भी तय कर दें।

उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं को पहले अपने शासन और अपने नेताओं से जुड़े सवालों का जवाब देना चाहिए और उसके बाद दूसरों को नैतिकता का पाठ पढ़ाना चाहिए। दूबे ने कहा कि बाबूलाल जी, आप अपने दिमाग में हर मुद्दे की खिचड़ी बनाकर जनता के सामने परोसना बंद कीजिए। न्यायपालिका का काम न्याय करना है और राजनीतिक दलों का काम जनता के बीच जाकर अपनी नीतियों और काम का हिसाब देना है। दोनों के बीच की सीमा लोकतंत्र में स्पष्ट है।

कांग्रेस महासचिव ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ यदि किसी मामले में कोई आरोप है तो संबंधित जांच एजेंसी और अदालत अपना काम करेगी। किसी राजनीतिक नेता को अदालत से पहले फैसला सुनाने का अधिकार नहीं है।उन्होंने बाबूलाल मरांडी पर व्यक्तिगत कटाक्ष करते हुए कहा कि आपको अगर हर मामले में खुद ही फैसला सुनाना है, तो फिर अदालतों की क्या जरूरत रह जाएगी? बेहतर होगा कि आप राजनीति में मर्यादा बनाए रखें और संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करना सीखें।

आलोक कुमार दूबे ने कहा कि भाजपा को सत्ता के अहंकार से बाहर निकलकर जनता के वास्तविक मुद्दों पर बात करनी चाहिए। बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की समस्याएं, युवाओं का भविष्य, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर भाजपा नेताओं को जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि बाबूलाल जी, अब भी समय है। राजनीति में लंबे समय तक बने रहने के लिए संयम, तथ्य और लोकतांत्रिक मर्यादा जरूरी है। हर मुद्दे को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में बदलने से जनता का भला नहीं होगा।

दूबे ने अंत में कहा कि बाबूलाल जी, यदि आपको राजनीति में रहते हुए हर संस्था का काम खुद ही करना है और हर मामले में खुद ही फैसला सुनाना है, तो बेहतर होगा कि आप राजनीति से संन्यास लेकर आराम करें। लोकतंत्र किसी एक व्यक्ति की इच्छा से नहीं, बल्कि संविधान और संस्थाओं के सम्मान से चलता है।

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एयर नाऊ स्पेशल

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