अहमदाबाद : अहमदाबाद में हुए विमान हादसे की जांच को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो ने हादसे में मारे गए पायलट कैप्टन सुमित सभरवाल के भतीजे कैप्टन वरुण आनंद को समन भेजा है। इस खबर के सामने आते ही भारतीय विमानन क्षेत्र में हड़कंप मच गया। पायलटों के संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो के इस कदम पर कड़ी आपत्ति जताई है।
यह मामला एयर इंडिया के बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर से जुड़ा है, जो 12 जून 2025 को अहमदाबाद में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में कैप्टन सुमीत सभरवाल समेत कई लोग प्रभावित हुए थे। एफआईपी का कहना है कि एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो ने 9 जनवरी को कैप्टन वरुण आनंद को समन भेजा, जबकि उनका इस हादसे से कोई सीधा संबंध नहीं है। संगठन का आरोप है कि यह कदम गैर-जरूरी है और मानसिक उत्पीड़न जैसा है।
एफाईपी ने अपने कानूनी नोटिस में कहा है कि एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो ने यह स्पष्ट नहीं किया कि किस कानून के तहत और किस उद्देश्य से उन्हें बुलाया गया है। एफआईपी के अनुसार, कैप्टन वरुण आनंद का न तो उस विमान से कोई लेना-देना था और न ही वे हादसे के समय वहां मौजूद थे। वे न तो उस फ्लाइट के क्रू में थे और न ही विमान के रखरखाव या संचालन से जुड़े थे। इसके बावजूद उन्हें जांच में बुलाया जाना संदेह पैदा करता है और जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाता है।
पायलट संगठन का मानना है कि किसी मृत पायलट के परिवार के सदस्य को इस तरह जांच में शामिल करना गलत परंपरा स्थापित कर सकता है। उनका कहना है कि विमान हादसों की जांच का उद्देश्य दोषी ठहराना नहीं, बल्कि हादसे के कारणों को समझना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना होना चाहिए। यह बात अंतरराष्ट्रीय नियमों, खासक आईसाएओ के एनेक्स-13 और भारतीय विमान हादसा जांच नियमों में भी स्पष्ट रूप से कही गई है।


