रांची : राज्य के ग्रामीण विकास विभाग में कथित टेंडर घोटाले तथा मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में ED ने एक नया आरोप-पत्र दायर किया है। इस आरोप-पत्र में तत्कालीन ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम के आप्त सचिव संजीव लाल की पत्नी रीता लाल सहित आठ व्यक्तियों को नामजद किया गया है। इसकी वजह से इस घोटाले में आरोपितों की संख्या अब 22 हो गई है।
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क्या है मामला?
ईडी ने इस घोटाले के तहत दाखिल आरोप-पत्र (Prosecution Complaint) में बताया है कि ठेकेदारों द्वारा मंत्री एवं विभागीय अधिकारियों को घूस के रूप में वाहन व नकदी दी गई थी। उदाहरण के तौर पर, ठेकेदार ने पूर्व प्रमुख अभियंता वीरेंद्र राम को ₹1.88 करोड़ नकद व दर्जनभर महंगी गाड़िया (जैसे Toyota Innova तथा Toyota Fortuner) दी थीं। दूसरा ठेकेदार राधा मोहन साहू ने 39 लाख रुपये व एक Toyota Fortuner गाड़ी दी थी, जो उनके बेटे के नाम पर पंजीकृत है।
इसके अलावा अभियोजन के अनुसार, गाड़ियों के अलावा नकदी व संपत्ति के माध्यम से अनियोजित धन भूमिगत लाया गया। अभियुक्तों में उस संपत्ति को खरीदने वाले भी शामिल हैं, जिसे भ्रष्टाचार व मनी लॉन्ड्रिंग के पैसे से खरीदी गई बताई जा रही है।
भूमि व ठिकानों का विवरण
घोटाले में शामिल भूमि का विवरण इस प्रकार है:
- स्थान : हजारीबाग जिले के सदर अंचल, थाना-252, मौजा बभनवे, हल्का 11
- खाता संख्या-95, प्लॉट नंबर 1055, 1060 तथा 848 – कुल रकबा 28 डिसमिल
- खाता संख्या-73, प्लॉट नंबर 812 – रकबा 72 डिसमिल
इस भूमि पर नेक्सजेन नामक शोरूम संचालित है, जिसमें अभियुक्तों का दखल-कब्जा बताया गया है
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पूर्व कार्रवाई और जांच की प्रगति
मामले में पहले से ही गिरफ्तार अभियुक्तों में शामिल हैं:
- ठेकेदार विनय सिंह
- लैंड ब्रोकर विजय सिंह
तत्कालीन सदर अंचल अधिकारी शैलेश कुमार
ईडी ने पहले की कार्रवाई में 37 करोड़ रुपये नकद जब्त किए थे, जिनमें से 32.20 करोड़ रुपए खास-तौर पर संजीव लाल के निकटस्थ लोगों के ठिकानों से मिला था।
आगे की कार्रवाई
ईडी ने आरोप-पत्र में आगे कहा है कि ठेकेदारों द्वारा दी गई घूस की रकम से खरीदी गई संपत्तियों को भी मामले में शामिल किया गया है। इकाई अब इस स्पेक्ट्रम को विस्तारित कर रही है कि कैसे विभागीय ठेका प्रणाली में कमीशन व कटौती का नेटवर्क बना हुआ था, जिसमें अधिकारियों, ठेकेदारों, ब्रोकरों व राजनीति-संबद्ध लोगों की भूमिका थी। अब नए आरोपितों पर अभियोजन चलने से अगले चरण में गिरफ्तारी व संपत्ति ज़ब्ती की प्रक्रिया तेज हो सकती है।
झारखंड के ग्रामीण विकास विभाग में ठेका प्रक्रिया के दायरे में आये इस भ्रष्टाचार-मामले ने विभागीय पारदर्शिता व शासन-प्रशासन की जवाबदेही पर गहरा सवाल खड़ा किया है। हालिया आरोप-पत्र से यह स्पष्ट होता है कि मामला सिर्फ गाड़ियों व नकदी तक सीमित नहीं बल्कि संपत्ति के अधिग्रहण व मनी लॉन्ड्रिंग तक पहुँच चुका है। जांच-एजेंसी की निगाह अब और व्यापक हो गई है, तथा आने वाले समय में राजनीतिक व प्रशासनिक स्तर पर बड़े बयानों व कार्रवाई की उम्मीद है।


