बिहार: बिहार का चुनाव इस बार किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं लग रहा है। राजनीति के इस मैदान में अब सियासत के साथ-साथ ग्लैमर का तड़का भी देखने को मिल रहा है। कभी सिर्फ नेताओं तक सीमित रहने वाला चुनावी मैदान अब फोक सिंगर्स और भोजपुरी सितारों से भी रोशन होने जा रहा है। जनता के बीच लोकप्रिय चेहरों को टिकट देकर पार्टियां मतदाताओं का दिल जीतने की कोशिश कर रही हैं।
मैथिली ठाकुर
इस बार बीजेपी ने मिथिला की प्रसिद्ध लोकगायिका मैथिली ठाकुर को दरभंगा के अलीनगर सीट से मैदान में उतारा है। उन्हें वर्तमान विधायक का टिकट काटकर चुनाव मैदान में उतारा गया है. मैथिली ठाकुर अपनी सुरीली आवाज और लोकगीतों के ज़रिए न सिर्फ बिहार, बल्कि पूरे देश में जानी जाती हैं। बीजेपी को उम्मीद है कि मैथिली ठाकुर के नाम और उनके साफ़-सुथरे छवि का फायदा पार्टी को ज़रूर मिलेगा। मिथिला क्षेत्र में उनकी पकड़ और लोकप्रियता से पार्टी को मदद मिल सकता है।
पवन सिंह पर आरोप
वहीं भोजपुरी के पावरस्टार माने जाने वाले पवन सिंह भी पिछले कुछ दिनों से काफी चर्चे में थे। उन्होनें भी चुनाव लड़ने का पूरा मन बना लिया था। लेकिन उनकी पत्नी ज्योति सिंह ने पवन सिंह पर आरोप लगाते हुए कहा था कि जब पवन सिंह से परिवार ही नहीं संभल रहा है, तो वो जनता को कैसे संभालेंगे।ऐसे आरोप , विवाद और press conference के बाद पवन सिंह ने निर्णय लिया कि अब वो चुनाव नहीं लड़ेंगे।
ज्योति सिंह
एक तरफ पवन सिंह ने चुनाव लड़ने से इनकार किया तो वहीं दूसरी तरफ उनकी पत्नी ज्योति सिंह चुनाव लड़ने की तैयारी में जुट गई. चुनाव लड़ने को लेकर वह जन सुराज के नेता प्रशांत किशोर से भी मिली, हालांकि इसे राजनीति से जोड़कर नहीं देखने की बात प्रशांत किशोर ने कही. दिवाली के दिन जब चुनाव के नामांकन का अंतिम समय था, तो ज्योति सिंह ने चुनाव लड़ने का फैसला किया और अब वो काराकाट विधानसभा सीट से बतौर निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर गई.
भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार खेसारी लाल यादव
ग्लैमर के तड़का से राजद भी अछूता नहीं रहा. राजद ने भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार खेसारी लाल यादव पर दांव लगाया है। खेसारी लाल यादव अब छपरा सीट से चुनावी मैदान में हैं। उन्होंने फिल्मों और गानों के ज़रिए जनता के बीच एक खास जगह बनाई है। अब वे राजनीति में उतरकर जनसेवा में बदलने का दावा कर रहे हैं। इससे पहले उनकी पत्नी चंदा देवी ने चुनाव लड़ने का पैसला किया था। लेकिन कुछ तकनिकी कारणों से वो अपना नामांकन नहीं कर पाई थी, जिसके कारण अब खेसारी लाल खुद ही चुनावी मैदान में उतर गए हैं। उनके समर्थक भी उत्साह में हैं और उनका कहना है कि भोजपुरी के लाल अब जनता के काम करेंगे।
भोजपुरी गायक रितेश पांडेय
इसी बीच एक और भोजपुरी गायक रितेश पांडेय भी राजनीति की राह पकड़ चुके हैं। वे रोहतास जिले की कारगहर सीट से जन सुराज पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। तीनों कलाकारों के मैदान में आने से बिहार की सियासत में रौनक बढ़ गई है। लोग अब सिर्फ मुद्दों की नहीं, बल्कि अपने पसंदीदा सितारों की भी चर्चा कर रहे हैं। चुनावी माहौल अब पूरी तरह से रंगीन हो गया है — मंचों पर भाषणों के साथ गीत-संगीत का भी तड़का लग रहा है। वहीं अगर बात करें प्रिती किन्नर की तो वो गोपालगंज के भोरे विधानसभा से चुनाव लड़ेगी उन्हें भी जन सुराज पार्टी ने थर्ड जेंडर के रूप में चुनावी मैदान में उतरना है। जो हर किन्नर समाज के लिए गर्व की बात है। ऐसा पहली बार हुआ है, जब बिहार में किसी ऐसे व्यक्ति को टिकट दिया है।
सुशांत सिंह राजपूत की बहन
दिव्या गौतम जो सुशांत सिंह राजपूत की बहन हैं, वो भी इस बार राजनीति के मैदान में उतर चुकी हैं। दिव्या का कहना है, वो बस अपने भाई सुशांत के न्याय के लिए चुनाव लड़ना चाहती हैं। दिव्या गौतम दिघा विधानसभा सीट से CPI (ML) यानी कम्युनिस्ट पार्टी आफ इंडिया से चुनाव लड़ेंगी।
पति-पत्नी आमने-सामने चुनावी मैदान में
इसी बीच, एक दिलचस्प कहानी पूर्वी चंपारण जिले से सामने आई है, जहाँ राजनीति अब पारिवारिक रिश्तों के बीच भी टकराव का कारण बन गई है। यहाँ पति-पत्नी आमने-सामने चुनावी मैदान में उतर आए हैं। देवा गुप्ता, जो राजद के उम्मीदवार हैं, ने मोतिहारी विधानसभा सीट से नामांकन किया। लेकिन कुछ ही घंटों बाद उनकी पत्नी प्रीति कुमारी, जो नगर निगम की मेयर हैं, उसी सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल कर दिया। अब इस सीट पर ‘पति बनाम पत्नी’ की दिलचस्प जंग देखने को मिलेगी। लोग भी इसे घर की लड़ाई, मंच पर आई के रूप में देख रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह मुकाबला सिर्फ एक सीट का नहीं बल्कि यह दिखाएगा कि जनता भावनाओं पर वोट देती है या काम पर।
बिहार की जनता देगी ग्लैमर को वोट
कुल मिलाकर, बिहार का यह चुनाव पूरी तरह से ड्रामा, और नए समीकरणों से भरा हुआ है। जहां एक तरफ भोजपुरी सितारे और लोकगायक लोगों के दिलों में जगह बनाने की कोशिश में हैं, वहीं पुराने नेता अपनी साख बचाने की कोशिश में लगे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस बार बिहार की जनता ग्लैमर को वोट देगी या फिर असली मुद्दों को चुनेंगी।
बीजेपी के पूर्व केंद्रीय मंत्री आर. के. सिंह
बीजेपी के पूर्व केंद्रीय मंत्री आर. के. सिंह ने हाल ही में बड़ा बयान दिया है। उन्होंने जनता से अपील की है कि वे दागी उम्मीदवारों को वोट न दें, चाहे वो किसी भी पार्टी या जाति के हों। आर. के. सिंह ने साफ कहा कि ऐसे लोगों को वोट देना देश के लिए गलत है। अगर कोई अच्छा उम्मीदवार नहीं है, तो ‘नोटा’ दबाना बेहतर है। उन्होंने कुछ नाम भी लिए जेडीयू के अनंत सिंह (मोकामा), सम्राट चौधरी (तरापुर), ओसामा शाहब (रघुनाथपुर) और दीपू सिंह (आरा) और कहा कि इन सबके खिलाफ गंभीर आरोप हैं। यह बयान उनकी सहयोगी पार्टी जेडीयू पर सीधा निशाना माना जा रहा है।
लेकिन बिहार की सियासत सिर्फ चमक-दमक तक सीमित नहीं है। यहां हर दिन नए विवाद और चर्चाएं भी जन्म ले रही हैं।


