Monday, September 14, 2026

प्रशांत किशोर ने जागृति ठाकुर को ही क्यों चुना उम्मीदवार, जानिए क्या है उनका प्लान

एयरनाउ डेस्क: बिहार की राजनीति में एक बार फिर कर्पूरी ठाकुर परिवार की चर्चा तेज हो गई है.लेकिन इस बार चर्चा उनके किसी भाषण या फैसले या उनकी नहीं, बल्कि उनकी पोती की है। जन सुराज पार्टी ने समस्तीपुर जिले की चर्चित मोरवा विधानसभा सीट से डॉ. जागृति ठाकुर को उम्मीदवार बनाकर सबको चौंका दिया है। जैसे ही नाम सामने आया, मोरवा से लेकर सोशल मीडिया तक एक ही सवाल उठा क्या कर्पूरी परिवार की वापसी हो रही है? जागृति ठाकुर कोई आम उम्मीदवार नहीं हैं। वो उस विरासत की प्रतिनिधि हैं, जिसे बिहार ने जननायक कहा, भारत रत्न कहा, और जिसने सामाजिक न्याय की लड़ाई को अपने जीवन का मिशन बना लिया था। लेकिन सवाल ये है कि जनसुराज का जागृति को चुनना क्या सिर्फ विरासत के नाम पर राजनीति करने की कोशिश है? या फिर ये एक नई सोच, एक नया विजन है? चलिए थोड़ा स जागृति ठाकुर के बारे में जान लेते है। जागृति ठाकुर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और जननायक कर्पूरी ठाकुर कि पोती और उनके छोटे बेटे वीरेंद्र नाथ ठाकुर कि बेटी है। जागृति के पिता पेशे से डॉक्टर रहे हैं। और जागृति भी एक डेन्टिस्ट है। उन्होंने पटना के बुद्धा डेंटल कॉलेज से अपनी पढ़ाई की है। शादी के बाद वो हिमाचल प्रदेश में बस गई थीं। लेकिन अब एक बार फिर बिहार में वापिस लौटी है।

प्रशांत किशोर से कैसे हुई मुलाकात 

जागृति की प्रशांत किशोर से पहली मुलाकात दो साल पहले हुई थी, जब वे पदयात्रा कर रहे थे। उस मुलाकात के दौरान ही वो प्रशांत किशोर के विजन से प्रभावित हो गई थी। उन्होंने सोचा कि अगर कोई व्यक्ति इतनी गंभीरता और क्षमता के साथ बिहार के लिए सोच सकता है, तो मुझे भी इसमें योगदान देना चाहिए। और तभी उन्होंने तय कर लिया था कि वो जन सुराज से जुड़ेंगी। फिर 28 जुलाई को पटना में जन सुराज के कार्यक्रम में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ली। मंच पर प्रशांत किशोर के साथ हाथ मिलाते ही तालियों से सभागार गूंज उठा। और उन्होंने साफ कहा कि मैं अपने दादा जननायक कर्पूरी ठाकुर के अधूरे सपनों को पूरा करने के लिए राजनीति में आई हूं। अब उन्होंने कह तो दिया पर अब सवाल यहां ये उठता है कि क्या ये सिर्फ एक भावनात्मक बयान था? या फिर एक ठोस राजनीतिक संकल्प? जागृति मानती हैं कि बिहार में 35 साल से पलायन और शिक्षा जैसे मुद्दों पर कोई गंभीर चर्चा नहीं हुई। लेकिन अब जब जन सुराज इन मुद्दों को उठा रही है, तो बाकी पार्टियां भी इन्हीं मुद्दों पर बोलने लगी हैं। हालांकि उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भी बात की और कहा कि उन्होंने बिहार में कई अच्छे काम किए हैं। लेकिन मोरवा क्षेत्र में विकास उतना नहीं हुआ, जितना होना चाहिए था। और इसलिए मैं राजनीति में खींच चली लाई और सिर्फ चुनाव लड़ने के लिए नहीं, बल्कि अपने दादा की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए। अब अगर बात करे मोरवा की तो ,मोरवा विधानसभा क्षेत्र समस्तीपुर जिले की चर्चित सीटों में से एक है. यहां जातीय समीकरण और जनभावना का गहरा असर होता है. यहां कई दावेदार जन सुराज के टिकट की उम्मीद में थे, लेकिन पार्टी ने डॉ. जागृति ठाकुर पर भरोसा जताया. पार्टी के अनुसार, प्रशांत किशोर की टीम ने मोरवा में सर्वे किया और पाया कि जनता कर्पूरी ठाकुर परिवार पर अभी भी भरोसा करती है और उनकी इज्जत करती है। इससे स्थानीय राजनीति में हलचल मच गई है. कुछ पुराने नेता टिकट न मिलने से नाराज हैं, जबकि युवा मतदाता और महिला वर्ग इस फैसले को “नई राजनीति की शुरुआत” मान रहे हैं. अब प्रशांत किशोर का जागृति को ऐसे में चुनना एक बहुत ही सोचा समझा निर्णय है। स्थानीय पर्यवेक्षक मानते हैं कि जन सुराज ने मोरवा से ऐसा चेहरा उतारा है जो जनता के दिलों को छू सकता है और उनका भरोसा जीत सकता है। और इसी भरोसे के आधार पर टिकट दिया गया डॉ. जागृति ठाकुर को। अब ज़रा पारिवारिक समीकरण भी समझिए यहां, जागृति के ताऊ रामनाथ ठाकुर जदयू से राज्यसभा सांसद हैं और केंद्र सरकार में मंत्री भी। यानी एक ही परिवार के दो सदस्य लेकिन दो अलग-अलग राजनीतिक पार्टी और सोच पर। लेकिन जागृति ने साफ कहा कि यह पारिवारिक नहीं, राजनीतिक लड़ाई है। मैं किसी पर व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं करना चाहती।

विरासत की लड़ाई 

अब बात आती है उस विरासत की, जिस पर कई दावेदार हैं।अब ये तो सबको पता है कि ये एक विरासत की लड़ाई भी है। उल्लेखनीय है कि बिहार के पूर्व मुख्‍यमंत्री कर्पूरी ठाकुर जननायक के नाम से मशहूर हैं। वर्तमान में बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार और लालू यादव खुद को कर्पूरी ठाकुर का राजनीतिक शिष्य बताते हैं। उनकी विरासत पर दावा करने के लिए नीतीश ने उनके बेटे रामनाथ ठाकुर को राज्यसभा भेजा और केन्द्र में मंत्री बनवाया। वहीं, तेजस्वी यादव ने यह कहकर उनकी विरासत पर दावा करने की कोशिश की कि स्व. ठाकुर की मौत उनके पिता (लालू) की गोद में हुई थी। यानि कर्पूरी ठाकुर की विरासत पर दावा करने वालों की कमी नहीं है। लेकिन अब जब उनकी पोती खुद मैदान में हैं तो ये लड़ाई सिर्फ राजनीतिक नहीं, प्रतीकात्मक भी हो गई है। अगर जागृति ठाकुर चुनाव जीतती हैं ,तो वो होंगी कर्पूरी ठाकुर की तीसरी पीढ़ी, जो उनकी विरासत को फिर से ज़िंदा करेगी। और यही बात इस चुनाव को और मोरवा विधानसभा सीट को और खास बनाती है। तो क्या ये सिर्फ एक चुनाव है? या फिर एक विरासत की वापसी?क्या मोरवा की जनता इस नई पीढ़ी को मौका देगी?क्या जन सुराज का विजन, जागृति की भावनाएं, और कर्पूरी ठाकुर की विरासत , मिलकर मोरवा की राजनीति को एक नई दिशा देंगे? और अब इसका जवाब तो आने वाले चुनाव में मिलेगा।

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एयर नाऊ स्पेशल

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