बिहार : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर एनडीए में सीट शेयरिंग पर बड़ी प्रगति हुई है। कई दौर की बैठकों के बाद सीट बंटवारे का फॉर्मूला लगभग तय हो गया है। अब सिर्फ औपचारिक ऐलान बाकी है। आज यानी 8 अक्टूबर को दिल्ली में एनडीए के शीर्ष नेता बैठक करेंगे, जिसके बाद पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सीट शेयरिंग की आधिकारिक घोषणा की जा सकती है।
चिराग पासवान मान गए 25 सीटों पर
गठबंधन में सबसे बड़ा पेच Chirag Paswan की सीटों को लेकर था। वे शुरू में 40 सीटों की मांग पर अड़े थे, लेकिन 7 अक्टूबर को दिल्ली में हुई बैठक के बाद सहमति बन गई। अब वे 25 सीटों पर चुनाव लड़ने को तैयार हो गए हैं। बैठक में भाजपा की ओर से धर्मेंद्र प्रधान, विनोद तावड़े और मंगल पांडेय शामिल थे।
बैठक करीब 45 मिनट चली, जिसमें नाराजगी के सभी मुद्दों पर समाधान निकल आया। तय फॉर्मूले के मुताबिक, JDU को 103, BJP को 102, LJP(R) को 25, HAM को 8 और RLM को 5 सीटें मिलने की संभावना है।
चिराग की तीन बड़ी मांगें
- कार्यकर्ताओं को आयोग और बोर्ड में जगह चिराग ने कहा है कि सभी पुराने उम्मीदवारों को टिकट न मिलने पर उन्हें आयोग, बोर्ड या अन्य पदों पर समायोजित किया जाए।
- पूरे राज्य में सीटें मिले वे चाहते हैं कि पार्टी को एक ही क्षेत्र में नहीं, बल्कि राज्य के विभिन्न इलाकों में सीटें दी जाएं ताकि पार्टी का विस्तार हो।
- बड़े नेताओं को पसंद की सीटें पार्टी के कुछ बड़े नेताओं को उनकी पसंद की सीटें देने की भी मांग की गई है। इस पर भाजपा और जदयू के बीच भी चर्चा हुई है।
उपेंद्र कुशवाहा अब भी चुप
उपेंद्र कुशवाहा ने 12 से 15 सीटों की मांग रखी है, लेकिन अब तक कोई स्पष्ट सहमति नहीं बनी है। माना जा रहा है कि उनकी पार्टी को 4-5 सीटें मिल सकती हैं। उनकी पार्टी इस बार पहली बार एनडीए के साथ विधानसभा चुनाव लड़ेगी।
संतोष मांझी बोले- लगभग सब तय
संतोष मांझी ने कहा कि एनडीए में सीट शेयरिंग को लेकर लगभग सब तय हो चुका है और जल्द ही इसकी घोषणा की जाएगी। आज होने वाली बैठक में इसे अंतिम रूप दिया जा सकता है।
जदयू ने जिम्मेदारी भाजपा पर छोड़ी
सीट बंटवारे के मामले में Janata Dal (United) ने अपने सहयोगियों को मनाने की जिम्मेदारी भाजपा पर छोड़ दी है। पार्टी ने कहा है कि चिराग पासवान, जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा से समझौता भाजपा करेगी।
चिराग और नीतीश के रिश्ते में तनाव
2020 के विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान ने 135 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और Nitish Kumar को 35 सीटों पर नुकसान पहुंचाया था। इससे जदयू तीसरे नंबर पर आ गई थी। हालांकि अब दोनों एक साथ एनडीए में हैं, लेकिन रिश्तों में पहले जैसी गर्मजोशी नहीं है।
भाजपा ने धर्मेंद्र प्रधान पर जताया भरोसा
इस बार सीट शेयरिंग और गठबंधन प्रबंधन की जिम्मेदारी धर्मेंद्र प्रधान को दी गई है। उन्होंने दिल्ली में कई बैठकों के जरिए फॉर्मूला फाइनल करने में अहम भूमिका निभाई। हरियाणा और अन्य राज्यों में चुनाव जीताने के बाद अब उनसे बिहार में भी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। बिहार चुनाव में एनडीए ने सीट बंटवारे का बड़ा संकट लगभग सुलझा लिया है। आज की बैठक में अंतिम फैसला होने के बाद गठबंधन औपचारिक ऐलान कर देगा। भाजपा और जदयू बराबर सीटों पर लड़ेंगी जबकि छोटे सहयोगियों को सम्मानजनक हिस्सेदारी दी जाएगी। इस कदम से एनडीए की चुनावी रणनीति को मजबूती मिलने की उम्मीद है।


