न्यूज डेस्क : अब खेत के साथ तालाब से भी होगी कमाई, मोती उत्पादन के लिए सरकार देगी मौका; जानें पूरी योजना
UP Pearl Farming Scheme 2026: उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए कमाई का एक नया रास्ता खुलने जा रहा है। अब किसान फसलों के साथ अपने तालाब में मोती का उत्पादन करके भी आमदनी बढ़ा सकेंगे। इसके लिए राज्य सरकार मोती संवर्धन योजना को बढ़ावा दे रही है। गोरखपुर में इस योजना को लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है और इसके लिए 18 लाख रुपये का बजट तय किया गया है।
योजना के तहत किसानों को मोती उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीक का प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही, उन्हें अपनी जरूरत और संसाधनों के हिसाब से मोती उत्पादन की इकाई लगाने का मौका मिलेगा। सरकार की इस पहल से किसानों की अतिरिक्त कमाई के साथ गांवों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
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गोरखपुर में योजना के लिए 18 लाख रुपये का बजट
गोरखपुर जिले में मोती संवर्धन योजना को आगे बढ़ाने के लिए 18 लाख रुपये निर्धारित किए गए हैं। फिलहाल विभाग को शासन से बजट मिलने का इंतजार है। राशि मिलने के बाद लाभार्थियों की संख्या तय की जाएगी और आवेदन की प्रक्रिया शुरू होगी।
अधिकारियों के मुताबिक, अभी इस योजना को लेकर किसानों के बीच ज्यादा जानकारी नहीं है। यही वजह है कि अब तक उम्मीद के मुताबिक आवेदन नहीं आए हैं। मत्स्य विभाग की कोशिश है कि अधिक से अधिक किसानों को योजना के बारे में जानकारी देकर इससे जोड़ा जाए।
15 किसानों को दिया जा चुका है प्रशिक्षण
मोती उत्पादन की जानकारी देने के लिए सितंबर 2026 में गोरखपुर मंडल के 15 चुने हुए किसानों को एक दिन का प्रशिक्षण दिया गया था। यह कार्यक्रम चरगावां स्थित कृषि भवन के सभागार में आयोजित हुआ था।
इस दौरान विशेषज्ञ आनंद कुमार और डॉ. अय्यूब ने किसानों को मोती उत्पादन की पूरी प्रक्रिया समझाई। इसमें अच्छी सीप का चुनाव, सीप के अंदर न्यूक्लियस यानी केंद्रक डालने की तकनीक और तालाब की देखभाल से जुड़ी जानकारी दी गई।
इस प्रशिक्षण का मकसद किसानों को मोती उत्पादन की वैज्ञानिक विधि से परिचित कराना था, ताकि वे इस काम को सही तरीके से शुरू कर सकें।
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2 हजार से 15 हजार सीप तक की इकाई लगा सकेंगे किसान
मोती संवर्धन योजना के तहत किसानों को अपनी जमीन, तालाब और बजट के अनुसार तीन तरह की इकाइयां लगाने का विकल्प मिलेगा। इनकी क्षमता और अनुमानित लागत इस प्रकार है:
इकाई की क्षमता अनुमानित लागत
2,000 सीप 1.50 लाख रुपये
5,000 सीप 3.50 लाख रुपये
15,000 सीप 10 लाख रुपये
इस व्यवस्था से छोटे और बड़े, दोनों तरह के किसान अपनी सुविधा के अनुसार मोती उत्पादन का काम शुरू कर सकेंगे। यानी जिन किसानों के पास छोटा तालाब है, वे भी अपनी क्षमता के हिसाब से इस योजना से जुड़ सकते हैं।
पूरे उत्तर प्रदेश के लिए 3 करोड़ रुपये का बजट
उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में मोती संवर्धन योजना के लिए कुल 3 करोड़ रुपये का बजट रखा है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य तालाब और दूसरे जल स्रोतों का बेहतर इस्तेमाल करना और मोती उत्पादन को बढ़ावा देना है।
इसके साथ ही ग्रामीण इलाकों में किसानों और युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए रास्ते तैयार करना भी योजना का एक अहम मकसद है।
कैसे मिलेगा योजना का लाभ?
योजना के तहत लाभार्थियों का चयन जिला स्तर पर बनाई गई समिति करेगी। इसके लिए आवेदन विभाग के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से लिए जाने का प्रावधान है। गोरखपुर में शासन से बजट मिलने के बाद लाभार्थियों की संख्या और आवेदन से जुड़ी आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।
किसानों के लिए क्या है खास?
मोती उत्पादन खेती के साथ अतिरिक्त कमाई का एक विकल्प बन सकता है। हालांकि, इसमें सीप की देखभाल, सही तकनीक और तालाब का प्रबंधन जरूरी है। इसलिए इस काम को शुरू करने से पहले किसानों को प्रशिक्षण और विभाग से मिलने वाली आधिकारिक जानकारी जरूर हासिल करनी चाहिए।

