रांची : केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड के सुदूर पूर्वी भाषा विभाग (कोरियाई) द्वारा हंगुल दिवस 2026 का पुरे हफ़्ते भव्य आयोजन किया गया। पुरे सफ्ताह तक चले इस समारोह में कोरियाई भाषा, साहित्य, कला, संस्कृति, परंपरा और जीवन-शैली की विविध एवं आकर्षक झलक देखने को मिली। विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी ने पूरे आयोजन को जीवंत एवं उत्सवपूर्ण बना दिया।
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सुदूर पूर्व भाषा विभाग (कोरियाई) के प्राध्यापक डॉ. शशि कुमार मिश्रा जी ने बताया की समारोह का शुभारंभ 7 अक्टूबर को कोरियाई फिल्म प्रदर्शन के साथ हुआ। इसके बाद कोरियाई भाषण, निबंध लेखन, नृत्य, कोरियाई गीत गायन, सुलेख, कोरियाई संस्कृति आधारित चित्रकला, हस्तशिल्प तथा कोरियाई व्यंजन निर्माण जैसी विभिन्न प्रतियोगिताएँ आरंभिक एवं मध्यवर्ती स्तर पर आयोजित की गईं। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को कोरियाई भाषा सीखने के साथ-साथ उसकी संस्कृति को निकट से समझने और अनुभव करने का अवसर मिला।
सुलेख प्रतियोगिता में लगभग 40 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। वहीं कोरियाई व्यंजन प्रतियोगिता विशेष आकर्षण का केंद्र रही, जिसमें 16 विद्यार्थियों ने भाग लेकर लगभग 600 विद्यार्थियों एवं अतिथियों के लिए विभिन्न प्रकार के कोरियाई व्यंजन तैयार किए। विद्यार्थियों ने न केवल व्यंजन तैयार किए, बल्कि उनके माध्यम से कोरियाई खान-पान की परंपरा और सांस्कृतिक विशेषताओं को भी प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम में प्रस्तुत ताइक्वांडो प्रदर्शन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। इसके अतिरिक्त कोरियाई पारंपरिक खेलों ने भी विद्यार्थियों एवं आगंतुकों में विशेष उत्साह उत्पन्न किया। पारंपरिक खेलों और सांस्कृतिक गतिविधियों में विद्यार्थियों की भागीदारी ने समारोह को केवल देखने का कार्यक्रम न बनाकर एक जीवंत अनुभव में परिवर्तित कर दिया।
विद्यार्थियों ने विभाग के छोटे से परिसर को कोरियाई चित्रों, सुलेख, हस्तनिर्मित सज्जा और पारंपरिक कलात्मक अभिव्यक्तियों से इस प्रकार सजाया कि पूरा परिसर एक जीवंत कोरियाई सांस्कृतिक केंद्र के रूप में दिखाई देने लगा। जगह-जगह प्रदर्शित कोरियाई अक्षरों, चित्रों और पारंपरिक सज्जा ने समारोह के वातावरण को और अधिक आकर्षक बना दिया।

नई दिल्ली स्थित कोरियाई शिक्षा केंद्र द्वारा उपलब्ध कराए गए पारंपरिक कोरियाई परिधानों ने समारोह की सांस्कृतिक गरिमा को और बढ़ाया। विद्यार्थियों एवं आगंतुकों को पारंपरिक परिधानों को पहनने और उनके माध्यम से कोरियाई संस्कृति को अनुभव करने का अवसर मिला।
भारत में कोरिया के पूर्व राजदूत श्री स्कंद रंजन तयाल एवं श्रीमती कुसुम लता तयाल ने 8 एवं 9 अक्टूबर को समारोह में उपस्थित होकर विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। उनकी उपस्थिति ने विद्यार्थियों को भारत-कोरिया संबंधों, भाषा-अध्ययन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व को समझने का विशेष अवसर प्रदान किया।
समारोह में विश्वविद्यालय के 600 से अधिक विद्यार्थियों तथा 150 से अधिक शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों ने विभिन्न कार्यक्रमों में सहभागिता की। विश्वविद्यालय समुदाय की व्यापक भागीदारी ने इस आयोजन को विभागीय कार्यक्रम से आगे बढ़ाकर एक व्यापक सांस्कृतिक उत्सव का स्वरूप प्रदान किया।

हंगुल दिवस के माध्यम से विद्यार्थियों ने यह अनुभव किया कि किसी विदेशी भाषा का अध्ययन केवल शब्दों और व्याकरण को सीखना नहीं है, बल्कि उसके पीछे निहित इतिहास, संस्कृति, कला, सामाजिक जीवन और परंपराओं को समझना भी है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए समारोह में भाषा-अध्ययन को सांस्कृतिक अनुभव से जोड़ने का प्रयास किया गया।
आयोजन के दौरान विद्यार्थियों में विशेष उत्साह और रचनात्मकता देखने को मिली। प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने अपनी भाषायी दक्षता के साथ-साथ कला, संगीत, नृत्य, पाक-कला और रचनात्मक अभिव्यक्ति का भी प्रदर्शन किया। इससे कोरियाई भाषा सीखने वाले विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने के लिए एक व्यापक मंच मिला।

विभाग के अनुसार, हंगुल दिवस का आयोजन विद्यार्थियों को कोरियाई भाषा और संस्कृति से जोड़ने के साथ-साथ भारत और कोरिया के बीच बढ़ते शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को समझने का अवसर भी प्रदान करता है। ऐसे आयोजन विदेशी भाषा शिक्षा को कक्षा की सीमाओं से बाहर निकालकर उसे वास्तविक सांस्कृतिक अनुभव से जोड़ते हैं।
समारोह के दौरान विद्यार्थियों, शिक्षकों और अतिथियों के बीच संवाद एवं सहभागिता ने कार्यक्रम को और अधिक सार्थक बनाया। विभिन्न गतिविधियों में विद्यार्थियों की स्वैच्छिक भागीदारी ने यह भी प्रदर्शित किया कि विश्वविद्यालय में कोरियाई भाषा एवं संस्कृति के प्रति रुचि निरंतर बढ़ रही है।

तीन दिनों तक विश्वविद्यालय परिसर में कोरियाई भाषा और संस्कृति का उत्सवी वातावरण बना रहा। भाषा, साहित्य, संगीत, नृत्य, कला, खेल, पाक-कला और पारंपरिक परिधान—इन सभी ने मिलकर हंगुल दिवस को एक बहुआयामी सांस्कृतिक समारोह का रूप दिया।
पुरस्कार वितरण एवं ग्रुप फोटोग्राफी के साथ हंगुल दिवस 2026 समारोह का समापन हुआ। आयोजन ने विद्यार्थियों के बीच नई ऊर्जा और उत्साह का संचार किया तथा विश्वविद्यालय परिसर में भारत-कोरिया सांस्कृतिक संवाद की एक सुंदर और यादगार छाप छोड़ी। समारोह में विश्वविद्यालय के कुलपति, अधिष्ठाता शैक्षणिक मामले, परीक्षा नियंत्रक, वित्त अधिकारी सहित देश के विभिन्न स्थानों से आए विशिष्ट अतिथिगण भी उपस्थित रहे। अतिथियों ने विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों एवं गतिविधियों का आनंद लिया तथा अपने प्रेरणादायी उद्बोधनों के माध्यम से विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया।

