Sunday, September 27, 2026

डुमरी MLA जयराम महतो ने जमशेदपुर पुलिस पर उठाए सवाल, कहा – कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी

रांची: झारखंड के डुमरी विधायक व जेएलकेएम अध्यक्ष जयराम महतो ने जमशेदपुर पुलिस के बीते शनिवार देर शाम शहर की सड़कों पर किए गए व्यवहार को लेकर सवाल उठाया है। अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर लिखे एक पोस्ट में उन्होंने कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पुलिस की जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखने की होती है, किसी भी परिस्थिति में आम नागरिकों के साथ मारपीट किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं है. उन्होंने 

दरअसल जमशेदपुर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसमें एक पुलिस अधिकारी आम लोगों पर लाठी बरसाते नजर आते हैं और लोगों के सड़कों पर रहने को लेकर सवाल उठाते हैं। हालांकि इस वीडियो की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन इस वीडियो को लेकर ही जयराम महतो ने झारखंड पुलिस व सीएम हेमंत सोरेन से अपने पोस्ट में सवाल पूछा है।

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जयराम महतो ने पोस्ट में लिखा

अपने पोस्ट में जयराम महतो ने लिखा, “कानून का राज इसलिए होता है ताकि रात के 12 बजे भी कोई परिवार बिना डर के फिल्म देखकर घर लौट सके, सड़क पर टहल सके, आइसक्रीम खा सके या किसी दुकान पर बैठकर एक कप चाय-कॉफी पी सके. नागरिकों को सुरक्षा देना पुलिस की जिम्मेदारी है, उन्हें डराना नहीं.”

“बीती रात जमशेदपुर के बिष्टुपुर में सोशल मीडिया में वायरल वीडियो के अनुसार रात 10:30 से 11:30 बजे के बीच दुकानों में चाय पी रहे, आइसक्रीम खा रहे हैं या खरीदारी के लिए बाहर निकले आमलोगों पर बिस्टुपुर पुलिस द्वारा अचानक बिना सूचना दिए लाठी बरसाने का शर्मनाक मामला सामने आया है. आमलोगों की पुलिस द्वारा पिटाई की मैं कड़ी निंदा करता हूं. कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है, लेकिन आम नागरिकों के साथ मारपीट किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं है.”

दोषी पुलिसकर्मी पर हो कार्रवाई

झारखंड पुलिस को टैग करते हुए डुमरी विधायक ने वायरल वीडियो में शांतिपूर्ण नागरिकों पर डंडा चलाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है. साथ ही पुलिस के आला अधिकारियों को इस पूरे मामले पर सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण भी देना चाहिए. निर्दोष लोगों को क्यों पीटा जा रहा है.? अगर रात में बाजारों में निकलना अपराध है, तो जिला प्रशासन आमलोगों पर लाठी चलाने और बेरहमी से पिटाई करने के बजाय शहर में स्पष्ट नियम और आवश्यक प्रतिबंध क्यों नहीं लागू कर देती है?

…तो शाम 7 बजे बंद कर दें बाजार

अपने पोस्ट में डुमरी विधायक ने आगे लिखा, “पुलिस इतनी लाचार है तो नियम बना दे कि संध्या 7 बजे के बाद दुकानें बंद कर दें. घर से निकलने के लिए पुलिस से अनुमति लेनी होगी. पुलिस को अपना पावर दिखाना ही है तो बेकाबू हो चुके अपराध और अपराधियों पर दिखाए. जो लोग नशाबाजी को लेकर अड्डेबाजी करते हैं, उनके खिलाफ जरूर सख्त कार्रवाई करें. जमशेदपुर एक औद्योगिक शहर है. देश-विदेश में इसकी पहचान है. लोग देर रात तक फैक्ट्रियों में शिफ्ट करते हैं, काम करते हैं फिर अपने परिवार के साथ कुछ समय बिताने बाहर निकलते हैं, उन्हें सुरक्षा चाहिए, पुलिस की लाठी नहीं.

सीएम हेमंत सोरेन से पूछा सवाल

वहीं जयराम महतो ने इस संबंध में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को अपने पोस्ट में टैग करते हुए लिखा कि, ” हेमंत सोरेन जी, आपकी सरकार विदेशों में जाकर निवेशकों को झारखंड में निवेश के लिए आमंत्रित कर एमओयू कर रही है, यदि अपराधियों पर नियंत्रण के बजाय बाजार बंद करवाए जाएं और आम नागरिकों को रात में सड़कों पर निकलने से लाठी से पिटाई और डराया जाए, तो इससे देश-दुनिया में जमशेदपुर और झारखंड की कानून-व्यवस्था को लेकर क्या संदेश जाएगा ?
आगे उन्होंने लिखा, “जमशेदपुर में हालात ऐसे हैं कि पुलिस की गाड़ी से खींचकर हत्या की घटना सामने आती है, दिनदहाड़े बैंक लूटे जा रहे हैं और रेस्टोरेंट में घुसकर अपराधी ताबड़तोड़ फायरिंग करके आसानी से फरार हो जाते हैं. अपराधियों में पुलिस का खौफ दिखाई नहीं देता. अपराधी पुलिस के नाक के नीचे से अपराध करता है, पुलिस देखती रह जाती है. ये पुलिस की नाकामी है, लेकिन जब अपराधियों पर कार्रवाई करने की बात आती है तो क्या आम जनता पर डंडा चलाकर अपनी ताकत दिखाना ही पुलिसिंग है?
“दिन में बैंक लुटे जा रहे है. दिन में चोरी,. दिन में गोलीबारी, हत्या, दुष्कर्म, चेन छीनी जा रही तो क्या स्कूल-कॉलेज, दफ्तर, बाजार और फैक्ट्रियां भी बंद करा दी जाएंगी ? लोगों को घरों में बंद कर देने से अपराध खत्म हो जाएंगे ? अपराध नियंत्रण के नाम पर चाय पी रहे लोगों पर लाठी से पिटाई करने से कानून-व्यवस्था बेहतर नहीं होगी. एक तरफ राज्य सरकार की अनुमति से देर रात 11 बजे तक बार और शराब की दुकानें खुलती हैं, दूसरी तरफ कॉफी-आइसक्रीम खाने वाले आमलोगों पर डंडे बरसाए जाते हैं.”
“आखिर कौन सा कानून पुलिस को शांतिपूर्ण नागरिकों के साथ ऐसा व्यवहार करने का अधिकार देता है ? क्या रात में दुकान पर चाय-कॉफी पीना या परिवार के साथ बाहर निकलना अपराध है ? वायरल वीडियो में एक दुकान के बाहर महिलाएं भी डरे-सहमे देखा जा रहा है और उनके सामने पुलिसकर्मी लाठियां भांजते नजर आ रहे हैं. दुकानें बंद करवाकर और लोगों की पिटाई कर घरों में भेजकर पुलिस अपनी नाकामी छिपा नहीं सकती.”
“ऐसी घटनाओं से जनता के मन में कानून के प्रति सम्मान नहीं, बल्कि भय और अविश्वास पैदा होगा. जमशेदपुर की गंभीर परिस्थितियों को देखकर नब्बे दशक की याद आने लगी है, जब रात होते ही बाजारों में सन्नाटा छा जाता था और लोगों को घर से निकलने में डर लगता था. अपराधी खुलेआम अपराध करके निकल जाएं और उसका खामियाजा आम जनता भुगते यह कानून का राज नहीं हो सकता…”
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