रांची : साल 2024 में हुई जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में हुई धांधली और अनियमितता की जांच सीआईडी कर रही है. इस मामले की जांच में एक अहम खुलासा हुआ है. सीआईडी ने अपनी जांच और अदालत में पेश मेमो ऑफ एविडेंस में इस केस के प्रमुख अभियुक्त अभय तिवारी के भाई अक्षय तिवारी के खिलाफ कई चौंकाने वाले और गंभीर सबूत उजागर किए हैं. सीआईडी की पूछताछ और जांच में यह बात उजागर हुई कि अक्षय तिवारी ने सीजीएल-2023 के साथ-साथ 14वीं जेपीएससी पीटी भी अपने भाई अभय कुमार तिवारी के संगठित सेटिंग सिंडिकेट के जरिए ही पास की थी.
इसे भी पढ़ें: झारखंड की पूर्व मंत्री विमला प्रधान का निधन, रांची के अस्पताल में ली अंतिम सांस
अक्षय तिवारी का परीक्षा केंद्र 22 सितंबर 2024 को गिरिडीह में था. लेकिन परीक्षा से ठीक एक दिन पहले यानी 21 सितंबर 2024 वह अपने गांव से मधुपुर होते हुए बोकारो के दुग्धा स्थित बीसीसीएल कॉलोनी पहुंचा था. जांच में सामने आया कि इसी जगह पर अभ्यर्थियों को इकट्ठा करके लीक प्रश्न-पत्रों के उत्तर रटवाए जा रहे थे. अक्षय ने खुद स्वीकार किया कि वह 21 सितंबर को बोकारो के उस ठिकाने पर गया था जहां उत्तर मुहैया कराए जा रहे थे.
अक्षय तिवारी के मोबाइल सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्डिंग) और लोकेशन डेटा से उसकी इस संदिग्ध आवाजाही की पुष्टि की है. वह 21 सितंबर की देर रात बोकारो से गिरिडीह के लिए रवाना हुआ था जो इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि वह सीधे तौर पर प्रश्न-पत्र रटने के खेल में शामिल था. अक्षय तिवारी इस पूरे पेपर-लीक और धांधली गिरोह के मुख्य सरगना मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी का सगा भाई है.
सीआईडी ने कोर्ट में साबित किया है कि अक्षय महज कोई बेकसूर रिश्तेदार नहीं है बल्कि वह इस संगठित अपराध का सीधा लाभार्थी और सक्रिय भागीदार है. मुख्य आरोपी अभय तिवारी और अन्य सह-आरोपियों के बयानों तथा बयानों के मिलान से यह साफ हुआ कि अक्षय ने फर्जी तरीके से सरकारी नौकरी की मेरिट लिस्ट में जगह बनाई थी.


