Friday, September 18, 2026

हज़ारीबाग में पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के कब्जे वाली जमीन पर पांचवीं बार चला बुलडोज़र, सीओ से हुई तीखी बहस

रांची : झारखंड के हजारीबाग में 50 डिसमिल जमीन को लेकर एक बार फिर विवाद गरमा गया। सदर अंचल के हुडहुड़ु इलाके में कैंटोनमेंट मौजा की इस जमीन पर कार्रवाई करने पहुंची प्रशासनिक टीम और पूर्व मंत्री योगेंद्र साव आमने-सामने आ गए। अंचल अधिकारी और पूर्व मंत्री के बीच मौके पर तीखी बहस हुई। प्रशासन जमीन को खास महल की जमीन बताते हुए अतिक्रमण हटाने की बात कह रहा है, जबकि योगेंद्र साव ने कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

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मामला सदर अंचल के हुडहुड़ु क्षेत्र स्थित कैंटोनमेंट मौजा की होल्डिंग संख्या 302 का है। करीब 50 डिसमिल जमीन को लेकर वर्ष 2023 से विवाद चल रहा है। प्रशासन के मुताबिक यह जमीन खास महल की है और इस पर अवैध कब्जे की शिकायत है। इसी आधार पर शुक्रवार को सदर अंचल अधिकारी सह खास महल पदाधिकारी आशुतोष कुमार पुलिस और प्रशासनिक टीम के साथ मौके पर पहुंचे।

प्रशासनिक टीम ने जमीन पर कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू करने की कोशिश की। इसी दौरान पूर्व मंत्री योगेंद्र साव भी मौके पर पहुंच गए। इसके बाद दोनों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। मौके पर कुछ देर के लिए तनाव की स्थिति भी बनी रही। आरोप है कि बहस के दौरान योगेंद्र साव ने अंचल अधिकारी के साथ अपशब्दों का इस्तेमाल किया।

अंचल अधिकारी का कहना है कि जमीन खास महल की है और इसके रिन्यूअल से जुड़ा प्रस्ताव सरकार को भेजा जा चुका है। प्रशासन का दावा है कि जमीन पर कब्जा कर खटाल का निर्माण भी किया गया है। इसी कब्जे को हटाने के लिए कार्रवाई की जा रही थी।

वहीं, पूर्व मंत्री योगेंद्र साव ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि जमीन से जुड़े कागजात और प्रक्रिया अभी आगे बढ़ रही है। ऐसे में संबंधित प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार किए बिना कार्रवाई क्यों की जा रही है, इस पर उन्होंने सवाल उठाया। योगेंद्र साव ने झारखंड सरकार पर भी निशाना साधते हुए कार्रवाई को ‘अबुआ सरकार’ के कामकाज से जोड़कर सवाल किए।

फिलहाल इस 50 डिसमिल जमीन को लेकर प्रशासन और पूर्व मंत्री का पक्ष अलग-अलग है। प्रशासन जहां जमीन को खास महल की बताते हुए अवैध कब्जे की कार्रवाई कर रहा है, वहीं योगेंद्र साव जमीन से जुड़े दस्तावेज और प्रक्रिया पूरी होने तक इंतजार की बात कह रहे हैं। वर्ष 2023 से चला आ रहा यह विवाद शुक्रवार की कार्रवाई और मौके पर हुई तीखी बहस के बाद एक बार फिर चर्चा में है। अब देखना होगा कि जमीन से जुड़े दस्तावेज और सरकारी प्रक्रिया के आधार पर आगे क्या कार्रवाई होती है। फिलहाल जमीन के कब्जे और अधिकार को लेकर दोनों पक्ष अपने-अपने दावे पर कायम हैं।

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एयर नाऊ स्पेशल

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