Sunday, September 13, 2026

रांची विश्वविद्यालय में पासवा का भव्य ‘शिक्षक सम्मान समारोह’, शिक्षा, एआई, और रोजगार पर हुआ गंभीर मंथन

रांची: शिक्षक केवल एक छात्र का निर्माण नहीं करते, बल्कि वे उस नागरिक को गढ़ते हैं जो देश और राज्य की नीतियां तय करता है। कोई भी शिक्षण संस्थान केवल ईंट और पत्थर की इमारत से नहीं, बल्कि वहां के शिक्षकों और छात्रों की ऊर्जा से बनता है। ये बातें स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने रविवार को रांची विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट सभागार में आयोजित ‘शिक्षक सम्मान समारोह’ में कहीं।

पब्लिक स्कूल एंड चिल्ड्रेन एसोसिएशन (पासवा) के सहयोग से आयोजित इस भव्य समारोह में शिक्षा जगत में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में डीजी रेल अनिल पालटा, पासवा के मुख्य संरक्षक डॉ. रामेश्वर उरांव, रांची विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. अजीत सिंह और रिम्स के निदेशक डॉ. डी.के. सिंह बतौर विशिष्ट अतिथि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संयोजन आलोक दूबे ने किया।

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मुख्य अतिथि अजय कुमार सिंह ने अपनी सफलता का श्रेय शिक्षकों को देते हुए कहा कि गुरु-शिष्य की परंपरा अनादि काल से चली आ रही है। चाहे महर्षि वशिष्ठ हों, गुरु द्रोण हों, कबीर दास हों या फिर सर्वपल्ली राधाकृष्णन, गुरुओं ने हमेशा समाज का सर्वोच्च मार्गदर्शन किया है।

उन्होंने शिक्षा के बुनियादी ढांचे पर बात करते हुए कहा कि 1960-70 के दशक में दक्षिण भारत में मेडिकल और इंजीनियरिंग संस्थानों का बेहतरीन निर्माण हुआ, जिसकी वजह से आज वे राज्य विकास में अग्रणी हैं। झारखंड में भी संत जेवियर्स और बीआईटी मेसरा जैसे संस्थानों ने राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए लगातार काम कर रही है। आज राज्य के कुछ स्कूलों की तुलना दिल्ली के बेहतरीन स्कूलों से हो रही है। गांवों में बुनियादी चुनौतियां जरूर हैं, लेकिन सरकार ‘सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस’ के माध्यम से वहां भी उत्कृष्ट शिक्षा पहुंचा रही है। उन्होंने कहा कि समय के साथ हमें अपनी आदतें बदलनी होंगी और नई तकनीक को अपनाना होगा। उन्होंने दूरस्थ क्षेत्रों के छात्रों के लिए उत्कृष्ट शिक्षकों के लेक्चर ऑनलाइन अपलोड करने का सुझाव दिया।

तकनीकी प्रगति पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि हमें ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ को अपनाना चाहिए, लेकिन यह ध्यान रहे कि एआई केवल एक साधन है, यह शिक्षक या निर्णायक नहीं बन सकता। उन्होंने कहा कि आज सबसे बड़ी चुनौती ‘जेन-जी’ पीढ़ी की समस्याओं को समझना है। शिक्षकों को उनके साथ संवाद स्थापित कर उन्हें भटकने से बचाना चाहिए। साथ ही, शिक्षा को समाज और उद्योग से जोड़ने की जरूरत है, ताकि हमारे छात्र नौकरी मांगने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बन सकें।

समारोह में अतिथियों का स्वागत करते हुए पासवा के मुख्य संरक्षक डॉ. रामेश्वर उरांव ने कहा कि अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह के पास फाइनेंस और प्रशासन की जितनी गहरी समझ है, वैसी समझ पूरे झारखंड-बिहार के किसी आईएएस में नहीं है। वहीं, डीजी रेल अनिल पालटा की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि पालटा जी ने बिना एक भी गोली चलाए सैकड़ों नक्सलियों को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया था। डॉ. उरांव ने शिक्षकों की आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों को स्वीकार करते हुए घोषणा की कि पासवा अब शिक्षा के साथ-साथ छात्रों की स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता अभियान भी चलाएगा।

विशिष्ट अतिथि डीजी रेल अनिल पालटा ने अपने स्कूली दिनों को याद करते हुए शिक्षकों के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों द्वारा दी गई डांट-फटकार भी छात्र की भलाई के लिए ही होती है। युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि आज पढ़े-लिखे बेरोजगारों की एक बड़ी फौज खड़ी हो रही है। एक अनुमान के मुताबिक लगभग 40 प्रतिशत ग्रेजुएट आज बेरोजगार हैं। स्थिति यह है कि इंजीनियरिंग कॉलेजों से निकलने वाले छात्रों को सीधे नौकरी नहीं मिल रही है, उन्हें इंटर्नशिप का सहारा लेना पड़ रहा है।

उन्होंने छात्रों का मनोबल बढ़ाते हुए कहा कि परीक्षा में कम अंक आने पर हतोत्साहित नहीं होना चाहिए। आज कई नए क्षेत्र और विकल्प मौजूद हैं, जहां मेहनत के बल पर सफलता हासिल की जा सकती है। समारोह के दौरान विभिन्न स्कूलों से आए विद्यार्थियों ने मनमोहक सांस्कृतिक और रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए, जिसने उपस्थित दर्शकों का दिल जीत लिया। कार्यक्रम के अंत में विभिन्न विद्यालयों से आए करीब ढाई हजार शिक्षकों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए स्मृति चिह्न और शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।

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एयर नाऊ स्पेशल

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