रांची: झारंकड की राजधानी रांची स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय के छात्र भोजन की खराब गुणवत्ता व और बढ़े हुए मेस शुल्क को लेकर रविवार को धरने पर बैठ गए. स्नातक और स्नातकोत्तर के छात्र-छात्राएं विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर ही धरना पर बैठ गये हैं. इसमें दो छात्र मृत्युंजय और अंकित ने आंदोलन के समर्थन में भूख हड़ताल भी शुरू कर दी है. छात्राओं का कहना है कि शिकायतों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया गया, इसके बाद ही वह आंदोलन पर मजबूर हुए हैं.
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मेस का शुल्क बढ़ा
छात्रों का आरोप है कि मेस शुल्क 3300 से 3800 रुपये प्रतिमाह किए जाने के बावजूद भी भोजन की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ. छात्रों का कहना है कि शुल्क बढ़ने के बाद भी उन्हें निर्धारित तीन समय के बजाय केवल दो बार ही भोजन दिया जा रहा है. इधर इस मामले के संबंध में डीएसडब्ल्यू डॉ. अनुराग लिंडा का कहना है कि मेस शुल्क में वृद्धि यूजी/पीजी कैंटीन कमेटी की सहमति से की गयी है और यह केवल तात्कालिक व्यवस्था के रूप में है.
स्वच्छता व्यवस्था पर भी सवाल
इधर आंदोलनरत छात्राओं ने मेस में साफ-सफाई व भोजन की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाये. उन्होंने आरोप लगाया कि भोजन तैयार करने में गुणवत्तापूर्ण सामग्री का पर्याप्त इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है. नियमित शिकायतों के बावजूद मेस व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ. इस संबंध में सात सूत्री मांग पत्र भी सौंपा गया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. इसमें पेशेवर कुक की रोटेशन व्यवस्था लागू करने, अलग-अलग हॉस्टल के अनुसार मेन्यू में बदलाव करने, गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री का इस्तेमाल सुनिश्चित करने और विद्यार्थियों से अग्रिम मेस शुल्क नहीं लेने जैसी मांगें शामिल हैं.
हॉस्टल से निकालने की धमकी
इधर आंदोलनरत छात्रों ने विश्वविध्यालय प्रशासन पर कुछ छात्रों को हॉस्टल से निकालने की धमकी देने का भी आरोप लगाया है. छात्रों ने वार्डन पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने वाले विद्यार्थियों के खिलाफ व्यक्तिगत कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए. छात्रों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक धरना और भूख हड़ताल जारी रहेगी. आंदोलनरत छात्रों ने मेस शुल्क कम करने के साथ भोजन की गुणवत्ता में सुधार की मांग की है. इसके अलावा मेस व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए टोकन सिस्टम लागू किये जाने भी मांग की है.

