Desk : झारखंड में JPSC-JSSC को लेकर छात्रों का विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है. रांची से लेकर गिरिडीह, गढ़वा और हजारीबाग तक छात्र मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पुतले फूंकने की कोशिश कर रहे हैं और कई जगह पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की तस्वीरें सामने आई हैं. अब हजारीबाग की घटना को लेकर पुलिस ने FIR की तैयारी शुरू कर दी है.पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान पत्थरबाजी हुई, जिसमें कुछ पुलिसकर्मी और पुलिस अधिकारी घायल हुए.वहीं बीजेपी का आरोप है कि छात्रों के साथ बर्बरता की गई और झामुमो कार्यकर्ताओं ने उनके साथ मारपीट की.
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क्या है पूरा मामला?
मामला शुक्रवार यानी 21 अगस्त का है. हजारीबाग के गांधी मैदान में JPSC-JSSC सुधार मंच से जुड़े छात्र और दूसरे प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला जलाने पहुंचे थे. लेकिन पुलिस और झामुमो कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में हालात बिगड़ गए.देखते ही देखते छात्र, पुलिस और झामुमो कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए.धक्का-मुक्की और मारपीट की स्थिति बनी और पुलिस को प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा.
पुलिस करेगी कार्रवाई?
अब इस पूरे मामले में पुलिस ने कार्रवाई का मन बना लिया है. हजारीबाग के एसपी अमन कुमार ने बताया है कि घटना में शामिल लोगों को चिन्हित किया जा रहा है और उनके खिलाफ FIR दर्ज की जाएगी. पुलिस वीडियो फुटेज और मौके पर मौजूद लोगों से मिली जानकारी के आधार पर यह पता लगाने में जुटी है कि प्रदर्शन के दौरान कौन लोग शामिल थे और किसने पूरे कार्यक्रम का नेतृत्व किया.
लेकिन कहानी का दूसरा पक्ष भी है. पुलिस का कहना है कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हल्का बल प्रयोग किया गया। एसपी के मुताबिक, पुलिस स्थिति संभालने की कोशिश कर रही थी, तभी प्रदर्शनकारियों की तरफ से पुलिस पर पत्थरबाजी की गई. पुलिस का दावा है कि इस पत्थरबाजी में कुछ पुलिसकर्मी और अधिकारी घायल हुए हैं.इसी आधार पर अब प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी हो रही है.
यानी एक तरफ पुलिस कह रही है कि प्रदर्शनकारियों ने कानून-व्यवस्था बिगाड़ी और पुलिस पर पत्थर फेंके, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी का आरोप है कि छात्रों को निशाना बनाया गया.
बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र राय हजारीबाग पहुंचे और उन्होंने इस घटना को लेकर सरकार पर हमला बोला.उनका आरोप है कि आंदोलन कर रहे छात्रों के साथ पुलिस ने बर्बरता की और झामुमो कार्यकर्ताओं ने छात्रों के साथ मारपीट की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का अधिकार है.
रविंद्र राय ने आरोप लगाया कि झामुमो कार्यकर्ताओं ने सुनियोजित तरीके से छात्रों पर हमला किया और पुलिस ने उनका संरक्षण किया.उन्होंने सरकार पर तानाशाही तरीके से काम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि छात्रों के आंदोलन में बीजेपी उनके साथ खड़ी है.
हजारीबाग के बीजेपी सांसद मनीष जायसवाल ने भी इस घटना पर सवाल उठाए हैं.उन्होंने झामुमो कार्यकर्ताओं द्वारा छात्रों के साथ कथित दुर्व्यवहार और मारपीट को दुखद बताया.उनका कहना है कि लोकतंत्र में इस तरह की घटना जायज नहीं है और बीजेपी इसका विरोध करती है.
“JPSC-JSSC विवाद की जांच CBI से हो”
मनीष जायसवाल ने JPSC-JSSC विवाद की जांच CBI से कराने की मांग भी दोहराई.उनका कहना है
जब तक मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होगी, तब तक छात्रों को न्याय मिलने की उम्मीद कम है. बीजेपी लगातार आरोप लगा रही है कि सरकार ने छात्रों को सिर्फ आश्वासन दिए हैं और उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया.
इस पूरे विवाद की जड़ JSSC CGL भर्ती परीक्षा और उससे जुड़ी अनियमितताओं का मामला है. सरकार ने भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए भर्ती रद्द करने का फैसला लिया था. इसके बाद जिन अभ्यर्थियों का चयन हो चुका था और जिन्हें नियुक्ति भी मिल गई थी, उनकी नौकरी पर भी संकट खड़ा हो गया.मामला हाईकोर्ट पहुंचा और अदालत की ओर से सरकार के फैसले पर रोक लगाए जाने के बाद छात्रों का गुस्सा और बढ़ गया.
यही वजह है कि अब छात्र सड़क पर उतरकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं.पुतला दहन इसी विरोध का हिस्सा है.लेकिन कई जिलों में प्रदर्शन रोकने के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच टकराव हो गया.
इन जिलों में पुतला दहन में हुआ था लाठीचार्ज
हजारीबाग के अलावा गिरिडीह और गढ़वा में भी छात्रों और प्रशासन के बीच तनाव की स्थिति देखने को मिली. रांची में भी पुतला दहन को लेकर छात्रों और पुलिस के बीच टकराव हुआ. कई जगह पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को दौड़ाया और पुतला अपने कब्जे में ले लिया. कुछ जगह लाठीचार्ज की तस्वीरें भी सामने आईं.
अब हजारीबाग में FIR की तैयारी के बाद मामला और गंभीर हो सकता है.पुलिस वीडियो फुटेज के आधार पर प्रदर्शन में शामिल लोगों की पहचान कर रही है. दूसरी तरफ बीजेपी इसे छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश बता रही है और CBI जांच की मांग कर रही है.
मतलब साफ है, JPSC-JSSC का विवाद अब सिर्फ परीक्षा और भर्ती तक सीमित नहीं रह गया है.मामला सड़क पर है, पुलिस और छात्रों के बीच टकराव तक पहुंच चुका है और अब राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है.सवाल यही है कि छात्रों की मांगों का समाधान बातचीत से निकलेगा या आने वाले दिनों में झारखंड की सड़कों पर आंदोलन और ज्यादा बड़ा होगा?
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