राँची: झारखंड में JPSC-JSSC की भर्ती परीक्षाओं को लेकर एक बार फिर सरकार पर सवाल उठ रहे हैं। इस बार सवाल उठाए हैं छात्र नेता देवेंद्रनाथ महतो ने उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि सरकार ने 17 अगस्त को 22 परीक्षाओं को रद्द किया और 23 परीक्षाओं की जांच के आदेश दिए। लेकिन अब सवाल ये है कि जब इन मामलों में CID की जांच रिपोर्ट सरकार के पास थी, तो हाईकोर्ट में सरकार ने इस रिपोर्ट को मजबूती से क्यों नहीं रखा?
Highlights:
भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी के मामले को कोर्ट तक पहुचना
देवेंद्रनाथ महतो का कहना है कि JPSC, FSO, CDPO और JSSC CGL समेत कई भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी के मामले कोर्ट तक पहुंचे हैं। छात्रों को उम्मीद थी कि सरकार कार्रवाई करेगी, दोषियों पर शिकंजा कसेगा और भर्ती व्यवस्था में सुधार होगा। लेकिन हाईकोर्ट में सरकार के पक्ष को लेकर अब छात्र सवाल खड़े कर रहे हैं। हालांकि देवेंद्रनाथ महतो ने ये भी साफ किया कि उनका आंदोलन किसी निर्दोष छात्र की नौकरी छीनने के लिए नहीं है।
भर्ती व्यवस्था को लेकर जनजागरण अभियान
उनका कहना है कि जिन अभ्यर्थियों का चयन हुआ है और जो निर्दोष हैं, सरकार उनके भविष्य की जिम्मेदारी ले। देवेंद्रनाथ महतो के मुताबिक भर्ती सुधार को लेकर आंदोलन 2 जुलाई से शुरू हुआ था। 5 जुलाई से आंदोलन, 25 जुलाई से सत्याग्रह और 2 अगस्त से भूख हड़ताल की गई। अब आंदोलन का अगला चरण ‘भर्ती सुधार यात्रा’ होगा। 24 अगस्त से शिबू सोरेन के पैतृक गांव नेमरा से इस यात्रा की शुरुआत की जाएगी। इसके जरिए अलग-अलग जिलों में छात्रों, शिक्षकों, प्रोफेसरों और आम लोगों के बीच भर्ती व्यवस्था को लेकर जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। साथ ही सरकार को चेतावनी भी दी गई है।
देवेंद्रनाथ महतो ने कहा जरूरत पड़ने पर अनिश्चितकालीन आंदोलन
देवेंद्रनाथ महतो ने कहा कि अगर सरकार ने आगामी कोर्ट की सुनवाई में अपना पक्ष मजबूती से नहीं रखा, तो आंदोलन और बड़ा होगा। मुख्यमंत्री आवास घेराव, चक्का जाम और जरूरत पड़ने पर अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी दी गई है। यानी छात्रों का सवाल सिर्फ परीक्षा रद्द होने तक सीमित नहीं है। सवाल ये है कि झारखंड में ऐसी भर्ती व्यवस्था कब बनेगी, जहां पेपर लीक, धांधली और भ्रष्टाचार की गुंजाइश ही न रहे।

