Saturday, September 12, 2026

डब्ल्यूएचओ की चेतावनी, ‘इबोला साबित हो सकता है बेहद घातक’

हेल्थ डेस्क : विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक टेड्रोस गेब्रियेसस ने चेतावनी दी है कि अगर डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में फैला इबोला का मौजूदा प्रकोप अगर इसी रफ्तार से बढ़ता रहा, तो यह अब तक का सबसे घातक इबोला प्रकोप बन सकता है. टेड्रोस ने पत्रकारों से कहा कि 2026 का यह प्रकोप मौजूदा रफ्तार पर 2014-2016 के इबोला प्रकोप को भी पीछे छोड़ सकता है. उस दौरान कम से कम 11 हज़ार लोगों की मौत हुई थी.

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इस साल के इबोला प्रकोप की आधिकारिक घोषणा 15 मई को की गई थी. अब तक कम से कम 4,300 मामले सामने आ चुके हैं और 2,000 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. डब्ल्यूएचओ ने बुधवार को कहा कि वह अगले तीन महीनों में वायरस के फैलाव को काबू में करने की कोशिश कर रहा है. हालांकि, डब्ल्यूएचओ ने साफ किया कि इसका मतलब तीन महीने में बीमारी को पूरी तरह खत्म करना नहीं है. लक्ष्य फिलहाल संक्रमण को फैलने से रोकना और उसकी रफ्तार कम करना है.

स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, इबोला का यह प्रकोप मई में आधिकारिक तौर पर घोषित होने से कम से कम तीन महीने पहले ही शुरू हो गया था. डब्ल्यूएचओ अफ्रीका के निदेशक डॉ. मोहम्मद जनाबी ने बुनिया शहर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, “हम वायरस का पीछा कर रहे हैं, लेकिन वायरस हमसे आगे है.”

उन्होंने बताया कि रिसर्च से पता चला है कि वायरस फरवरी से ही फैलना शुरू हो गया था. शुरुआत में कई मरीजों में इबोला की पहचान नहीं हो पाई और उनके लक्षणों को मलेरिया या टाइफाइड समझ लिया गया.

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