रांची: झारखंड में प्रशासनिक फेरबदल और आगामी चुनावी तैयारियों को दुरुस्त करने की दिशा में हेमंत सोरेन सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य के मंत्रिमंडल (निर्वाचन) विभाग ने एक साथ 15 बड़े प्रशासनिक अधिकारियों के तबादले और नई पोस्टिंग का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। 23 जून 2026 को जारी इस अधिसूचना के बाद पूरे राज्य के प्रशासनिक गलियारे में हलचल तेज हो गई है। स्थापना समिति की हाई-लेवल सिफारिशों के आधार पर इन सभी अधिकारियों को राज्य के अलग-अलग जिलों में उप निर्वाचन पदाधिकारी के महत्वपूर्ण पद पर तैनात किया गया है।
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चुनावी मोड में सरकार: विभिन्न विभागों से निर्वाचन कार्य में लगाए गए अफसर
इस फेरबदल की सबसे खास बात यह है कि जिन अधिकारियों को निर्वाचन जैसे संवेदनशील कार्य की जिम्मेदारी सौंपी गई है, वे अब तक परिवहन, नगर निगम, जनसंपर्क और पंचायत राज जैसे पब्लिक-डील वाले विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे थे। सरकार ने जिलों में खाली पड़े पदों को भरने और प्रशासनिक मशीनरी को मुस्तैद करने के लिए यह मास्टरस्ट्रोक खेला है।
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जिलावार तैनात किए गए अधिकारियों की पूरी सूची:
| अधिकारी का नाम | नया जिला (उप निर्वाचन पदाधिकारी के रूप में) |
| ललन कुमार | खूंटी |
| मोहम्मद मोइज्ज अंसारी | पाकुड़ (पलामू से स्थानांतरित) |
| प्रशांत कुमार नायक | गोड्डा |
| लक्ष्मी नारायण किशोर | दुमका |
| विजय कुमार सोनी | कोडरमा |
| सौरभ बाला | देवघर |
| पायल राज | गिरिडीह |
| संजय कुमार | लोहरदगा |
| पायल सिंह | सरायकेला-खरसावां |
| गुंजन कुमारी सिन्हा | गुमला |
| कामिनी दूबे | साहिबगंज |
| मो. कयूम अंसारी | जामताड़ा |
| रविंद्र कुमार | चतरा |
| कुमुद कुमार झा | गढ़वा |
| वैदेही कुमारी | हजारीबाग |
दो अधिकारियों की मूल विभाग में सेवा वापसी
इस बड़े फेरबदल के बीच निर्वाचन विभाग ने दो अधिकारियों की सेवाएं वापस मूल विभाग को सौंप दी हैं। अधिसूचना के अनुसार, मनीषा पाल और विपिन कुमार दुबे को निर्वाचन कार्यों से मुक्त करते हुए उनकी सेवाएं कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग, झारखंड सरकार को वापस कर दी गई हैं।
तत्काल योगदान का निर्देश
निर्वाचन विभाग ने आदेश जारी करते हुए सभी 15 नवनियुक्त उप निर्वाचन पदाधिकारियों को बिना किसी देरी के तत्काल प्रभाव से अपने-अपने आवंटित जिलों में योगदान करने का निर्देश दिया है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी तादाद में सिर्फ निर्वाचन पदाधिकारियों के तबादले करना इस बात का साफ संकेत है कि राज्य सरकार जमीनी स्तर पर चुनावी मशीनरी और प्रशासनिक व्यवस्था को पूरी तरह चुस्त-दुरुस्त कर लेना चाहती है ताकि आने वाले समय में किसी भी चुनावी प्रक्रिया को निष्पक्ष और सुचारू रूप से संपन्न कराया जा सके।
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