न्यूज डेस्क: अमेरिकी विदेश मंत्री रूबियो और भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार को नई दिल्ली में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। बैठक और प्रेस कॉन्फ्रेंस में विदेश सचिव विक्रम मिस्री, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रणनीतिक सहयोग, रक्षा साझेदारी, व्यापार और इमिग्रेशन सुधारों पर विस्तार से चर्चा की।
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भारत दुनिया में अमेरिका का रणनीतिक साझेदार
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका का रिश्ता अब पारंपरिक कूटनीति से काफी आगे बढ़ चुका है। उन्होंने कहा कि रणनीतिक साझेदारी का मतलब सिर्फ सहयोग नहीं होता, बल्कि ऐसे रिश्ते होते हैं जहां दोनों देशों के हित एक-दूसरे से जुड़े हों और वे मिलकर समस्याओं का समाधान करें। रूबियो ने भारत को अमेरिका का सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारों में से एक बताते हुए कहा कि रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और आतंकवाद-रोधी प्रयासों जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के साझा हित लगातार मजबूत हो रहे हैं।
यह प्रेस कॉन्फ्रेंस मार्को रूबियो के चार दिवसीय भारत दौरे के दौरान हुई। इससे एक दिन पहले उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की थी। रूबियो ने भारत यात्रा के अपने पहले दिन को शानदार बताया और कहा कि दोनों देश केवल सहयोगी नहीं, बल्कि साझा हितों वाले रणनीतिक साझेदार हैं।
वीजा और इमिग्रेशन सुधारों पर अमेरिका का बयान
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान J1, F1 और H-1B वीजा नीतियों में हाल के बदलावों को लेकर सवाल पूछे गए। इस पर रूबियो ने कहा कि अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम में किए जा रहे बदलाव सिर्फ भारत के लिए नहीं हैं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए लागू किए जा रहे हैं। उन्होंने भारतीयों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय कंपनियों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 20 बिलियन डॉलर से अधिक का निवेश किया है और अमेरिका चाहता है कि यह सहयोग आगे भी बढ़े। रूबियो ने कहा कि अमेरिका इस समय अपने इमिग्रेशन सिस्टम के आधुनिकीकरण के दौर से गुजर रहा है और पिछले कुछ वर्षों में अवैध प्रवासियों की बढ़ती संख्या के कारण सुधार जरूरी हो गए हैं।
भारतीय-अमेरिकियों पर नस्लभेदी टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया
भारतीय-अमेरिकियों के खिलाफ ऑनलाइन और अन्य जगहों पर हो रही नस्लभेदी टिप्पणियों के बारे में पूछे जाने पर रूबियो ने कहा कि ऐसी टिप्पणियों को गंभीरता से लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि दुनिया के हर देश में कुछ लोग गैर-जिम्मेदाराना और बेवकूफी भरी टिप्पणियां करते हैं। अमेरिका एक मेहमाननवाज देश है और दुनिया भर से आए लोगों ने हमारे देश को मजबूत बनाया है। रूबियो ने यह भी बताया कि उनके माता-पिता वर्ष 1956 में क्यूबा से अमेरिका आए थे और प्रवासियों ने अमेरिकी समाज को समृद्ध बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है।
रक्षा साझेदारी को और मजबूत करने पर जोर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत और अमेरिका ने हाल ही में अपने 10 वर्षीय प्रमुख रक्षा साझेदारी फ्रेमवर्क समझौते को रिन्यू किया है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों ने ‘अंडरवाटर डोमेन अवेयरनेस’ रोडमैप पर भी हस्ताक्षर किए हैं। जयशंकर ने कहा कि रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाते समय मेक इन इंडिया और हाल के संघर्षों से मिले अनुभवों को ध्यान में रखा जाएगा।
व्यापार समझौते पर भी तेजी से काम
व्यापार वार्ताओं को लेकर जयशंकर ने कहा कि दोनों देश जल्द से जल्द एक अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह समझौता भविष्य में व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते का आधार बन सकता है। इस योजना पर पहली बार फरवरी 2025 में प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान चर्चा हुई थी।
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