नई दिल्ली : पश्चिम बंगाल में शनिवार को 15 मतदान केंद्रों पर चुनाव आयोग के निर्देश पर दोबारा वोटिंग हो रही है तो वहीं दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट में भी आज टीएमसी की एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई भी होने वाली है। 4 मई को होने वाले मतगणना के पहले टीएमसी ने चुनाव आयोग के एक फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाय़ा है। टीएमसी ने अपनी याचिका में चुनाव आयोग के उस फैसले पर रोक लगाने की मांग की है, जिसमें मतगणना पर्यवेक्षकों के तौर पर सिर्फ केंद्रीय कर्मचारी या PSU स्टाफ रखने की बात कही गई है।
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कोलकाता हाईकोर्ट में याचिका ख़ारिज
टीएमसी शुक्रवार को कोलकाता हाई कोर्ट ने याचिका खारिज होने के बाद ही सुप्रीम कोर्ट पहुंची है। इससे पहले शुक्रवार को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दिया था कि चुनाव आयोग के फैसले में कोई गैरकानूनी बात नहीं है। इसके बाद टीएमसी ने सुप्रीम कोर्ट में तुरंत सुनवाई की मांग की है, क्योंकि 4 मई को वोटों की गिनती होनी है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने शनिवार को इस मामले की तत्काल सुनवाई के निर्देश दिए। याचिका पर न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ के समक्ष सुनवाई होगी।
चुनाव आयोग को अधिकार : हाईकोर्ट
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कि चुनाव आयोग द्वारा राज्य सरकार के कर्मचारियों के बजाय केंद्र सरकार या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के कर्मचारियों में से मतगणना पर्यवेक्षकों और सहायकों की नियुक्ति करने के निर्णय में कोई अवैधता नहीं थी। अदालत ने कहा कि मतगणना पर्यवेक्षक और मतगणना सहायक की नियुक्ति राज्य सरकार या केंद्र सरकार से करने का अधिकार चुनाव आयोग के कार्यालय को है।
क्या है मामला
बता दें कि टीएमसी ने पश्चिम बंगाल के अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा 30 अप्रैल को जारी एक पत्र को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें कहा गया था कि प्रत्येक मतगणना केंद्र पर कम से कम एक मतगणना पर्यवेक्षक या सहायक केंद्रीय सरकार या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम का कर्मचारी होना चाहिए। टीएमसी की ओर से वकील कल्याण बनर्जी ने तर्क दिया कि यह पत्र अधिकार क्षेत्र से बाहर जारी किया गया था और मात्र आशंका पर आधारित था।


