Thursday, July 23, 2026

एयर नाउ की खबर का असर, कार्यपालक अभियंता रघुनंदन उरांव के खिलाफ हुई कार्रवाई

रांची : पिछले दिनों लोहरदगा कोर्ट की ओर से धोखाधड़ी मामले में जेल की सजा होने के बाद और इस संबंध में एयर नाउ में खबर प्रकाशित होने के बाद अब कार्यपालक अभियंता रघुनंदन उरांव के खिलाफ कार्रवाई हुई है। द छोटानागुर प्रमंडल में पदस्थापित रघुनंदन उरांव से झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने स्पष्टीकरण जारी कर जबाब तबल किया है। एयर नाउ के पास उपलब्ध इस विभागीय चिट्ठी के मुताबिक विभाग के प्रशाखा पदाधिकारी एस डी तिग्गा के हस्ताक्षर से जारी पत्र मेंं एक सप्ताह के अंदर जबाब मांगा गया है।

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सजा की नहीं दी जानकारी 

एयर नाउ ने अपनी प्रकाशित खबर में बताया था कि करीब 300 करोड़ रुपये की सरकारी योजनाओं की निगरानी और विभागीय जिम्मेदारी संभालने वाले रघुनंदन उरांव को लोहरदगा कोर्ट ने धोखाधड़ी के मामले में N.I. Act की धारा 138 के तहत चेक बाउंस और वित्तीय हेराफेरी का दोषी पाया था, जिसके बाद कोर्ट ने रघुनंदन उरांव को 6 महीने की जेल और 3.50 लाख रुपये का जुर्माना भरने की सजा सुनाई थी। लेकिन सजा मिलने के बाद भी उन्होंने इसकी जानकारी विभाग को नहीं दी और अपने पद पर बने रहे, लेकिन अब विभाग ने स्पष्टीकरण जारी कर सात दिनों में जबाब मांगा है।

विभाग ने माना जानबूझकर छुपाई जानकारी

विभाग की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि संबंधित मामला जो आपके विरुद्ध माननीय न्यायालय में दायर किया गया था तथा उक्त मामले की सुनवाई के फलाफल से पारित अंतिम न्यायादेश की सूचना भी कार्यालय को उपलब्ध नहीं कराया गया। इससे यह प्रतीत होता है कि संपूर्ण मामले को आपके द्वारा जानबूझ कर छुपाया गया। अतः अनुरोध है कि इस मामले में आप अपना स्पष्टीकरण साक्ष्य सहित एक सप्ताह के अन्दर समर्पित करना सुनिश्चित करेंगे।

‘सामाजिक-आर्थिक अपराध’ की श्रेणी

बता दें कि वित्तीय गड़बड़ी का यह मामला निजी लेन-देन में धोखाधड़ी और जानबूझकर बाउंस चेक देने का था, जिसे कोर्ट ने ‘सामाजिक-आर्थिक अपराध’ की श्रेणी में माना था। ऐसे में सरकारी नियमों के मुताबिक, किसी भी सरकारी कर्मचारी को जेल की सजा होने या गंभीर आपराधिक मामले में दोषी पाए जाने पर विभागीय कार्रवाई और निलंबन की प्रक्रिया शुरू होती है। लेकिन रघुनंदन उरांव के मामले में ऐसा कई दिनों तक नहीं हुआ। पिछले दिनों इस संबंध में एयर नाउ में खबर प्रकाशित होने के बाद अब जाकर विभाग ने इस दिशा में कार्रवाई की है, लेकिन वह भी केवल स्पष्टीकरण मांगे जाने की।

विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल

ऐसे में बड़ा सवाल विभाग की कार्यशैली को लेकर भी है कि कैसे एक अधिकारी जिसे अदालत ‘दोषी’ मानते हुए सजा सुना चुकी है, वह 5 सहायक अभियंताओं और 25 कनीय अभियंताओं का नेतृत्व कैसे कर रहा है? 300 करोड़ के भारी-भरकम बजट वाली योजनाओं की जिम्मेदारी ऐसे व्यक्ति के हाथों में कैसे है। कैसे विभाग को इस बात की खबर कई दिनों तक नहीं चल सकी, या जानबूझकर रघुनंदन उरांव को कोई संरक्षण मिला। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह कि अगर एक सजायाफ्ता अधिकारी जनता के करोड़ों रुपयों का हिसाब रखेगा, तो पारदर्शिता की उम्मीद कैसे की जा सकती है?

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