पटना: बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। सम्राट चौधरी बिहार के नए सीएम होंगे. मंगलवार शाम पटना में हुई NDA विधायकों की बैठक के बाद इसकी औपचारिक घोषणा की गई। करीब दो दशकों तक मुख्यमंत्री पद संभालने वाले नीतीश कुमार के बाद अब सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार में नई सरकार बनने का रास्ता साफ हो गया है।
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15 अप्रैल, बुधवार को सीएम के रूप में सम्राट चौधरी लोकभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में पद एवं गोपनीयता की शपथ लेंगे। राज्यपाल सैयद अता हसनैन उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे. राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यह बीजेपी के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है, क्योंकि लंबे समय बाद पार्टी बिहार में मुख्यमंत्री पद पर काबिज होने जा रही है। बदलते राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच सम्राट चौधरी एक अहम चेहरा बनकर उभरे हैं।
सम्राट चौधरी का बयान
भाजपा विधायक दल का नेता चुने जाने पर सम्राट चौधरी ने कहा कि उन्हें पार्टी ने काम करने का बड़ा अवसर दिया है और वे पिछले करीब 30 साल से राजनीति में सक्रिय हैं। उन्होंने बताया कि पीएम मोदी के विचारों से प्रेरित होकर वे भाजपा से जुड़े और 2015 से लगातार पार्टी के लिए काम कर रहें हैं। उन्हें संगठन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां जैसे प्रदेश पदाधिकारी, विधान परिषद में नेता और प्रदेश अध्यक्ष के रूप में काम करने का मौका मिला।
उन्होंने भरोसा जताया कि भाजपा की विचारधारा देश पहले, सबसे श्रेष्ठ को आगे बढ़ाते हुए वे लगातार काम करेंगे। साथ ही उन्होंने नीतीश कुमार का जिक्र करते हुए कहा कि उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला है और उनके समृद्ध बिहार के सपने को आगे बढ़ाने के लिए वे सभी मिलकर काम
राजनीतिक विरासत से मजबूत शुरुआत
सम्राट चौधरी को राजनीति विरासत में मिली है। उनके पिता शकुनि चौधरी राज्य के कद्दावर नेताओं में गिने जाते थे। उन्होंने 1990 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा और 1999 में मात्र 31 साल की उम्र में कृषि मंत्री बनकर अपनी पहचान बनाई। सम्राट चौधरी ने परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से कई बार जीत दर्ज की और राज्य की राजनीति में मजबूत पकड़ बनाई। 2010 में वे विधानसभा में विपक्ष के मुख्य सचेतक बने और 2014 में शहरी विकास एवं आवास मंत्री की जिम्मेदारी संभाली। उनके राजनीतिक अनुभव ने उन्हें लगातार मजबूत किया।
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2017 में भाजपा में हुए शामिल
राजद और जदयू में रहने के बाद भाजपा में शामिल होना उनके करियर का बड़ा मोड़ साबित हुआ। 2018 में बीजेपी ने उन्हें बिहार का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया। बाद में वे विधान परिषद में विपक्ष के नेता भी रहे। मार्च 2023 में उन्हें बिहार बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया, जिससे उनके नेतृत्व पर पार्टी का भरोसा साफ झलकता है। जनवरी 2024 में सम्राट चौधरी को बिहार का उपमुख्यमंत्री बनाया गया। इसके बाद नवंबर 2025 में उन्होंने दोबारा डिप्टी सीएम पद की शपथ ली। अब वे मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने जा रहे हैं, जो उनके राजनीतिक करियर का बड़ा मुकाम है।
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चर्चा में रही पगड़ी की प्रतिज्ञा रही
भाजपा में आने के बाद शुरुआती दौर में उन्होंने नीतीश कुमार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया था। उन्होंने संकल्प लिया था कि जब तक नीतीश कुमार सत्ता से बाहर नहीं होंगे, वे अपनी पगड़ी (मुरैठा) नहीं खोलेंगे। हालांकि, बाद में बदले राजनीतिक समीकरणों में वे उसी सरकार में डिप्टी सीएम भी रहे। अब बिहार में नई सरकार के गठन के साथ विकास और राजनीतिक दिशा को लेकर नई उम्मीदें जगी हैं। 15 अप्रैल को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह के बाद राज्य की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत मानी जा रही है।


