दिसपुर: असम विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी के भीतर असंतोष के स्वर तेज होने लगे हैं। टिकट वितरण के बाद कई नेताओं और मौजूदा विधायकों की नाराजगी सामने आई है, जिससे पार्टी के लिए चुनावी चुनौती बढ़ सकती है।
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टिकट नहीं मिलने पर नेताओं की नाराजगी
पार्टी टिकट से वंचित कई विधायक और दावेदार खुले तौर पर नाराजगी जता रहे हैं। कुछ नेताओं ने निर्दलीय चुनाव लड़ने की चेतावनी भी दी है, जिससे पार्टी के भीतर बगावत की स्थिति बनती दिख रही है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया खुद आगे आए हैं। दोनों नेता नाराज नेताओं से बातचीत कर उन्हें मनाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि चुनाव से पहले पार्टी एकजुट बनी रहे।
हाल ही में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रद्युत बोरदोलोई और भूपेन बोरा बीजेपी में शामिल हुए। इसके बाद बोरदोलोई को दिसपुर और बोरा को बिहपुरिया सीट से टिकट दिए जाने से पुराने दावेदारों में नाराजगी बढ़ गई है। दिसपुर सीट पर विवाद सबसे अधिक देखने को मिला है। यहां वरिष्ठ नेता जयंत दास को टिकट मिलने की संभावना थी, लेकिन अंतिम समय में प्रद्युत बोरदोलोई को उम्मीदवार बनाए जाने से कार्यकर्ताओं और नेताओं में असंतोष बढ़ गया।
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सीएम का बयान: पार्टी के लिए काम करें
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि पार्टी की क्षमता 160 सीटें जीतने की है। उन्होंने यह भी कहा कि टिकट कटना अंतिम नहीं होता, कई बार इससे बड़ी जिम्मेदारी मिल जाती है। सभी नेताओं को पार्टी के लिए मिलकर काम करना चाहिए। पार्टी नेतृत्व लगातार नाराज नेताओं से संवाद कर रहा है, ताकि किसी भी तरह की बगावत को रोका जा सके। बीजेपी के लिए यह जरूरी है कि चुनाव से पहले अंदरूनी मतभेद खत्म कर एकजुटता बनाए रखी जाए। असम चुनाव से पहले बीजेपी के भीतर बढ़ती नाराजगी पार्टी के लिए चिंता का विषय बन गई है। अब देखना होगा कि नेतृत्व इन असंतोषों को कितनी जल्दी और प्रभावी तरीके से शांत कर पाता है।



