Saturday, October 31, 2026

बच्चों के लापता होने के मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र से मांगा जवाब

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने देश के विभिन्न हिस्सों से बच्चों के गायब होने की बढ़ती घटनाओं पर गंभीर रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने केंद्र सरकार को यह जांचने का निर्देश दिया है कि क्या इन वारदातों के पीछे कोई संगठित राष्ट्रीय गिरोह या विशेष क्षेत्रीय समूह सक्रिय है। अदालत का मानना है कि यह समझना अनिवार्य है कि क्या ये अपहरण किसी सोची-समझी साजिश का हिस्सा हैं या केवल छिटपुट घटनाएं हैं।

राज्यों को मिली चेतावनी

सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि लगभग एक दर्जन राज्यों ने अभी तक लापता बच्चों से संबंधित आंकड़े उपलब्ध नहीं कराए हैं। इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि बिना पूर्ण डाटा के सटीक विश्लेषण संभव नहीं है। कोर्ट ने उन राज्यों की आलोचना की जिन्होंने जानकारी साझा करने में देरी की है और चेतावनी दी कि सहयोग न मिलने की स्थिति में सख्त कानूनी आदेश पारित किए जा सकते हैं।

डाटा की समीक्षा करे केंद्र

यह मामला ‘गुड़िया स्वयं सेवी संस्थान’ नामक एनजीओ की याचिका पर आधारित है, जिसने बच्चों की सुरक्षा में भारी चूक का मुद्दा उठाया है। अदालत ने सुझाव दिया कि जो बच्चे सुरक्षित बचाए गए हैं, उनसे सीधे संवाद किया जाना चाहिए ताकि उनके अनुभवों के आधार पर अपराधियों तक पहुँचा जा सके। केंद्र को अब सभी राज्यों से डाटा संकलित कर उसकी गहराई से समीक्षा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

एयर नाऊ स्पेशल

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