Monday, September 14, 2026

बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव ने दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद तिहाड़ जेल में किया सरेंडर

नई दिल्ली : बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव ने गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण कर दिया है. दिल्ली हाई कोर्ट ने चेक बाउंस मामलों में हुई सज़ा के सिलसिले में अभिनेता को तत्काल आत्मसमर्पण करने को कहा था.

अदालत ने यह भी साफ़ किया कि अभिनेता के पेशे या फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े होने के आधार पर उन्हें कोई ख़ास रियायत नहीं दी जा सकती. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ राजपाल यादव ने गुरुवार शाम करीब चार बजे जेल अधीक्षक के समक्ष आत्मसमर्पण किया. जेल प्रशासन के मुताबिक़,आगे की प्रक्रिया जेल मैन्युअल के तहत पूरी की जाएगी.

इससे पहले 2 फ़रवरी को दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा ने राजपाल यादव को आत्मसमर्पण करने के लिए 4 फ़रवरी तक का वक्त दिया था. हालांकि, 4 फ़रवरी तक आत्मसमर्पण करने के आदेश का पालन न करने पर अदालत ने कड़ी नाराज़गी जताई. कोर्ट ने कहा कि अदालत के निर्देशों की अनदेखी कानून के प्रति सम्मान की कमी को दर्शाती है. हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आत्मसमर्पण किए बिना किसी भी तरह की आगे की सुनवाई नहीं होगी. इसके बाद 5 फ़रवरी को राजपाल यादव ने जेल में आत्मसमर्पण किया.

क्या है मामला

दरअसल राजपाल यादव के ख़िलाफ़ यह मामला उनकी निर्देशित पहली फिल्म ‘अता-पता-लापता’ से जुड़ा है. साल 2010 में फ़िल्म बनाने के लिए उन्होंने मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी से करीब पांच करोड़ रुपये का कर्ज़ लिया था. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही और कथित तौर पर अभिनेता को आर्थिक नुकसान हुआ. इसके बाद वह कंपनी से लिया गया कर्ज़ वापस नहीं कर पाए.

लाइव लॉ के मुताबिक़ कोर्ट ने कहा, ”अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि याचिकाकर्ता नंबर 1 (राजपाल यादव) का आचरण निंदनीय है. बार-बार आश्वासन देने और अदालत से रियायत मांगने के बावजूद उन्होंने समय-समय पर पारित आदेशों का पालन नहीं किया.”

‘लाइव लॉ’ के मुताबिक़ कर्ज़ के भुगतान के लिए कंपनी को दिए गए कई चेक बाउंस हो गए, जिसके कारण उनके ख़िलाफ़ चेक बाउंस का मामला दर्ज किया गया. निचली अदालत ने राजपाल यादव को दोषी ठहराते हुए छह महीने की जेल की सज़ा सुनाई थी. बाद में मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा, जहां शुरुआती दौर में सज़ा पर रोक लगाई गई. हालांकि शर्त यह रखी गई कि वह शिकायतकर्ता कंपनी को बकाया राशि का भुगतान करेंगे.

‘लाइव लॉ’ के अनुसार अदालत ने कहा , ”अभिनेता ने कई बार भुगतान का आश्वासन दिया, लेकिन तय समय सीमा के भीतर राशि जमा नहीं कर पाए.” कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए कहा कि बार-बार दिए गए आश्वासनों का उल्लंघन किया गया है. इसी आधार पर हाई कोर्ट ने सख्त रुख़ अपनाते हुए आत्मसमर्पण का आदेश दिया, जिसके बाद गुरुवार को राजपाल यादव को तिहाड़ जेल जाना पड़ा. राजपाल यादव के ऊपर चेक बाउंस का केस किया गया था.

चेक बाउंस मामले में ही दिल्ली की निचली अदालत ने अप्रैल 2018 में राजपाल यादव को छह महीने की सज़ा सुनाई थी. ये सजा निगोशिएबल इंस्ट्रयूमेंट एक्ट 1881 की धारा 138 के उल्लंघन के आरोप में दी गई है. इसके बाद जनवरी 2019 में सत्र न्यायालय ने भी इस फैसले को बरकरार रखा था. दिल्ली हाई कोर्ट ने 2024 में सज़ा पर रोक इस आश्वासन पर लगाई थी कि कर्ज़ की रकम वापस कर दी जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया.

राजपाल यादव ने दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 में अदालत के सामने राशि चुकाने का आश्वासन दिया, लेकिन वह इसमें विफल रहे. इसके बाद कोर्ट ने 4 फ़रवरी को आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया. इससे पहले भी वर्ष 2013 में झूठा हलफ़नामा दायर करने के एक मामले में राजपाल यादव को 3 दिसंबर से 6 दिसंबर तक तिहाड़ जेल भेजा गया था.

निचली अदालत से सज़ा मिलने के बाद 28 अप्रैल 2018 को राजपाल यादव ने शाहजहांपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि उन्हें साजिश के तहत फंसाया गया है. भारत में चेक बाउंस (अनादर) एक गंभीर कानूनी अपराध है, ये निगोशिएबल इंस्ट्रयूमेंट एक्ट 1881 की धारा 138 के तहत आता है. बैंक खाते में पर्याप्त धनराशि न होने या अन्य तकनीकी कारणों से चेक अस्वीकृत होने पर, जारी कर्ता को 30 दिनों के भीतर कानूनी नोटिस भेजकर 15 दिनों में भुगतान की मांग की जा सकती है. भुगतान न होने पर, 2 साल तक की जेल या चेक राशि से दोगुनी तक का जुर्माना हो सकता है.

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