न्यूज डेस्क : भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) अब अपने अंतिम कानूनी जांच-पड़ताल के चरण में पहुंच गया है। दोनों पक्ष इसे जल्द से जल्द पूरा कर इसी वर्ष लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। भारत में ईयू के राजदूत हर्वे डेल्फिन ने इस समझौते को “खोखला नहीं, बल्कि बेहद ठोस” बताते हुए कहा कि आधिकारिक हस्ताक्षर से पहले जरूरी कानूनी प्रक्रियाएं तेजी से पूरी की जा रही हैं, ताकि यह समझौता शीघ्र प्रभाव में आ सके।
Highlights:
आर्थिक हित और सप्लाई चेन मजबूती पर जोर
राजदूत डेल्फिन के अनुसार इस एफटीए के पीछे कई मजबूत कारण हैं, जिनमें साझा आर्थिक हित, दोनों अर्थव्यवस्थाओं की परस्पर पूरकता, बड़े बाजारों तक पहुंच, सप्लाई चेन का विविधीकरण और जोखिम कम करना प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि इस समझौते से भारत और यूरोप के कारोबारी समुदायों में खासा उत्साह है, क्योंकि इससे निवेश बढ़ेगा, सप्लाई चेन का बेहतर एकीकरण होगा और वर्कर मोबिलिटी के नए अवसर खुलेंगे।
सुरक्षा और रक्षा साझेदारी को भी मिलेगी मजबूती
डेल्फिन ने हाल ही में हस्ताक्षरित भारत-ईयू सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी को भी एक अहम राजनीतिक कदम बताया। उनके मुताबिक यह पिछले पांच वर्षों से चल रही सुरक्षा-रक्षा वार्ताओं की स्वाभाविक प्रगति है, जिससे दोनों पक्षों के बीच भरोसा और गहरा हुआ है।
आगे के सहयोग की रूपरेखा
अगले चरण में गोपनीय सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए “सिक्योरिटी ऑफ इन्फार्मेशन एग्रीमेंट” पर बातचीत, रक्षा उद्योग में सह-विकास और सह-निवेश की संभावनाएं शामिल हैं। उन्होंने संकेत दिया कि इस साझेदारी से हिंद महासागर में सुरक्षित समुद्री मार्गों की रक्षा, साइबर और हाइब्रिड खतरों से निपटने तथा एआई सुरक्षा में सहयोग और मजबूत होगा। भविष्य में यूरोपीय सैन्य प्लेटफॉर्म की तैनाती उद्योग और परिचालन जरूरतों पर निर्भर करेगी।


