उच्च शिक्षा से जुड़े नए नियमों को लेकर देशभर में चल रहे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला लिया है। कोर्ट ने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए समानता नियमों पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है और केंद्र सरकार व UGC से जवाब मांगा है। इस फैसले के बाद शिक्षा जगत और छात्र संगठनों में चर्चा तेज हो गई है।
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सुप्रीम कोर्ट का फैसला और आदेश
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि नए नियमों के कई प्रावधान स्पष्ट नहीं हैं और इनके गलत इस्तेमाल की आशंका है। कोर्ट ने केंद्र सरकार और UGC को नोटिस जारी करते हुए नियमों का ड्राफ्ट दोबारा तैयार करने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा कि न्याय व्यवस्था का उद्देश्य सभी वर्गों को सुरक्षा देना है और किसी भी पीड़ित को न्याय से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आरक्षित समुदायों के लिए शिकायत निवारण व्यवस्था बनी रहनी चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को तय की गई है।
क्या है UGC का नया नियम
UGC ने जनवरी 2026 में प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशन 2026 लागू किया था। इसका उद्देश्य कॉलेज और विश्वविद्यालयों में जाति, धर्म, लिंग और अन्य आधारों पर होने वाले भेदभाव को रोकना बताया गया था। इन नियमों के तहत सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में इक्विटी कमेटी और इक्वल अपॉर्चुनिटी सेंटर बनाना जरूरी किया गया था, जो भेदभाव से जुड़ी शिकायतों को देखेंगे।
नियमों को लेकर विवाद क्यों हुआ
नए नियम लागू होने के बाद देश के कई हिस्सों में विरोध शुरू हो गया। कुछ छात्र संगठनों और याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि नियमों में जातिगत भेदभाव की परिभाषा सीमित है और कुछ वर्गों को संस्थागत सुरक्षा से बाहर रखा गया है। याचिकाओं में यह भी कहा गया कि नियमों का दुरुपयोग हो सकता है और झूठी शिकायतों को रोकने के लिए पर्याप्त प्रावधान नहीं हैं। इस मामले में मृत्युंजय तिवारी, एडवोकेट विनीत जिंदल और राहुल दीवान समेत कई लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया कि नियम गैर-समावेशी हैं और इन्हें दोबारा समीक्षा की जरूरत है।
देशभर में विरोध और समर्थन दोनों
नए नियमों को लेकर देशभर में अलग-अलग प्रतिक्रिया सामने आई है। कुछ छात्र और संगठन नियमों का विरोध कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे शिक्षा व्यवस्था में समानता लाने की दिशा में जरूरी कदम बता रहे हैं। कई विश्वविद्यालयों में प्रदर्शन भी हुए हैं, वहीं कुछ राजनीतिक नेताओं ने नियमों का समर्थन भी किया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद फिलहाल पुराने नियम लागू रहेंगे। अब सभी की नजर अगली सुनवाई पर है, जिसमें कोर्ट तय करेगा कि नए नियमों में क्या बदलाव जरूरी हैं और इन्हें लागू किया जा सकता है या नहीं।


