Monday, September 14, 2026

18 साल बाद भारत-EU के बीच बड़ा समझौता, फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर लगी मुहर

न्यूज डेस्क : भारत और यूरोपीय यूनियन आज मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किया। साल 2007 से चली आ रही लंबी बातचीत के बाद अब यह ऐतिहासिक डील अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, समझौते पर सहमति बन चुकी है और आज इसका औपचारिक ऐलान किया गया। इस डील को मदर ऑफ ऑल डील कहा जा रहा है, क्योंकि इसका दायरा और असर दोनों ही बेहद व्यापक होंगे।

व्यापार को नई रफ्तार 

करीब 18 वर्षों की चर्चा, मतभेद और दौरों के बाद भारत और ईयू आखिरकार एक साझा समझ पर पहुंचे हैं। इस एफटीए के लागू होने से भारत और यूरोप के बीच व्यापार को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है। दोनों पक्षों के लिए यह आर्थिक, रणनीतिक और व्यापारिक रूप से एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

यूरोपीय यूनियन की कुल जीडीपी करीब 20 ट्रिलियन डॉलर है, जबकि भारत की जीडीपी 4.18 ट्रिलियन डॉलर के आसपास है। ईयू की आबादी लगभग 45 करोड़ है, वहीं भारत की जनसंख्या 140 करोड़ से अधिक है। निर्यात और आयात के आंकड़ों में भी ईयू भारत से कहीं आगे है, लेकिन तेजी से बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था इस अंतर को कम कर रही है।

भारत में क्या-क्या होगा सस्ता?

एफटीए का सबसे सीधा फायदा भारतीय उपभोक्ताओं को मिलेगा। मर्सिडीज, बीएमडब्लू और पॉर्श जैसी लग्जरी कारें सस्ती हो सकती हैं। 15,000 यूरो (करीब 16.3 लाख रुपये) से अधिक कीमत वाली कारों पर टैरिफ घटकर 40 प्रतिशत रह सकता है। इसके अलावा विमान, इलेक्ट्रॉनिक सामान, केमिकल्स, आधुनिक मेडिकल उपकरण, मेटल स्क्रैप और यूरोप से आने वाली शराब की कीमतों में भी कमी आ सकती है।

भारतीयों के लिए नए मौके

इस समझौते से IT, इंजीनियरिंग, टेलीकॉम और बिजनेस जैसे सर्विस सेक्टर में भारतीय पेशेवरों के लिए नए अवसर खुलेंगे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एफटीए होने पर 2031 तक भारत-ईयू के बीच व्यापार 51 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जिससे भारत के निर्यात में भी बड़ी बढ़ोतरी होगी।

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एयर नाऊ स्पेशल

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