रांची: झारखंड में दशकों से सक्रिय नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में पहुंचता नजर आ रहा है। सुरक्षा बलों की लगातार और सटीक कार्रवाई से माओवादी संगठनों को भारी नुकसान हुआ है। बीते एक साल के भीतर राज्य में 45 नक्सलियों को मार गिराया गया, जिनमें बड़ी संख्या में हार्डकोर और इनामी नक्सली शामिल हैं। इन पर घोषित इनाम की कुल राशि 7.64 करोड़ रुपये बताई जा रही है। झारखंड पुलिस, सीआरपीएफ, कोबरा बटालियन और झारखंड जगुआर की संयुक्त कार्रवाई में यह बड़ी सफलता मिली है। मारे गए 45 नक्सलियों में 24 से अधिक नक्सली ऐसे थे जिन पर इनाम घोषित था।
Highlights:
कई जिलों में चला सघन एंटी-नक्सल अभियान
पिछले एक साल के दौरान पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा), लातेहार, पलामू, गुमला, बोकारो, हजारीबाग और लोहरदगा जैसे नक्सल प्रभावित जिलों में लगातार सर्च और ऑपरेशन चलाए गए। दुर्गम जंगलों और पहाड़ी इलाकों में सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के ठिकानों को ध्वस्त किया। इन अभियानों में नक्सली संगठनों के कई सीनियर कमांडर, जोनल और एरिया कमेटी सदस्य मारे गए हैं। इससे नक्सलियों की कमांड और कंट्रोल व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। कई इलाकों में नक्सली दस्ता पूरी तरह बिखर गया है।
फॉरवर्ड कैंप बने नक्सलियों के लिए चुनौती
नक्सलवाद के कमजोर पड़ने का एक बड़ा कारण दुर्गम इलाकों में सुरक्षा बलों के नए फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस और अस्थायी कैंप हैं। इससे नक्सलियों की आवाजाही, हथियारों की सप्लाई और संपर्क व्यवस्था बाधित हुई है। सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति भी नक्सलियों के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। कई नक्सली हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौट चुके हैं, जबकि कई अन्य आत्मसमर्पण की तैयारी में बताए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का बढ़ा भरोसा
नक्सल प्रभावित इलाकों में अब सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सुविधाएं पहुंच रही हैं। विकास कार्यों से स्थानीय लोगों का भरोसा सरकार और प्रशासन पर बढ़ा है, जिससे नक्सलियों को जनसमर्थन मिलना मुश्किल हो गया है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार झारखंड में अब नक्सल प्रभाव सीमित इलाकों तक सिमट गया है। कई थाना क्षेत्र, जो पहले माओवादियों के गढ़ माने जाते थे, अब पूरी तरह नक्सल मुक्त हो चुके हैं।
2026 तक झारखंड को नक्सल मुक्त
केंद्र और राज्य सरकार ने 2026 तक झारखंड को नक्सल मुक्त करने का लक्ष्य तय किया है। इसी दिशा में खुफिया तंत्र को मजबूत कर लगातार ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं। सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा हालात को देखते हुए नक्सलवाद के पूरी तरह खात्मे में अब ज्यादा समय नहीं लगेगा। आने वाले महीनों में या तो बचे हुए नक्सली आत्मसमर्पण करेंगे या फिर सुरक्षा बलों की कार्रवाई में समाप्त होंगे।


