रांची : झारखंड में मैट्रिक और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षा 3 फरवरी से शुरू होने जा रही है। इस बार परीक्षा में करीब 7.48 लाख छात्र-छात्राएं शामिल होंगे, लेकिन परीक्षा से पहले विद्यार्थियों की तैयारी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। वजह यह है कि इस सत्र में न तो अर्द्धवार्षिक परीक्षा हुई और न ही राज्य स्तर पर प्री-बोर्ड परीक्षा को लेकर कोई स्पष्ट निर्देश जारी किया गया।
Highlights:
तीन साल से बदले पैटर्न पर नहीं हुई परीक्षा
मैट्रिक के परीक्षार्थियों की स्थिति और भी चिंताजनक है। जिस पैटर्न पर 10वीं की बोर्ड परीक्षा होनी हैं, उस आधार पर विद्यार्थियों ने पिछले तीन वर्षों में एक भी परीक्षा नहीं दी है। आठवीं और नौवीं की परीक्षाएं ओएमआर शीट पर ली गई थीं, जिसमें बहुविकल्पीय प्रश्न होते हैं। वहीं 10वीं में परीक्षा ही नहीं हुई। अब अचानक लिखित परीक्षा पैटर्न पर बोर्ड परीक्षा देना छात्रों के लिए मुश्किल हो सकता है।
कक्षा 9वीं और 11वीं की भी अर्द्धवार्षिक परीक्षा नहीं
केवल मैट्रिक और इंटर ही नहीं, बल्कि कक्षा 9वीं और 11वीं की भी अर्द्धवार्षिक परीक्षा इस सत्र में नहीं हो सकी। राज्य में आमतौर पर इन कक्षाओं की परीक्षा भी ओएमआर शीट पर होती है, लेकिन इस बार वह प्रक्रिया भी पूरी नहीं की गई।
हालांकि स्कूल ऑफ एक्सीलेंस और सीबीएसई स्कूलों में स्थिति अलग रही। स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में अर्द्धवार्षिक और दो-दो प्री-बोर्ड परीक्षाएं कराई गईं। झारखंड शिक्षा परियोजना द्वारा इसके लिए दिशानिर्देश जारी किए गए थे और रिजल्ट का विश्लेषण कर पठन-पाठन को लेकर सुझाव भी दिए गए। सीबीएसई स्कूलों में भी 10वीं और 12वीं के छात्रों की दो-दो प्री-बोर्ड परीक्षाएं हुईं।
प्री-बोर्ड परीक्षा स्कूलों पर छोड़ी गई
जैक बोर्ड के अंतर्गत आने वाले स्कूलों में प्री-बोर्ड परीक्षा पूरी तरह स्कूलों की इच्छा पर निर्भर रही। न तो राज्य स्तर से कोई शिड्यूल जारी हुआ और न ही स्पष्ट गाइडलाइन दी गई। कुछ जिलों में जिला स्तर पर परीक्षा ली गई, तो कुछ स्कूलों ने अपने स्तर पर आयोजन किया।
पदाधिकारी का कहना
शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों का कहना है कि 10वीं और 12वीं की प्री-बोर्ड परीक्षा स्कूलों द्वारा अपने स्तर से ली गई है। यह सही है कि राज्य स्तर से शिड्यूल जारी नहीं हुआ। अगले सत्र से सभी कक्षाओं की अर्द्धवार्षिक और प्री-बोर्ड परीक्षा तय प्रक्रिया के अनुसार कराई जाएगी।
शिक्षक संघ की नाराजगी
झारखंड माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश महासचिव गंगा प्रसाद यादव ने कहा कि प्री-बोर्ड परीक्षा को लेकर स्कूलों को कोई स्पष्ट निर्देश नहीं मिला। पहले विभाग स्तर से तिथि निर्धारित होती थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ, जिससे छात्रों की तैयारी प्रभावित हुई है।


