रांची: झारखंड में डिप्लोमा इन फार्मेसी (D.Pharma) के नाम पर चल रहे बड़े खेल का पर्दाफाश हुआ है। स्वास्थ्य विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य के 34 फार्मेसी कॉलेजों की मान्यता रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। दरअसल राज्य के कुल 71 फार्मेसी संस्थानों की जांच के दौरान स्वास्थ्य विभाग ने पाया कि 34 कॉलेजों ने ना तो राज्य सरकार से अनिवार्य एनओसी प्राप्त की थी और ना ही इसके लिए आवेदन किया। इसके साथ ही इन संस्थानों के पास अपनी जमीन, और अपना भवन नहीं है। साथ ही टीचिंग और नन-टीचिंग स्टाफ की भी भारी कमी पाई गई है। इन परिस्थितियों में इन कॉलेजों में जारी डिप्लोमा इन फार्मेसी पाठ्यक्रम का संचालन पूरी तरह नियमों के खिलाफ माना गया है।
Highlights:
सत्र 2025-26 के लिए नए नामांकन पर रोक
सरकार ने इन कॉलेजों को पहले जारी किए गए ‘लेटर ऑफ कंसेंट’ को निरस्त करने का फैसला लिया है। इसके साथ ही, स्वास्थ्य विभाग ने PCI नई दिल्ली को पत्र लिखकर अनुशंसा की है कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए इन संस्थानों में किसी भी नए छात्र का नामांकन न होने दिया जाए।
जांच में हुए चौंकाने वाले खुलासे
स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने जब राज्य के 71 संस्थानों की पड़ताल की, तो स्थिति कुछ ऐसी मिली:
- बिना NOC के संचालन: राज्य के 34 कॉलेजों के पास न तो राज्य सरकार की अनिवार्य NOC थी और न ही उन्होंने इसके लिए आवेदन किया था।
- कागजों पर कॉलेज: कई संस्थानों के पास न तो अपनी जमीन है और न ही अपना भवन है, बस कागजों पर ही इनका संस्थान खाद्य है।
- शिक्षकों का टोटा: सभी कॉलेजों में टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ की भारी कमी पाई गई है।
36 अन्य संस्थानों को मिला ‘अल्टीमेटम’
जांच के दायरे में 36 ऐसे कॉलेज भी आए हैं जिनके पास बुनियादी ढांचा यानि जमीन और भवन तो है, लेकिन स्टाफ की भारी कमी और NOC न होने के कारण उन पर भी कार्रवाई का खतरा मंडरा रहा है। विभाग ने इन्हें ‘प्रयासरत’ श्रेणी में रखते हुए स्पष्टीकरण मांगा है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर इनका भी ‘लेटर ऑफ कंसेंट’ छीना जा सकता है।
निशाने पर रांची और खूंटी के प्रमुख कॉलेज
मान्यता रद्द होने वाले मुख्य संस्थान: राज्य के 34 कॉलेजों के लेटर ऑफ कंसेंट निरस्त किया जाएगा, इनमें से 10 फार्मेसी कॉलेज ऐसे हैं जो रांची और खूंटी जिले में स्थापित हैं। इन कॉलेजों में विद्यापति कॉलेज ऑफ हेल्थ एंड प्रोफेशनल एजुकेशन (ओरमांझी), अर्नव इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी (अंगारा), सिटी फार्मेसी कॉलेज (पिस्का मोड़), एसीएमएस इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी (डरबा), जसलोक कॉलेज ऑफ फार्मेसी (सिमलिया), बाजरा कॉलेज ऑफ फार्मेसी (हेहल), आरोहण कॉलेज ऑफ फार्मेसी (गेतलात), अर्श नारायणी कॉलेज ऑफ फार्मेसी (हवाई नगर), इंस्टीट्यूट ऑफ आसनबनी और निर्मला देवी कॉलेज (खूंटी) शामिल है।
स्पष्टीकरण के घेरे में आए संस्थान: इनमें फ्लोरेंस कॉलेज ऑफ फार्मेसी (डरबा), धन्वंतरी कॉलेज ऑफ फार्मेसी (चकला), स्वर्णरेखा कॉलेज ऑफ फार्मेसी (बरगाई), शाइन अब्दुर रज्जाक अंसारी इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एजुकेशन एंड रिसर्च सेंटर (इरबा), डॉ. बी.आर आंबेडकर कॉलेज ऑफ फार्मेसी (पिस्का नगर), एसपी सिंह कॉलेज ऑफ फार्मेसी (बरियातू), रांची कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च सेंटर (ओरमांझी), इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन एंड टेक्नोलॉजी (रुडिया), जैनेंद्र फार्मेसी कॉलेज (रातू), रिधिमा कॉलेज ऑफ फार्मेसी (अरगोड़ा), काशीबाड़ा गणपत कॉलेज ऑफ फार्मेसी (ठाकुरगांव), झारखंड फार्मेसी कॉलेज (पुंदाग), पटेल कॉलेज ऑफ फार्मेसी (अरगोड़ा), मनरखन महतो फार्मेसी कॉलेज (केदल), सनराइज कॉलेज ऑफ फार्मेसी (इरबा), भारती कॉलेज ऑफ फार्मेसी (मांडर), रांची कॉलेज ऑफ फार्मेसी (नामकुम), इंडेन कॉलेज ऑफ फार्मेसी (रातू), अरण्यक कॉलेज ऑफ फार्मेसी (ओरमांझी), विकास इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी (नेवरी), आरएम इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी (इरबा), ट्राइबल अमत कॉलेज ऑफ फार्मेसी (कोकर) और तुपुदाना इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज व सहयोग कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज, खूंटी-तैमारा रोड शामिल हैं।
परीक्षा समिति की भूमिका पर भी उठे सवाल
सिर्फ कॉलेज ही नहीं, विभाग ने डिप्लोमा इन फार्मेसी एग्जामिनेशन कमेटी को भी कटघरे में खड़ा किया है। विभाग ने परीक्षा कमेटी के अध्यक्ष और सदस्य सचिव से समय रहते हुए भी संसाधनों की जांच नहीं किए जाने पर सवाल करते हुए जवाब मांगा है।
इसके साथ ही विभाग ने सख्त चेतावनी देते हुआ कहा कि “बिना वैध NOC और PCI मानकों के किसी भी कॉलेज को चलने नहीं दिया जाएगा। जिन छात्रों ने अवैध संस्थानों में दाखिला लिया है, उनके परीक्षा पंजीकरण पर भी रोक लगाई जा सकती है। हमारा उद्देश्य फार्मेसी शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों का भविष्य सुरक्षित करना है।”


