Sunday, September 13, 2026

कोलकाता में IPAC प्रमुख प्रतीक जैन पर ईडी की रेड, मौके पर पहुंचीं ममता बनर्जी; कार्रवाई को बताया राजनीतिक साजिश

पश्चिम बंगाल : पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में आज उस वक्त राजनीतिक तापमान अचानक बहुत तेज़ हो गया, जब केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने IPAC प्रमुख प्रतीक जैन के आवास और कार्यालय पर एक साथ छापेमारी शुरू की। ईडी की यह कार्रवाई कथित वित्तीय अनियमितताओं के एक मामले में की जा रही है, जिसमें एजेंसी की टीम दस्तावेजों की जांच, डिजिटल डेटा की पड़ताल और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कर रही है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने उस समय एक बड़ा राजनीतिक मोड़ ले लिया, जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद उस जगह पहुंच गईं, जहां ईडी की टीम जांच कर रही थी।

किस मामले में हो रही है जांच

ममता बनर्जी के मौके पर पहुंचते ही माहौल और ज्यादा संवेदनशील हो गया और राजनीतिक गलियारों में इस कदम को केंद्र सरकार और उसकी जांच एजेंसियों के खिलाफ एक खुली सियासी चुनौती के रूप में देखा जाने लगा। सूत्रों के मुताबिक, ईडी यह छापेमारी वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े एक मामले में कर रही है, हालांकि एजेंसी की ओर से अब तक आरोपों का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। जांच टीम एक साथ प्रतीक जैन के घर और कार्यालय में दस्तावेजों की जांच कर रही है, कंप्यूटर सिस्टम और हार्ड डिस्क खंगाले जा रहे हैं और जरूरी कानूनी प्रक्रियाएं अपनाई जा रही हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का वहां पहुंचना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि राज्य सरकार इस कार्रवाई को सिर्फ कानूनी जांच नहीं, बल्कि राजनीतिक दबाव की कार्रवाई के तौर पर देख रही है।

ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया

ममता बनर्जी ने मौके पर पहुंचते ही केंद्र सरकार और ईडी पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि यह पूरी कार्रवाई लोकतंत्र को कुचलने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि ईडी उनकी पार्टी के आईटी सेक्टर और उससे जुड़े कार्यालयों में इस तरह दस्तावेज लेने आई है, जैसे कोई साजिश रची जा रही हो। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पार्टी से जुड़े अहम दस्तावेजों और डेटा को बिना पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के जब्त किया गया और इस दौरान कुछ मामलों में नाम हटाने और रिकॉर्ड में हेरफेर किए जाने की आशंका भी है। ममता बनर्जी ने साफ कहा कि यह सब राजनीतिक उत्पीड़न का हिस्सा है और इसके पीछे केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय की एक तयशुदा स्क्रिप्ट काम कर रही है। उन्होंने यहां तक कहा कि जो लोग देश की सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने में असफल हैं, वही लोग अब विपक्षी दलों को डराने और कमजोर करने के लिए जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

SIR का भी हुआ जिक्र

मुख्यमंत्री ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया और कहा कि देश में इस समय दो समानांतर प्रक्रियाएं चल रही हैं, एक तरफ मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाने की कोशिशें हो रही हैं और दूसरी तरफ अवैध तरीके से संवेदनशील डेटा इकट्ठा किया जा रहा है, जो लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है। ममता बनर्जी ने खास तौर पर SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि इसके जरिए नाम गायब किए जा रहे हैं और दस्तावेजों का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इस तरह की कार्रवाई की पहले से जानकारी थी, इसलिए पार्टी से जुड़े सभी महत्वपूर्ण हार्ड डिस्क और जरूरी डेटा पहले ही सुरक्षित कर लिए गए थे, ताकि किसी भी तरह की जब्ती से पार्टी के आंतरिक कामकाज और रणनीति पर असर न पड़े।

ममता ने कहा कि उनका आईटी ऑफिस पहले भी निशाने पर रहा है और इसीलिए वह खुद मौके पर जाकर पूरी स्थिति को समझना चाहती थीं। उन्होंने साफ किया कि यह देखना उनकी जिम्मेदारी है कि यह कार्रवाई किस उद्देश्य से की जा रही है और इसके पीछे किस स्तर पर फैसले लिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने केंद्र की एजेंसियों पर विपक्षी दलों को डराने, दबाने और राजनीतिक रूप से कमजोर करने का आरोप लगाया और कहा कि उनकी पार्टी इस साजिश के खिलाफ कानूनी और राजनीतिक, दोनों मोर्चों पर मजबूती से संघर्ष करेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी का इस तरह सीधे ईडी की रेड वाली जगह पर पहुंचना एक बड़ा राजनीतिक संदेश है, जिसका मकसद यह दिखाना है कि राज्य सरकार केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई के सामने झुकने वाली नहीं है।

इससे पहले भी ईडी की हुई कार्रयवाई

पश्चिम बंगाल में इससे पहले भी ईडी और सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाइयों को लेकर राज्य सरकार और केंद्र के बीच टकराव की स्थिति बनी रही है। शिक्षक भर्ती घोटाला हो या राशन वितरण से जुड़े मामले, कई बार ईडी की कार्रवाईयों ने बंगाल की राजनीति में भारी उथल-पुथल मचाई है। ऐसे में IPAC प्रमुख प्रतीक जैन के खिलाफ की जा रही यह कार्रवाई भी केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे चुनावी रणनीति, आईटी नेटवर्क और राजनीतिक प्रबंधन से जोड़कर देखा जा रहा है। IPAC यानी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी देश की राजनीति में एक अहम भूमिका निभाने वाला संगठन है, जो कई दलों की चुनावी रणनीति और जमीनी मैनेजमेंट से जुड़ा रहा है। यही वजह है कि इस पर हुई कार्रवाई को लेकर राजनीतिक हलकों में सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह सिर्फ वित्तीय जांच है या इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक मकसद भी है।

वहीं दूसरी ओर, विपक्ष का कहना है कि जांच एजेंसियों को अपना काम कानून के दायरे में करना चाहिए और किसी भी तरह की राजनीतिक दखलअंदाजी नहीं होनी चाहिए। कुल मिलाकर, कोलकाता में ईडी की यह रेड और ममता बनर्जी की तीखी प्रतिक्रिया ने एक बार फिर केंद्र और राज्य के बीच टकराव को सामने ला दिया है। यह मामला अब केवल दस्तावेजों की जांच या वित्तीय अनियमितताओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि लोकतंत्र, संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका और राजनीतिक स्वतंत्रता जैसे बड़े सवालों से जुड़ गया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है और यह देखना अहम होगा कि जांच एजेंसी की कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ती है और इसका पश्चिम बंगाल की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।

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